आतंकवाद को रोकने में नाकाम पाकिस्तान आया ग्रे लिस्ट में, अब और टूटगी अर्थव्यवस्था की कमर
पाकिस्तान को आधिकारिक तौर पर उन देशों की 'ग्रे लिस्ट' में फिर से डाल दिया गया है, जो आतंकवादियों को या आतंक को आर्थिक मदद मुहैया कराते हैं। दुनियाभर में आतंकवाद को हो रही वित्तीय मदद पर नजर रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ओर से पाकिस्तान को इस लिस्ट में डाला गया है।
पेरिस। पाकिस्तान को आधिकारिक तौर पर उन देशों की 'ग्रे लिस्ट' में फिर से डाल दिया गया है, जो आतंकवादियों को या आतंक को आर्थिक मदद मुहैया कराते हैं। दुनियाभर में आतंकवाद को हो रही वित्तीय मदद पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ओर से पाकिस्तान को इस लिस्ट में डाला गया है। पाक को इस लिस्ट में डालने का फैसला पेरिस में हुई एक मीटिंग में लिया गया। एफएटीएपफ एक ग्लोबल बॉडी है जो आतंकियों को होने वाली आर्थिक मदद और मनी लॉन्ड्रिंग से लड़ती है।

संस्था को आश्वस्त करने में नाकाम पाक
पाक यह साबित करने में असफल रहा था कि उसने अपनी सरजमीं पर पनप रहे आतंकियों को आर्थिक मदद रोकने में कोई खास कार्रवाई की है। पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल जिसे वित्त मंत्री डॉक्टर शमशाद अख्तर लीड कर रहे थे, उन्होंने एफएटीएफ को अवगत कराया कि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को मिलने वाली आर्थिक मदद रोकने और मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने अपील की कि पाकिस्तान को इसके बाद ग्रे लिस्ट में न डाला जाए। पाकिस्तान के न्यूज चैनल जीओ न्यूज की ओर से य ह जानकारी दी गई है। इस लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल करने का फैसला इस वर्ष फरवरी में लिया गया था। लेकिन जून माह तक के लिए इसमें राहत दे दी गई थी। पाकिस्तान को इतने समयावधि में इस मुद्दे को हल करने का निर्देश दिया गया था।
पहले भी रह चुका है इस लिस्ट में
इससे पहले पाकिस्तान वर्ष 2012 से 2015 तक इस लिस्ट में था। पाकिस्तान का दावा है कि एफएटीएफ के सुझावों के पाकिस्तान के सिक्योरिटीज एंड काउंटरिंग फाइनेंसिंग यानी एसईसीपी की ओर से एंटी मनी लॉन्ड्रिंग एंड काउंटरिंग फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म रेगुलेशन 20 जून 2018 को जारी किया गया था। इससे पहले आठ जून को नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (एनएससी) ने फिर से एफएटीएफ के साथ सहयोग करने के अपने वादे को दोहराया है। पाकिस्तान इस लिस्ट में न आए इसकी कड़ी मेहनत की जा रही थी। अधिकारियों को डर है कि इस लिस्ट में आने के बाद अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा जो पहले से ही बुरे दौर से गुजर रही है।












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