विदेशों में अपराध करने में पाकिस्तानी बने ‘नंबर 1’, छह सालों में 6 लाख लोगों को निकाला गया
पाकिस्तानी प्रवासियों को दुनिया भर के देशों में आपराधिक कार्यों सबसे अधिक लिप्त पाया गया है। चोरी, तस्करी, नशीली दवाओं की तस्करी, हिंसा और कई अन्य आपराधिक गतिविधियों में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक शामिल रहते हैं।
रोम, 10 जूनः पाकिस्तानी प्रवासियों को दुनिया भर के देशों में आपराधिक कार्यों सबसे अधिक लिप्त पाया गया है। चोरी, तस्करी, नशीली दवाओं की तस्करी, हिंसा और कई अन्य आपराधिक गतिविधियों में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक शामिल रहते हैं। ताजा मामला इटली में व्यंग्य पत्रिका चार्ली हेब्दो के कार्यालय पर हमला करने वाले अपराधियों से जुड़ा है।

कई पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी
इटली की आतंकवाद-रोधी पुलिस और यूरोपोल ने 7 जून को 2020 में पत्रिका के कार्यालय पर हमला करने वाले व्यक्ति से संबंध रखने के संदेह में कई पाकिस्तानियों को गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि चार्ली हेब्दो द्वारा पैगंबर मोहम्मद के विवादास्पद कार्टूनों को फिर से प्रकाशित करने के हफ्तों बाद जहीर हसन महमूद नाम के एक पाकिस्तानी व्यक्ति ने दो लोगो पर मांस काटने वाले बड़े छुरे से हमला किया था। इतालवी पुलिस के मुताबिक एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए जहीर हसन महमूद से सीधे संबंध रखने वाले कई पाकिस्तानी नागरिकों की इटली और विदेशों में गिरफ्तारी हुई है।

दुनिया भर में करते हैं अपराध
ताजा गिरफ्तारियां इस बात का इशारा हैं कि पाकिस्तान के प्रवासी नागरिक दुनिया भर के देशों में अपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने में सबसे आगे हैं। इनमें पाकिस्तानी नागरिक, कुछ कानूनी प्रवासी शामिल हैं, लेकिन कुछ अपराध करने के लिए भूमि या समुद्री मार्ग से यूरोप में प्रवेश करने वाले भी हैं।

6 लाख से भी अधिक लोग पाए गए लिप्त
आंकड़ों के मुताबिक बीते छह सालों में 6 लाख से भी अधिक लोग विदेशों में आपराधिक घटनाओं में लिप्त पाए गए हैं। 2015 से दुनिया के 138 देशों से 618,000 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को निर्वासन का सामना करना पड़ा है। निर्वासन के कारणों में आपराधिक गतिविधियां, आतंकवाद में शामिल होना और अवैध रूप से देशों में प्रवेश करना या नकली दस्तावेज तैयार करना शामिल है।

सऊदी में भी सबसे अधिक पाकिस्तानी अपराधी
पाकिस्तानियों को पश्चिम एशिया के साथी-मुस्लिम देशों में भी अपराधों में शामिल पाया गया है, जिनमें सबसे प्रमुख इस्लाम के सर्वोच्च तीर्थस्थल सऊदी अरब शामिल है। एक पाकिस्तानी एनजीओ जस्टिस प्रोजेक्ट के मुताबिक ऐसे लोगों को अपराध करने के बाद कई तकलीफों का सामना करना पड़ता है। बिना कानूनी सहायता के गिरफ्तार किए गए लोगों को अपना बचाव करने के लिए खुद पर छोड़ दिया जाता है।












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