पटनाः पीएम मोदी के साथ बैठक में नीतीश कुमार ने उठाया कोटा में फंसे छात्रों का मुद्दा
पटना। कोरोना वायरस के बढ़ते असर को देखते हुए लॉकडाउन की अवधि केंद्र सरकार ने तीन मई तक निर्धारित किया था, जो कि खत्म होने को है। इससे पहले पीएम मोदी ने सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना के मौजूदा हालात की समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह चर्चा करीब 2 घंटे तक चली। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजस्थान के कोटा में फंसे छात्रों का मुद्दा उठाया।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ राज्य कोटा से अपने राज्य के छात्रों को निकाल ले गए हैं। कोटा में बिहार के भी छात्र-छात्राएं कोचिंग सेंटर में पढ़ाई करते हैं और लॉकडाउन के चलते वह वहां फंसे हुए हैं। बिहार सरकार लॉकडाउन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन कर रही है। जब तक लॉकडाउन के नियमों में संशोधन नहीं किया जाएगा तब-तक किसी को वापस बुलाना मुश्किल है। केंद्र सरकार इसे लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे। बाहर फंसे छात्रों को लाने के संबंध में पूरे देश में एक नीति होनी चाहिए।
बता दें कि कोटा में बिहार के हजारों बच्चे फंसे हैं। लॉकडाउन के कारण छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर बिहार में सियासत गर्माई हुई है। राजद नेता तेजस्वी यादव का कहना है कि जब दूसरे राज्यों के 25 हजार छात्र कोटा से वापस अपने घरों को जा सकते हैं, तो बिहार के छात्र वहां से यहां क्यों नहीं आ सकते? क्या हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, असम जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को कोरोना की चिंता नहीं है? बिहार सरकार छात्रों को वापस बुलाए या हमें ऐसा करने की अनुमति दे।
गौरतलब है कि बिहार से बाहर फंसे छात्रों और प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा था। इस पर बिहार सरकार ने कहा था कि लॉकडाउन के चलते बिहार के 17 लाख से ज्यादा लोग दूसरे राज्यों में फंसे हैं। लॉकडाउन के चलते इनको बिहार नहीं लाया जा सकता है। फौरी सहायता के तौर पर इनको भोजन, राशन और रुपए दिए जा रहे हैं। बिहार लॉकडाउन और केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन करेगा।












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