भारत का भरोसा तोड़ रूस ने रावलपिंडी में भेजी अपनी सेना!
रावलपिंडी। पिछले पांच दशकों से जिस रूस पर भारत को भरोसा था उसने एक झटके में उस भरोसे को तोड़ दिया। उरी आतंकी हमले के बाद रूस की ओर से जानकारी आ रही थी कि वह पाकिस्तान के साथ 'फ्रेंडशिप 2016' के नाम से होने वाली ज्वाइंट आर्मी एक्सरसाइज को कैंसिल कर सकता है। लेकिन शुक्रवार को जो कुछ भी हुआ वह भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका है।

कोल्ड वॉर के बाद से था तनाव
कोल्ड वॉर के बाद जिस रूस ने कभी पाक को मुंह न दिखाने का फैसला किया था, उसी रूस ने अपनी सेनाएं इस्लामाबाद भेज दी। उरी आतंकी हमले के बाद भारत को उम्मीद थी कि रूस अपने कदम को पीछे खींचेगा। ऐसा कुछ नहीं हुआ। 10 अक्टूबर तक चलने वाली इस मिलिट्री ड्रिल में रूस की सेनाएं पाक की सेनाओं के साथ नजर आएंगी।
गुरुवार तक उम्मीद लगाए था भारत
गुरुवार तक भारत को उम्मीद थी कि रूस ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे दोस्ती में दरार आए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि रूस को इस आर्मी एक्सरसाइज और इससे जुड़ी भारत की चिंताओं से अवगत करा दिया
गया है।
रूस गिलगित-बाल्टीस्तान पर भी अभ्यास करेगा। स्वरूप की मानें तो भारत ने रूस को बता दिया है कि यह कभी जम्मू कश्मीर में आता था और आज भी भारत इसे अपना हिस्सा मानता है। इस हिस्से को लेकर भारत कितना संवेदनशील है, यह भी रूस को बता दिया गया है।
क्या कहा था रूस ने
रूस ने उरी आतंकी हमले के बाद जो बयान जारी किया था उसमें उसने हमले की निंदा की थी। रूस ने कहा था कि भारत मानता है कि हमला पाकिस्तान की ओर से हुआ और काफी चिंता की बात है।आपको बता दें कि कोल्ड वॉर के बाद यह पहला मौका है जब रूस और पाकिस्तान की सेनाएं एक साथ हैं।
मिलेंगे एमआई-35 हेलीकॉप्टर्स भी
इसके अलावा रूस ने पाक सेना को एमआई-35 हेलीकॉप्टर्स देने का भी फैसला कर लिया। यह हेलीकॉप्टर्स इंडिसन एयरफोर्स भी प्रयोग करती है। फिलहाल यह देखना होगा कि इस एक्सरसाइज के बाद रूस और पाकिस्तान के रिश्ते किस ओर जाते हैं।












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