क्यों कराची में हिंदु मैरिज एक्ट का पास होना है हिंदुओं की बड़ी जीत?
कराची। पाकिस्तान की सिंध विधानसभा ऐतिहासिक हिंदू विवाह कानून पारित कर इतिहास रच दिया। ऐसा करने वाला यह देश का पहला राज्य बन गया है। अब वहां अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोग अपनी शादियों का पंजीकरण करा सकेंगे।
अभी इस बिल में एक प्वाइंट ऐसा भी है जिसे लेकर एक हिंदु संगठन को आपत्ति है लेकिन इसके बाद भी इस बिल का पास होना, पाकिस्तान में बसे हिंदुओ के लिए एक बड़ी जीत है।
पाक में हिंदुओं के लिए शादी का कोई भी कानून नहीं था जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियां आती थीं। अब इस कानून के पास होने से उनका मनोबल तो बढे़गा। साथ ही उनमें एक सुरक्षा की भावना भी जाग सकेगी। पाकिस्तान में हिंदुओं की ज्यादातर आबादी सिंध के कराची में रहती है।
आगे की स्लाइड में इस कानून से जुड़ी पांच खास बातों पर एक नजर डालिए।

पहला कानून हिंदुओं के लिए
इस विधेयक को संसदीय कार्य मंत्री निसार खुहरो ने विधानसभा में पेश किया। यह पूरे सिंध प्रांत पर लागू होगा जिसमें हिंदुओं की अच्छी खासी आबादी है। खुहरो ने कहा कि पाकिस्तान के बनने के बाद से यह पहला मौका है जब कोई ऐसा कानून पारित किया गया है।

रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से दिक्कतें
यह फैसला सिंध में हिंदू शादियों का औपचारिक रूप से पंजीकरण करने के लिए तंत्र मुहैया करने को लेकर किया गया है।मैरिज एक्ट के अभाव में मैरिज सर्टिफिकेट हासिल करने, नेशनल आईडेंटीटी प्रूफ हासिल करने और जायदाद में हिस्सेदारी में परेशानियां आती थीं।

एक प्वाइंट पर अटकी बात
हालांकि, एक प्रमुख हिंदू संगठन ने अधिनियम में से उस विवादास्पद उपबंध को हटाने की मांग की है जो पति-पत्नी में से किसी के धर्म परिवर्तन करने पर शादी को रद्द करने का प्रावधान करता है।

बिल का ड्राफ्ट
एक राष्ट्रीय संसदीय समिति ने पिछले हफ्ते इसके मसौदे को मंजूरी दी थी। इससे पाकिस्तान में हिंदूओं की शादी और तलाक के रजिस्ट्रेशन का रास्ता खुल सका है।

18 वर्ष शादी की उम्र
यह बिल शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष निर्धारित करता है। बिल के मुताबिक यह जरूरी है कि पुरुष और महिला के बीच सहमति से और कम से कम दो गवाहों की मौजूदगी में शादी का रजिस्ट्रेशन होगा। बिल के मुताबिक हर शादी का कानून के मुताबिक रजिस्ट्रेशन होगा।












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