अब पाकिस्तान भी जपने लगा नमो मंत्र का जाप

सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी मोदी की लहर दौड़ पड़ी है। पाकिस्तान में मोदी की छवि हिन्दुवादी नेता की है, लेकिन साथ ही वहां यह भी तर्क दिए जाते हैं कि उनके सत्ता में आने पर भारत-पाक रिश्तों में अच्छी प्रगति होगी। पाक सरकार का मानना है कि भारत में चाहे मोदी प्रधानमंत्री बने या कोई और, भारत सरकार को ही फैसला करना होगा कि वह इस्लामाबाद के साथ कैसे संबंध चाहती है। पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया में इन दिनों मोदी जी जुड़ी खबरें आ रही हैं।
पढ़ें-मोदी के विरोधियों की जुबान पर जड़ा ताला
पाकिस्तान मामलों के जानकारों का मानना है कि भारतीयों ने अगर मोदी को देश के प्रधानमंत्री पद के लिए चुना तो वह पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता बेहतर ढंग से कर सकते हैं। उनकी मानें तो भारत में जब भी राइट विंग दलों की सरकार आई है भार-पाक के मुश्किल मुद्दों पर बातचीत में प्रगति हुई है। इसबार भी उनका मानना है कि अगर मोदी पीएम बनते है तो भारत-पाक संबंधों में बड़े फैसले लेने से कभी भी घबराएंगे।
पाकिस्तान के नागरिकों में मोदी के प्रति विश्वास बढ़ा है। उनका मानना है कि अब तो भारतीय मुसलमान भी मोदी का समर्थन कर रहे हैं और अगर वह गुजरात नरसंहार को भूल सकते हैं तो हम क्यों परेशान होते हैं?
1998 के लम्हें का योद करे तो परमाणु परीक्षण के बाद दोनों देशों के संभद बहुत खराब हो गए थे। उस वक्त भारत में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और पाक में नवाज शरीफ की, लेकिन वाजपेयी की पहल के कारण ही महज एक साल के भीतर दोनों दंशों के संबंध बेहतर होने लगे। वाजपेयी ने कड़ा फैसला लेते हुए खुद बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ बस यात्रा कर लाहौर गए थे। पाकिस्तान को यहीं उम्मीद भाजाप के पीएम पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी से भी है।
पाकिस्तान का मानना है कि मोदी भारत के ‘बिजनेस क्लास' का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी कोशिश होगी कि दोनों देशों के व्यापारिक संबंध बेहतर हो और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। उन्हें उम्मीद है कि मोदीके पीएम बनने से भारत-पाकिस्तान के संबंध अच्छे होंगे और व्यापारिक दायरा भी बढ़ेगा।












Click it and Unblock the Notifications