पाकिस्तान में गर्माया हिंदु लड़कियों के अपहरण का मुद्दा, इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अगवा दो हिंदू लड़कियों का मामला अब गर्माता जा रहा है। मंगलवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने सिंध की सरकार को आदेश दिया है कि दोनों लड़कियों का सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। जियो न्यूज की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। इससे पहले भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी पाकिस्तान से अपील की थी कि दोनों लड़कियों को उनके परिवारवालों को सौंप दिया जाए। दोनों लड़कियां नाबालिग हैं और सिंध के घोट्की से होली के दिन इनका अपहरण किया गया था।

जबरन कुबुलवाया गया इस्लाम
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में होली के मौके पर दो हिंदू लड़कियों को अपहरण के बाद उन्हें जबरन इस्लाम कुबूलवाया गया था। इनके नाम क्रमश: रवीना और रीना हैं। इसके बाद दो मुसलमान पुरुषों से इनकी शादी कराई गई थी। सुषमा ने इस घटना की निंदा की। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, 'पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों का जबरन धर्मातरण। इन लड़कियों की उम्र पर कोई विवाद नहीं है। रवीना जहां सिर्फ 13 वर्ष की है तो रीना की उम्र 15 वर्ष है। नया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी इस बात पर यकीन नहीं करेंगे इस उम्र में भी लड़कियों का जबरन धर्मांतरण किया जा सकता है और उनकी शादी कराई जा सकती है।'

सुषमा ने की इंसाफ की मांग
सुषमा ने इस मामले में इंसाफ की मांग की और कहा कि इन दोनों बच्चियों को इनके घर वापस भेज दिया जाए। पाकिस्तान में पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें वह व्यक्ति भी शामिल है जिसने लड़कियों की शादी कराई थी। रविवार को कराची प्रेस क्लब के बाहर सिविल सोसायटी के कुछ सदस्य इकट्ठा हुए थे। इन लोगों ने मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।

सोशल मीडिया की वजह से सामने आया मामला
दोनों लड़कियां आपस में सगी बहनें हैं। इस मामले का पता उस समय लगा लब लड़कियों के पिता और भाईयों ने वीडियो जारी कर उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड किया। धीरे-धीरे वीडियो वायरल हो गए और सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किए जाने लगे। एक अलग वीडियो में लड़कियों ने यह दावा किया कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाया है। वहीं पीएम इमरान ने रविवार को एजेंसियों को आदेश दिया था कि इस मामले की फौरन जांच हो।

भारत ने जताई चिंता
रविवार को ही भारत ने पाकिस्तान को एक आधिकारिक नोट लिखा था। विदेश विभाग की ओर से लिए गए इस नोट में पाकिस्तान की सरकार से मांग की गई थी कि वह अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उनका कल्याण सुनिश्चित करे। वहीं पाक के मानवाधिकार आयोग का कहना है कि दक्षिण सिंध में जबरन धर्मांतरण का यह नया मामला है। यहां पर इस तरह के मामलों में तेजी आ रही है।












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