Pak: इमरान खान शनिवार को साबित करेंगे विश्वासमत, इस्लामाबाद की हार के बाद एक और परीक्षा
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार पाकिस्तान की संसद में विश्वासमत हासिल करने जा रही है। इसके लिए शनिवार को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली का सत्र बुलाया गया है। इमरान सरकार में विज्ञान और तकनीकी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने इस बारे में ट्विटर पर जानकारी दी है।

इस्लामाबाद की सीनेट सीट पर हार बनी वजह
इस पूरे मामले के पीछे हाल में हुए पाकिस्तान सीनेट के चुनाव में लगा वह झटका है जो इमरान खान की पार्टी पीटीआई को बहुचर्चित सीट इस्लामाबाद में लगा है। इस सीट पर पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के उम्मीदवार के तौर पर उतरे पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने इमरान सरकार में वित्त मंत्री अब्दुल हाफीज शेख को हराया है।
इस्लामाबाद सीट को इमरान खान ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ रखा था और अब्दुल हाफीज के लिए खुद भी प्रचार करने पहुंचे थे। इमरान खान दावा करते थे कि इस्लामाबाद सीट पर उनके प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित है और विपक्ष के लिए यहां पर कोई मौका नहीं है। अब यही दावा इमरान खान के लिए मुश्किल बन गया है।

'क्या कप्तान चुनाव से डर रहे ?'
इस्लामाबाद सीट पर जीत दर्ज करने वाले यूसुफ रजा गिनानी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी से हैं। वह यहां पर विपक्षी पार्टियों के गठबंधन पीडीएम के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे। गिलानी की जीत के बाद पीपीपी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने इमरान खान पर तंज कसते हुए लिखा "पीएम ने वादा किया था कि अगर वह इस्लामाबाद सीट हार गए तो असेंबली भंग कर देंगे। वह हार गए। हम जीत गए। अब उन्हें क्या रोक रहा है ? क्या कप्तान चुनाव से डर रहे हैं ?"
दरअसल इस्लामाबाद सीट खुद पीटीआई के लिए भी किसी झटके से कम नहीं है। आंकड़ों के गणित में इमरान खान को भरोसा था कि वह जीतेंगे लेकिन गुप्त मतदान में लगता है कप्तान के कुछ वोट दूसरी तरफ गए हैं। यही वजह है कि उन्होंने ओपेन बैलट से मतदान कराने की मांग कर रहे थे। इसके लिए पीटीआई सुप्रीम कोर्ट भी गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संविधान का हवाला देकर ये मांग नामंजूर कर दी।

इस्लामाबाद की हार क्यों है बड़ा झटका
इस्लामाबाद सीट पर हार के बाद इमरान सरकार ने संसद में विश्वासमत हासिल करने का मन बना लिया था। सरकार में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बुधवार को ही इसकी जानकारी दी थी। कुरैशी ने विश्वासमत के बारे में बताते हुए कहा था कि अब यह जरूरी हो गया है कि ये पता चले कि कौन इमरान खान के साथ है और कौन पीपीपी और पीएमएल-एन की तरफ है।
पाकिस्तान सीनेट भारत की राज्यसभा की तरह ही हैं। इसके सदस्यों के चयन में चुने हुए सदस्य ही वोट देते हैं। चार राज्यों में वहां के विधायकों ने इसके लिए वोट किया। इस्लामाबाद संघीय राजधानी है इसलिए यहां पर वोट करने का अधिकार पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्यों को है। चूंकि इमरान खान सत्ता में हैं, ऐसे में उनके पास जीत के लिए जरूरी वोट होना ही था लेकिन उनका अपना कैंडीडेट की चुनाव हार गया है जिस पर विपक्ष ने पीएम से इस्तीफा मांगा है।
विपक्ष ने कहा है कि इस हार से स्पष्ट हो गया है कि सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि उनके अपने साथियों ने भी उन्हें खारिज कर दिया है।












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