रिटायर हुए पाकिस्‍तान के चीफ जस्टिस खोसा, सेना और इमरान सरकार को सुनाई खरी-खोटी

इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा 20 दिसंबर को रिटायर हो गए। खोसा ने अपने रिटायरमेंट से पहले सरकार और सेना पर अप्रत्‍यक्ष तौर पर हमला बोला। चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने कहा कि वह साफ मन से इस इंस्‍टीट्यूशन को अलविदा कह रहे हैं। उन्होंने इस बात को जोर देकर कहा कि हाल ही के समय में देशद्रोह के मामले में पूर्व सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाई गई और इसके बाद से ही उनके और न्यायपालिका के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान शुरू किया गया। 64 वर्षीय खोसा ने कहा कि न्यायपालिका और उन्होंने आलोचनाओं के बीच काम किया।

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22 साल तक रहे न्‍यायपालिका का हिस्‍सा

जस्टिस खोसा ने कहा, 'मैंने सौ प्रतिशत काम करने की कोशिश की और उससे ज्‍यादा जिम्मेदारी निभाई। कभी मैंने आवाज नहीं उठाई, कलम के जरिए बात कही, कभी भी न्याय में अनावश्यक देरी नहीं की और इतने साल जनता की सेवा में बिताने के बाद मैं अपनी यूनिफॉर्म को आज बेदाग अंतरआत्‍मा के साथ उतार रहा हूं।' खोसा ने इस वर्ष जनवरी में पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी ली थी और वह 22 साल तक न्यायपालिका में कार्यरत रहे। उनके उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति गुलजार अहमद शनिवार को पाकिस्तान के 27वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेंगे। प्रधान न्यायाधीश रहते खोसा ने ई-अदालत, ऑनलाइन हाई कोर्ट डाटा बेस की शुरुआत की तो कोर्ट की वेबसाइट को शुरू किया। बिना रुकावट न्याय के लिए उन्‍होंने एक मोबाइल एप भी लॉन्‍च की। जस्टिस खोसा उस बेंच में शामिल थे जिसने 2017 में तीन बार के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में अयोग्य करार दिया था।

इमरान सरकार ने ज्‍यूडीशियरी को बताया अस्‍वस्‍थ

पिछले दिनों स्‍पेशल कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने देशद्रोह के मामले में छह साल चले केस के बाद मंगलवार को 76 वर्षीय परवेज मुशर्रफ की अनुपस्थिति में उन्हें मौत की सजा सुनाई। मुशर्रफ को वर्ष 2007 में संविधान को निष्प्रभावी करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई। पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना और इमरान खान सरकार इस फैसले से नाखुश है। इसको लेकर चीफ जस्टिस को भी निशाने पर लिया गया। कानून मंत्री फरगोह नसीम ने गुरुवार को कहा कि जिस जज ने यह फैसला लिखा है वह दिमागी रूप से अस्वस्थ हैं और उन्हें काम करने से रोका जाना चाहिए। ब्रिटेन में शिक्षित खोसा ने कहा, 'दुर्भावनापूर्ण अभियान मेरे और न्यायपालिका के खिलाफ शुरू किया गया है। आरोप आधारहीन और असत्य हैं। हम अपनी शक्तियों की सीमा को जानते हैं और सच सामने आएगा।'

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