इतिहास के सबसे भयावह आर्थिक संकट में पाकिस्तान, 5,160 करोड़ डॉलर नहीं मिला तो दिवालिया होना तय
इस्लामाबाद, 20 अक्टूबर: इमरान खान के कार्यकाल में पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर खड़ा हो गया है। वह कंगाली में तो पहले से ही था, लेकिन अब उसे भीख की तर्ज पर कर्ज देने वालों ने भी मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान सरकार को उम्मीद की आखिरी किरण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में नजर आ रही है। लेकिन, वहां से उम्मीद टूटी तो फिर इमरान के लिए पाकिस्तान को बर्बादी से बचाना नामुमकिन हो जाएगा। ऐसी आशंकाएं खुद पाकिस्तानी अखबारों की रिपोर्ट की वजह से ही पैदा हो रही हैं, जिसमें वहां की चौपट हो चुकी वित्त व्यवस्था की तस्वीर सामने आ रही है।

गहरे वित्तीय संकट में फंस चुका है पाकिस्तान- रिपोर्ट
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान 'नया पाकिस्तान' बनाने का झांसा देकर सत्ता में आए थे। लेकिन, पाकिस्तानी मीडिया की हालिया रिपोर्ट पर यकीन करें तो यह देश अपने इतिहास का सबसे भयानक आर्थिक संकट झेल रहा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े अंग्रेजी अखबारों में से एक द न्यूज इंटरनेशनल के मुताबिक यह देश बहुत गहरे वित्तीय संकट में फंस चुका है। इमरान खान की सरकार को दो साल के अंदर (2021-2023) कम से कम 5,160 करोड़ डॉलर की विदेशी वित्तीय मदद चाहिए, तभी यह देश इस संकट से उबरने की सोच भी सकता है। लेकिन, इतनी बड़ी रकम कंगाल पाकिस्तान पर लगाने के लिए कौन तैयार होगा यह बहुत बड़ा सवाल है।

टॉप 10 तंगहाल देशों में शामिल हुआ पाकिस्तान- वर्ल्ड बैंक
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को वित्त वर्ष 2021-22 में 2,360 करोड़ डॉलर और 2022-23 में 2,800 करोड़ डॉलर की सकल विदेशी वित्तीय मदद की जरूरत पड़ेगी। ऐसे आंकड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बहुत ही परंपरागत अनुमानों के बावजूद सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान सरकार अब इस संकट से उबरने के लिए आईएमएफ से अंतिम बार गुहार लगाने की कोशिशों में जुट गई है। हाल ही में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान दुनिया के उन 10 सबसे बड़े तंगहाल देशों में शामिल हो चुका है, जिनपर सबसे ज्यादा विदेशी कर्ज बकाया है।

विदेशी कर्ज के बोझ से दब चुका है पाकिस्तान
पाकिस्तानी अखबार ने इंटरनेशनल डेबिट स्टैटिस्टिक्स 2022 के हवाले से कई ऐसी जानकारियां सामने रखी हैं, जिससे इमरान सरकार के कार्यकाल में पूरी तरह से कंगाल होते जा रहे पाकिस्तान की पोल खुल चुकी है। मसलन, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि इस साल जून तक ही पाकिस्तान का विदेशी कर्ज 8 फीसदी बढ़ गया था। एक और रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि इमरान खान सरकार विश्व बैंक से पहले ही 44.2 करोड़ डॉलर का कर्ज ले चुकी थी।

आईएमएफ ने मुंह मोड़ा तो कहीं का नहीं रहेगा पाकिस्तान
लेकिन, पाकिस्तान की कंगाली को देखते हुए अब वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने पहले से तय लोन को भी निलंबित कर दिया है, क्योंकि अब उन्हें पाकिस्तान को कर्ज देने में जोखिम ही जोखिम नजर आ रहा है। इससे पाकिस्तान अपनी स्थापना के बाद से सबसे बड़े आर्थिक संकट में पहुंच चुका है। उसे फिलहाल सिर्फ एक ही उपाय नजर आ रहा है कि वो किसी तरह से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को एक बार फिर से फुसलाने में कामयाब हो जाए। इसलिए वह वॉशिंगटन में इसके साथ पहले से चल रही 600 करोड़ डॉलर की मौजूदा एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी के तहत कोई समझौता कर लेने की फिराक में जुट गया है।

तो 'नया' नहीं, 'दिवालिया' कहलाएगा पाकिस्तान
वैसे वर्ल्ड बैंक और एडीबी प्रोजेक्ट लोन देना अभी भी जारी रख सकती हैं, लेकिन यह रकम लेने के लिए उसे प्रोजेक्ट को तामील करके भी दिखाना होगा, जिसके आसार बहुत ही कम दिख रहे हैं। परिणाम यह होने की आशंका है कंगाली में आटा गीला वाली कहावत की तर्ज पर इसकी पहले से गिरी हुई क्रेडिट रेटिंग्स को एजेंसियां और गिरा देंगी। यानी वह इंटरनेशनल बॉन्ड जारी करके पैसे जुटाना भी चाहे तो यह बहुत ही महंगा साबित हो सकता है।












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