पाकिस्तान का एक और घिनौना चेहरा, परंपरा के नाम पर बच्चों को बना रहा 'रैट चिल्ड्रन'

इस्लामाबाद, 22 अक्टूबर। भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान अक्सर अपनी काली करतूतों के चलते दुनियाभर में आलोचनाओं का पात्र बनता है। आतंक के पालनहार पाकिस्तान में अब इंसानियत इस हद तक मर चुकी है कि वह खुद अपनी आने वाली नस्लें बर्बाद कर रहा है। देश में परंपरा के नाम पर बच्चों जन्म से ही दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। बच्चों से कमाई के लिए उन्हें जबरन 'रैट चिल्ड्रन' बनाया जा रहा है।

पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहे रैट चिल्ड्रन

पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहे रैट चिल्ड्रन

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में ऐसे बच्चों (रैट चिल्ड्रन) की तादात दिन बन दिन बढ़ती जा रही है, यह कोई प्राकृतिक यान शारीरिक विकृति नहीं बल्कि इंसानों द्वारा किए गए घिनौने काम का नजीता है। बच्चों को जबरन रैट चिल्ड्रन बनाकर झूठी परंपरा के तहत उन्हें भीख मांगने पर मजबूर किया जाता है। पाकिस्तान के लोगों में ऐसी धारणा है कि रैट चिल्ड्रन को पैसे नहीं देंने पर उनकी बुरी किस्मत शुरू हो जाएगी।

किसे कहते हैं रैट चिल्ड्रन?

किसे कहते हैं रैट चिल्ड्रन?

पाकिस्तान में रैट चिल्ड्रन को लेकर शुरू से ही विवाद रहा है। दुनिया में भी इस मुद्दे पर पाकिस्तान की काफी आलोचना होती रही है। पाकिस्तान में रैट चिल्ड्रन उन बच्चों को कहा जाता है, जिनका माथा (सिर) पूरी तरह विकसित नहीं होता। शर्मनाक बात तो ये है कि इन बच्चों की ये हालत किसी बीमारी या पोषण की कमी से नहीं बल्कि भीख मंगवाने वाले माफिया द्वारा जबरन की जाती है।

बचपन से ही किया जाता है टॉर्चर

बचपन से ही किया जाता है टॉर्चर

पाकिस्तान में परंपरा के नाम पर इन बच्चों के साथ बर्बरता बढ़ती जा रही है। माना जाता है कि भीख मांगने पर मजबूर करने वाला गिरोह स्वस्थ बच्चों का पहले अपहरण करते हैं और फिर उन्हें विकृत करने या रैट चिल्ड्रन में बदलने के लिए क्रूर तरीके अपनाते हैं। बच्चों के सिर में बचपन से ही लोहे का मास्क में बांध दिया जाता है, ताकि उनके माथे को सामान्य आकार का होने से रोका जा सके। इस दर्दनाक अवस्था में बच्चों को सालों तक रहना पड़ता है।

बच्चों से मंगवाई जाती है भीख

बच्चों से मंगवाई जाती है भीख

एक रिपोर्ट के मुताबिक जब बच्चों का मुंह बिगड़ जाता है तो उनसे जबरन भीख मंगवाई जाती है। ऐसे बच्चों को सिर अजीब से बना दिया जाता है, इतना ही नहीं उनके चेहरे को क्रूरता से और खराब कर दिया जाता है। माना जाता है कि बच्चों को चेहरा जितना खराब होगा, उसने उतनी ज्यादा भीख मिलेगी। ऐसे बच्चों को पाकिस्तान में चूहा या रैट चिल्ड्रन कहा जाता है। उन्हें दूसरे लोग चूहा कहकर बुलाते हैं।

परंपरा के लिए बच्चों के साथ क्रूरता

परंपरा के लिए बच्चों के साथ क्रूरता

इन मासूम बच्चों की जिंदगी सिर्फ इसलिए खराब कर दी जाती है क्योंकि ऐसे बच्चों को भीख देना पाकिस्तान में शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो रैट चिल्ड्रन को पैसे देने से उनकार करता है, उसकी बुरी किस्मत शुरू हो जाती है। इस डर से लोग ऐसे बच्चों को पैसे देते हैं और इसी वजह से इसके पीछे कई बच्चों की जिंदगी बर्बाद कर दी जाती है। लेकिन इसकी शुरुआत क्यों और कैसे हुई यह जानना भी बेहद जरूरी है।

कहां से हुई इसकी शुरुआत?

कहां से हुई इसकी शुरुआत?

पाकिस्तान में ऐसे बच्चों को पैसे देने की परंपरा सालों पुरानी है, हालांकि उन दिनों बच्चे बीमारी की वजह से जन्मजात विकृत पैदा होते थे। लेकिन अब इसके पीछे कई आपराधिक गैंग काम करने लगे हैं। उन्हें बच्चों का चेहरा बिगाड़ कर भीख मंगवाने को अपना व्यवसाय बना लिया है। माना जाता है कि इसआपराधिक गतिविधी की शुरुआत आज से नहीं सदियों पहले हो गई थी।

मुस्लिम धर्म गुरु था इसकी वजह!

मुस्लिम धर्म गुरु था इसकी वजह!

कहा जाता है कि 17वीं शताब्दी में एक मुस्लिम धर्म गुरु हुआ करता था जो बच्चों के माथे पर सजावट के लिए हेलमेट लगाता था। बदले में बच्चे उसके लिए भीख मांगते। धर्म गुरु बांझ माता-पिता को इस शर्त पर बच्चों का आशीर्वाद देता था कि वो उन्हें अपना पहला बच्चा उन्हें दान करना होगा। वर्तमान में पाकिस्तान में ऐसा कई बच्चे सड़क किनारे नजर आएंगे, लेकिन अब ज्यादातक को जबरन विकृत बनाया जाता है। वहीं कई बच्चे अपने ही माता-पिता की लालच के चलते रैट चिल्ड्रन बनने को मजबूर हैं।

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