बिहार में 500 छात्र नीतीश की वजह से नहीं बन पाएंगे डॉक्टर: मोदी

पूर्णिया, समस्तीपुर, छपरा और मधेपुरा में नए मेडिकल कॉलेज खोलना तो दूर की बात है, पहले से कार्यरत नौ मेडिकल कॉलेजों में पांच में इस बार 500 छात्र डॉक्टर बनने से वंचित रह जाएंगे। चूंकि, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने चिकित्सकों की कमी व अन्य सुविधाएं नहीं रहने के कारण इन कॉलेजों में नामांकन पर रोक लगा दी है।
दमकल ढूंढ रहे नीतीश मोदी ने कहा कि बिहार के वास्तविक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो स्वयं इस विभाग के मंत्री थे। भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद वे राजनीतिक जोड़-तोड़ में मशगूल रहे और इस समस्या पर ध्यान ही नहीं दिया। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों की कमियों को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया।
इससे पांच मेडिकल कॉलेजों में इस साल छात्र-छात्राओं का नामांकन नहीं हो पाएगा। एमसीआई ने पटना स्थित आईजीआईएमएस, बेतिया और पावापुरी मेडिकल
कॉलेजों में एमबीबीएस में नामांकन पर रोक लगा दिया है। वहीं, गया और भागलपुर मेडिकल कॉलेजों पर भी तलवार लटकी हुई है।
सफाई दे रहे बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-
पटना भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सीपी ठाकुर ने मेडिकल कॉलेजों में नामांकन पर रोक को गलत ठहराया है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने आईजीआईएमएस, बेतिया और पावापुरी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में नामांकन पर रोक लगा दी है। डॉ. ठाकुर ने कहा कि इससे मेधावी छात्रों को परेशानी होगी।
निजी कालेजों में नामांकन के लिए 20 लाख रुपए लिए जाते हैं। ऐसे में प्रतिभावान छात्रों का क्या होगा? बिहार गरीब राज्य है और यहां नामांकन लेने वाले ज्यादातर छात्र गरीब हैं। बिहार सरकार को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के पास जाकर तमाम कमियों को दूर करने का भरोसा दिलाना चाहिए, ताकि नामांकन हो सके। साथ ही उन कमियों को 6 माह में दूर करना चाहिए। हालांकि ठाकुर की भावनात्मक बातों पर काउंसिल ने कोई संज्ञान नहीं लिया है।












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