Fact Check: क्‍या है पाकिस्‍तान की गजनवी मिसाइल के टेस्‍ट में फेल होने के Video की सच्‍चाई

नई दिल्‍ली। पिछले दिनों एक खबर और उसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में नजर आ रहा था कि एक रॉकेट जिससे आग निकल रही है वह लॉन्‍च होने के बाद कुछ ही पलों के बाद राख में तब्‍दील हो जाता है। यह कुछ सेकेंड्स की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर जमकर शेयर हुई। बताया गया कि यह उस बैलेस्टिक गजनवी मिसाइल का फेल हुआ टेस्‍ट था जिसे पाकिस्‍तान से लॉन्‍च किया गया था। हालांकि सोशल मीडिया पर यह दावा पूरी तरह से गलत साबित हुआ और यह वीडियो भी पूरी तरह से फर्जी निकला।

फेसबुक, ट्विटर पर जमकर शेयर हो रहा वीडियो

फेसबुक, ट्विटर पर जमकर शेयर हो रहा वीडियो

इस वीडियो को ट्टिवर और फेसबुक पर एक ही कैप्‍शन से शेयर किया गया था। कैप्‍शन हिंदी में था और कुछ इस तरह से था, 'पाकिस्‍तान की गजनवी मिसाइल का 13वां टेस्‍ट फेल हो गया है। 300 किलोमीटर तक जाने वाली मिसाइल 36 किलोमीटर गिरी, कागज की तरह जलकर खाक हो गई।' इसके बाद लोगों ने अजब-गजब कैप्‍शन के साथ इसी वीडियो को जमकर शेयर किया। लेकिन जब वीडियो की पड़ताल की गई तो पता लगा कि लोग साल 2013 का एक वीडियो शेयर करने में लगे हुए थे। एक लिंक जो बीबीसी ने भी शेयर कर डाला था।

साल 2013 का है वीडियो

जिस असफल मिसाइल टेस्‍ट का वीडियो शेयर किया जा रहा था वह रूस का था और साल 2013 में एक अनमैन्‍स रूसी प्रोटो-एम रॉकेट फेल होने से जुड़ा था। यह रॉकेट कजाखस्‍तान के बाइकनौर सेंटर से लॉन्‍च किया गया था और लॉन्‍च होने के कुछ ही मिनटों बाद क्रैश हो गया था। इसी घटना का वीडियो जो यू-ट्यूब पर था उसे टेलीग्राफ ने शेयर किया था। जबकि हकीकत यह है कि पाकिस्‍तान मिलिट्री की मीडिया विंग इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) की तरफ ये 23 जनवरी 2020 को गजनवी मिसाइल के टेस्‍ट का वीडियो शेयर किया गया है। ऐसे में साफ है कि मिसाइल टेस्‍ट का वीडियो फर्जी है।

हत्‍फ-3 के नाम से भी मशहूर है मिसाइल

हत्‍फ-3 के नाम से भी मशहूर है मिसाइल

गजनवी को हत्फ-3 के नाम से भी जानते हैं। यह एक हाइपरसोनिक और सतह से सतह के लिए कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्पलैक्स ने इस मिसाइल को डिजाइन और डेवलप किया है। इसकी मारक क्षमता 290 किमी है। वर्तमान समय में यह पाकिस्तान आर्मी के स्‍ट्रैटेजिक फोर्स कमांड का हिस्‍सा है। इस मिसाइल पर पाकिस्‍तान ने साल 1987 में काम करना शुरू किया था।

साल 2004 से पाकिस्‍तान आर्मी का हिस्‍सा

साल 2004 से पाकिस्‍तान आर्मी का हिस्‍सा

कई परीक्षण से गुजरने के बाद साल 2007 में इसे पाकिस्तानी सेना में शामिल किया गया। पाकिस्तान के इस बैलेस्टिक मिसाइल की लंबाई 8.5 मीटर है। इसका व्यास करीब 0.8 मीटर है। पाकिस्तान का दावा है कि गजनवी परंपरागत हथियार के साथ परमाणु हथियार भी ले जाने में सक्षम है। इसका पहला वर्जन साल 2004 से ही पाकिस्तानी सेना के पास है।

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