बिहार की इस रेल लाइन को लालू भी नहीं करा सके चालू
पटना (मुकुन्द सिहं)। हाजीपुर-सुगौली रेल लाइन पर आज तक सिर्फ राजनीति हावी है। नेताओं ने इसे अपना मुद्दा बनाकर केवल लोगों से वोट लिये हैं। आज भी इस रेल लाइन का हाल वैसा का वैसा ही है जैसा 10 साल पहले था। यह रेल लाइन ऐसे लोगों का इंतजार कर रही है, जो इसे चालू करा दे।
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हम उस रेलवे लाइन की बात कर रहे हैं जिसका उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2004 की शुरुआत में किया था। उन्होंने इस योजना के लिए प्रारंभिक दौर में 325 करोड़ रुपए का आवंटन किया था। इस योजना के अंतर्गत किसानों से जमीन के बदले सरकारी दर से चार गुना ज्यादा मुआवजा के साथ-साथ भूस्वामी के एक परिजन को रेल विभाग में नैकरी देने का वादा किया था। आज तक किसी को ना ही तो मुआवजा मिला और न ही नौकरी। इस वजह से पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर व वैशाली के किसानों में आक्रोश है।
हाजीपुर से सुगौली तक 80 किलोमीटर की दूरी है। इस रूट पर जहां-तहां मिट्टी भराई हुई, लेकिन पटरियां नहीं बिछायी गईं। अब तो पानी के प्रेशर से रेल लाइन की मिट्टी भी बह गई है। और जमीन भी सरपट हो रही है। वहीं लालगंज व वैशाली स्टेशन बनकर तैयार हैं, लेकिन इस रेल लाइन में अभी कितना वक्त लगेगा किसी को पता नही है।
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जरा सोचिये खुद को बिहार का मसीहा बताने वाले लालू प्रसाद यादव इस बीच (24 मई 2004 से 22 मई 2009 तक) केंद्रीय रेल मंत्री रहे। इसके बावजूद उन्होंने हाजीपुर-सुगौली के बीच रहने वाले लोगों के लिये कुछ नहीं किया। अब जब चुनाव आये हैं, तो वे अपने बेटों के लिये वोट मांग रहे हैं और गरीबों को जाति में बांट कर उनके उत्थान के वादे कर रहे हैं।
यहां के लोगो ने भी इस रेल लाइन से बड़ी उम्मीद लगाई थी। अगर रेल लाइन चालू हो जाती तो इस क्षेत्र से बेकारी की सम्स्या दूर हो सकती है। यहां से लोग दूसरे स्थानों पर व्यवसाय करने जाते हैं। यहां के कृषि उत्पादों की बिक्री भी रेलवे लाइन के आने से बढ़ सकती है, लेकिन नेताओं को इससे फर्क नहीं पड़ता। नेता आते हैं वोट लेते हैं और सपनों को तोड़ कर चले जाते हैं।













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