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फ्री कराची कैंपेन ने बताई अमेरिका को पाकिस्‍तान की असलियत और हर आर्थिक मदद बंद करने की मांग

By Richa Bajpai
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    वॉशिंगटन। पाकिस्‍तान के 'फ्री कराची' कैंपेन ने अब पाकिस्‍तान में बसे मुजाहिरों की दयनीय स्थिति के बारे में दुनिया को बताने के लिए एक नई मुहिम की शुरुआत की है। इस नई मुहिम के तहत अब कैंपेन के एड अमेरिकी अखबारों में जारी हो रहे हैं। अमेरिका के लीडिंग न्‍यूजपेपर न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की वेबसाइट पर इस कैंपेन का एड है और इसमें मुजाहिरों का मुद्दा उठाया गया है। इस एड में अमेरिकी कांग्रेस से अपील की गई है कि वे पाकिस्‍तान को दी जा रही हर तरह की सैन्‍य और वित्‍ती मदद को रोक दें। इस एड के मुताबिक पाकिस्‍तान की मिलिट्री पाकिस्‍तान में मौजूद मुजाहिरों के खिलाफ अत्‍याचारों को बढ़ावा दे रही है और देश में कई तरह के आतंकी संगठनों का सुरक्षित पनाहगार मुहैया करा रही है। 

    आतंकियों को संरक्षण दे रही पाक की मिलिट्री

    आतंकियों को संरक्षण दे रही पाक की मिलिट्री

    फ्री कराची कैंपेन के प्रवक्‍ता नदीम नुसरत ने न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स में यह कैंपेन करीब दो हफ्तों तक चलेगा। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के एड सिंध के शहरी इलाकों में रहने वाले मुजाहिरों के साथ हो रहे अन्‍याय के बारे में बताने का काम करेंगे। उनका कहना है कि मुजाहिर पाकिस्‍तान में सबसे ज्‍यादा शिक्षित और धर्मनिरपेक्ष लोग हैं, जो धार्मिक सहिष्‍णुता और सह-अस्तित्‍व में काफी गहराई से विश्‍वास करते हैं। पाकिस्‍तान की मिलिट्री जिसे जेहाद पसंद है, वह शहरी इलाकों को तालिबान, जमात-उद-दावा, लश्‍कर-ए-झांगवी, एडब्‍ल्‍यूएसजे, एसएसपी, अल कायदा, आईएसआईएस और ऐसे कई आतंकी संगठनों को सौंपने में लगी हुई है। नुसरत की मानें तो ये आतंकी संगठन कराची में खुलेआम काम कर रही हैं और इन्‍हें देश की इंटेलीजेंस एजेंसियों का पूरा सपोर्ट मिल रहा है।

    पाक की वजह से फिर होगा 9/11 जैसा हमला

    पाक की वजह से फिर होगा 9/11 जैसा हमला

    नुसरत के मुताबिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं जो किसी न किसी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक संगठन से आते हैं, उन्‍हें गलत तरीके से गैर-स्‍थानीय सुरक्षाबलों की ओर से हिरासत में ले लिया जाता है। इसके बाद वह गायब हो जाते हैं। मिलिट्री मुजाहिरों की एकता को तोड़ने के लिए और उन्‍हें कमजोर करने के लिए मुजाहिर राजनीतिक नेतृत्‍व में फूट पैदा करने में लगी है। नुसरत ने यह भी बताया है कि कराची में कुछ सेक्‍युलर राजनीतिक संगठनों के बोलने पर भी बैन लगा दिया गया है। ऐसे में मुजाहिरों के पास सिर्फ लोकतांत्रिक देशों के सामने अपनी आवाज उठाना ही आखिरी विकल्‍प बचा है। उनका कहना है कि दुनिया की शांति के लिए जरूरी है कि पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकी संगठनों को मिल रहे समर्थन को लेकर पूरे विश्‍व में आवाज उठाई जाए। उनका मानना है कि अफगानिस्‍तान में इस तरह के हालात ही 9/11 जैसे आतंकी हमलों के लिए जिम्‍मेदार बने थे। अगर आज पाकिस्‍तान में मौजूद स्थिति पर आंख बंद कर ली गई तो फिर दुनिया की शां‍ति के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

    15 जनवरी से हुई है फ्री कराची कैंपेन की शुरुआत

    15 जनवरी से हुई है फ्री कराची कैंपेन की शुरुआत

    नुसरत ने दक्षिण एशिया खासतौर पर पाकिस्‍तान में शांति और स्‍थायित्‍व की कोशिशों में लगे सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया है। उन्‍होंने कहा कि वे सभी लोग तारीफ के काबिल हैं जो कराची और सिंध के दूसरे शहरी इलाकों में हो रहे अन्‍याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि कराची दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां पर जनसंख्‍या सबसे ज्‍यादा है और यहां की धर्मनिरपेक्ष जनसंख्‍या चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में अहम साबित हो सकती है। नुसरत ने पाकिस्‍तान के बाहर रह रहे उन लोगों को भी धन्‍यवाद कहा है जो फ्री कराची कैंपेन के लिए अपना समर्थन दे रहे हैं। फ्री कराची कैंपेन की शुरुआत इस वर्ष 15 जनवरी को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन से हुई थी। इस दिन मार्टिन लूथर किंग जूनियर का जन्‍मदिन होता है और उनकी याद में एक परेड निकाली जाती है। इस परेड के दौरान बड़ी संख्‍या में टैक्सियों पर फ्री कराची के पोस्‍टर्स और बैनर्स लगे थे। इन टैक्सियों ने भी परेड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

    कौन हैं मुजाहिर और कैसे इन्‍होंने बदली पाक की सूरत

    कौन हैं मुजाहिर और कैसे इन्‍होंने बदली पाक की सूरत

    सन् 1947 में जब भारत और पाकिस्‍तान के बीच बंटवारा हुआ तो भारत की मुसलमान आबादी से कुछ लोग पाकिस्‍तान चले गए थे, इन्‍हें ही मुजाहिर कहा जाता है। मुजाहिर का मतलब ऐसे लोग जो पाकिस्‍तान के दक्षिण-उत्तर प्रांत में स्थित सिंध में जाकर बस गए। मुजाहिरों अपने कौशल और शिक्षा से पाकिस्‍तान को हर उस चुनौती से निबटने में मदद की जो बंटवारे के बाद उसके सामने आई। पाकिस्‍तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान और वित्‍तीय, प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्‍थानों के कई मुखिया मुजाहिर थे। रावलपिंडी में लियाकत अली खान की सन् 1953 में गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी। उनकी हत्‍या के बाद सेना ने देश पर कब्‍जा कर लिया और फिर मुजाहिरों को सरकारी नौकरियों, सेना और शैक्षणिक संस्‍थानों से निकालना शुरू कर दिया गया। निजी बैंकों और दूसरे वित्‍तीय संस्‍थानों का राष्‍ट्रीयकरण कर दिया गया है और इसके साथ ही सिंध प्रांत में कोटा सिस्‍टम लागू हो गया। इस सिस्‍टम के आने के बाद शहरी जनसंख्‍या के पास रोजगाार और शै‍क्षणिक संस्‍थानों में एडमिशन के सारे रास्‍ते बंद हो गए।

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    English summary
    The 'Free Karachi' campaign has launched a new drive to raise global awareness over the plight of ethnic Mohajirs in Pakistan.

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