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अगर आप पाकिस्‍तान में यहां काम कर रहे हैं तो नमाज नहीं पढ़ सकते हैं, जानें क्यों?

Pakistani workers working in Chinese factories set up in Pakistan are banned from studying Nawaz inside the factory. पाकिस्‍तान में स्‍थापित चाइनीज फैक्ट्रियों में काम करने वाले पाकिस्‍तानी वर्करों को फैक्ट्री के अंदर नवाज़ पढ़ने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गयी हैं। इस पर पाक पीएम इमरान चुप्‍पी साधे हुए

बेंगलुरु। पाकिस्‍तान का सबसे अभिन्‍न मित्र चीन जिसके दम पर वहां की सरकार कूदती रहती हैं, वो ही चीन अब पाकिस्‍तानियों से उनसे नमाज पढ़ने का अधिकार छीन रहा हैं। चीन पहले ही चीन में रहने वाले उइगर मुसलमानों को प्र‍ताडि़त करता आया जिसकी खबर पूरी दुनिया को हैं। लेकिन पूरी दुनिया में मुसलमानों की झंडा ऊंचा करने वाला पाकिस्‍तान हमेशा उइगर मुसलमानों के मुद्दे पर चीन की पैरवी करता आया हैं। उसका नजीजा ये है कि अब चीन उइगर मुसलमानों के जैसे पाकिस्‍तान के मुसलमानों के साथ भी वैसा ही व्‍यवहार करना शुरु कर दिया हैं।

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दरअसल पाकिस्‍तान में सैकड़ों की संख्‍या में चाइना की फैक्ट्रियां हैं जहां पर लाखों की तादात में पाकिस्‍तान के नागरिक नौकरी कर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। चीन ने अब इन्‍हीं फैक्ट्रियों में काम करने वाले पाकिस्‍तानी मुसमानों को फैक्ट्री में नमाज पढ़ने पर सख्‍त पाबंदी लगा रही हैं। इतना ही नहीं जिन पाकिस्‍तानी वर्करों ने इसका विरोध जताया उन्‍हें नौकरी से निकाल बाहर कर दिया। आपको बता दें पाकिस्‍तान पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा हैं ऐसे में नमाज पढ़ने जैसे अपने धार्मिक अधिकार को लेकर यह कर्मचारी आवाज भी उठाने से डर रहे हैं। क्योंकि जिन्‍हें पहले नौकरी से निकाला गया वो रोजी रोटी की तलाश में भटक रहे हैं।

इस्‍लामिक देश पाकिस्‍तान में ही इस्‍लाम खतरें में!

इस्‍लामिक देश पाकिस्‍तान में ही इस्‍लाम खतरें में!

पूरी दुनिया में इस्लाम का ठेका लेने वाला इस्‍लामिक देश पाकिस्तान उइगुर मुसलमानों के साथ हो रही ज्यादतियों पर लीपापोती करने की कोशिश करता रहा है अब तो वो अपने ही देश में रह रहे मुसलमानों पर अत्‍याचार पर चुप्‍पी साधे हुए हैं। मालूम हो कि भा‍रत को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद पाकिस्‍तान भारत से इसलिए विभाजन करवा कर अलग हुआ था क्योंकि पाकिस्‍तान को वो मुसलमानों का अलग इस्‍लामिक राष्‍ट्र बनाना चाहता था। उस समय मुसलमानों के आकाओं ने कहा था कि पाकिस्‍तान में मुस्लिम धर्म से जुड़े सभी कर्मकांडों को करने की पूरी आजादी होगी। माना जा रहा था कि भारत से अलग हुए पाकिस्‍तान में इस्‍लाम धर्म पर कभी आंच तक आने पाएंगी लेकिन अब इस्‍लामिक देश पाकिस्‍तान में ही इस्‍लाम खतरें में हैं।

पाक पीएम को मंहगी पड़ेगी ये ख़ामोशी

पाक पीएम को मंहगी पड़ेगी ये ख़ामोशी

चीन के इस रवैय्ये पर जहां पाकिस्‍तान के पाकिस्‍तान के प्रधामंत्री इमरान खान और उनकी सरकार खामोश हैं। जम्मू कश्‍मीर से मोदी सरकार द्वारा अनुच्‍छेद 370 जैसे भारत के अंदरुनी मुद्दे पर कश्‍मीरी मुसलमानों के लिए पूरी दुनिया में शोर मचाने वाले पाक पीएम इमरान खान से जब उइगर मुसलमानों के साथ हो रही ज्यादती सवाल किया जाता है तो वो चीन का आंदरुनी मामला बता कर अपना पल्‍ला झाड़ते आए हैं अब तो पाकिस्‍तान में चाइनीज फैक्ट्रियों में जो चीन कर रहा है उस पर खामोशी उन पर मंहगी पड़ सकती हैं।

पाकिस्‍तान में शुरु हो चुका है इसका विरोध

पाकिस्‍तान में शुरु हो चुका है इसका विरोध

बता दें पाकिस्‍तानियों से चीन द्वारा नवाज पढ़ने पर पाबंदी लगाने के खिलाफ पाकिस्‍तान के मौलवियों ने आवाज उठाने लगे हैं। पाकिस्तान में चीन धार्मिक अधिकार छीने जाने के खिलाफ कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इतना ही नहीं इस अत्‍याचार का विरोध करने के लिए बाकायदा मुल्लों, मौलानाओं और मुफ्तियों की मदद ली जा रही है। चीन के इस रवैये से खफा पाकिस्तान के लोग सड़कों पर है। मांग की जा रही है कि चीन पाकिस्तान के मुसलमाओं को नमाज पढ़ ने की इस्लामिक रीति रिवाज फॉलो करने की आजादी दे। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर भी इसका जमकर विरोध शुरु हो चुका है।

मौलाना तारिक मसूद का ये विडियो हुआ वायरल

मौलाना तारिक मसूद का ये विडियो हुआ वायरल

पाकिस्तान के मौलाना तारिक मसूद की सोशल मीडिया पर एक क्लिपिंग वायरल हो चुकी है। इस विडियों क्लीपिंग में यह बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान जैसे मुल्क तक में आम मुस्लिम चीन के हाथों ज्यादतियों का सामना कर रहे हैं। वायरल हुई इस क्लिपिंग में मुफ़्ती तारिक मसूद इस विषय पर बयान देते नजर आ रहे हैं। वो पाकिस्‍तान के नागारिकों से अपील कर रहे हैं कि पाकिस्तान के लोगों को आवाज उठानी चाहिए इसका विरोध दर्ज करना चाहिए। मुफ़्ती तारिक ने इस विडियो में कहा कि लोग चीन के अधिकारियों से ये कहें कि फैक्ट्री के मालिकों को समझाएं और ये बात कंपनी के मैनेजमेंट तक ले जाएं उनको पहले शालीनता से समझाए कि यह हमारा धार्मिक कर्तव्‍य है। चीन के अधिकारियों को समझाए कि यह मुल्क उनका नहीं बल्कि पाकिस्तानियों का है। जहां वो जो करेंगे अपनी मर्जी से करेंगे और किसी की मर्जी को अपने ऊपर नहीं थोपने देंगे। अगर वह सीधे तौर पर मानते तो है तो ठीक है नहीं तो उनसे कहें कि ये मुल्क उनके बाप का नहीं हैं।

चीन पाकिस्‍तान में इस बहाने पसार रहा पैर

चीन पाकिस्‍तान में इस बहाने पसार रहा पैर

आपको बता दें पिछले कई वर्षों से चीन पाकिस्‍तान सीपीईसी योजना के तहत पाकिस्‍तान में अपने पैर पसारता जा रहा हैं और अब धीरे-धीरे अपने वो कदम बढ़ा रहा हैं जिसके लिए वह पाकिस्‍तान का मित्र बना था। मालूम हो कि पाकिस्‍तान की पिछले दो सालों से आर्थिक तंगी बढ़ती जा रही हैं। मंहगाई के चलते पाकिस्‍तान के नागरिकों दो जून की रोटी के लाले पड़ गए हैं। आतंकवाद को पोषित करने वाला पाकिस्‍तान भारत से अपनी दुश्‍मनी निभाने के लिए एक तरफ चीन से सैन्‍य और शस्‍त्र मदद ले रहा हैं। वहीं आर्थिक तंगी के कारण चीन के कर्ज तले दब चुका हैं। इनता ही नहीं पाकिस्‍तान में युवाओं को रोजगार देने के बहाने चीन ने पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्‍तान में कई चाइनीज फैक्ट्रियां लगवायी। जिसमें लाखों पाकिस्‍तानी युवाओं को रोजगार दिया गया। अब उन्‍हीं चाइनीज फैक्ट्रियों में चाइनीज अधिकारी पाकिस्‍तानी वर्करों को फैक्ट्री में नवाज़ पढ़ने पर पाबंदी लगा रहे हैं। दुनिया में अपने को सुपर पावर मानने वाला चीन के कर्ज तले पाकिस्‍तान दबा हुआ हैं। चीन पाकिस्‍तान पर शासन करने की नीयत से पाकिस्तान के धार्मिक कर्मकांडों पर हमला करना ये स्वयं स्पष्ट कर देता है कि वो दिन दूर नहीं है जब पाकिस्तान और वहां के नागरिक चीन से अपना इस्‍लाम धर्म बचाने के लिए एक नए पाकिस्तान की मांग करने लगेंगे।

पाकिस्‍तान पर चीन का इतना है कर्जा

पाकिस्‍तान पर चीन का इतना है कर्जा

चीन को अपना सदाबहार दोस्त कहने वाला पाकिस्तान उसके कर्ज के बोझ से बुरी तरह दबा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को आईएमएफ के कर्ज से दोगुनी राशि चीन को चुकानी है। वह उसके कर्ज के बोझ से दबा हुआ है और यह रकम लगातार बढ़ती जा रही है। कर्ज के चलते पाकिस्तान के सामने फॉरेन एक्सचेंज का संकट भी आ खड़ा हुआ है। आईएमएफ के मुताबिक पाकिस्तान को जून 2022 तक चीन को 6.7 अरब डॉलर की रकम चुकानी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक आईएमएफ ने 2022 में पाकिस्तान के लिए एक नए बेलआउट पैकेज को मंजूरी दी है। इसके अलावा इस्लामाबाद को कुछ अन्य कर्जों के लिए 2.8 अरब डॉलर की जरूरत है। चीन के बेल्ट ऐंड रोड प्रॉजेक्ट में प्रमुखता से शामिल पाकिस्तान ने कर्ज के संकट से निपटने के लिए उससे बड़े पैमाने पर लोन लिया है। हालांकि चीन से मोटा कर्ज लेकर वह एक नया संकट खड़ा कर चुका है।

चीन के उइगुर मुसमानों के साथ करता है ये व्‍यवहार

चीन के उइगुर मुसमानों के साथ करता है ये व्‍यवहार

गौरतलब है कि 2016 से ही चीन के सीमा में स्थित एक शहर है कासगर जहां मुसलमानों पर रमजान के महीने में रोजा रखने, मस्जिदों में नमाज पढ़ने या औरतों के बुरका पहनने जैसी कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं। कासगर वही शहर है जिसका जिक्र शायर अल्लामा इकबाल ने इस्लाम के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करने के लिए अपनी एक नज्म में किया है। चीन के सीमावर्ती प्रांत शिनजियांग में उइगुर मुसलमानों की बड़़ी आबादी रहती है और कासगर जिसका एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शहर है, आधिकारिक रूप से बच्चों और सरकारी कर्मचारियों को रोजा रखने से रोक दिया गया है। कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे लोगों को नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में जाने से रोकें और यह भी सुनिश्चित करें कि रमजान के दौरान दिन में बाजार बंद न हों। शिनजियांग प्रांत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और कजाकिस्तान जैसे मुस्लिम बहुल राष्ट्रों की सीमा पर है। इन देशों में से पाकिस्तान जो कि कि यह संसार का अकेला राष्ट्र है, जो इस्लाम धर्म का रक्षक बनता हैं उसने ये मुद्दा उठने पर पाक प्रतिनिधिमंडल ने वहां जाकर जांच की और लौट कर बताया था कि वहां मुसलमानों पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है और वे अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए स्वतंत्र हैं। स्वाभाविक था कि इस पर खूब हाय-तौबा मची। अंग्रेजी अखबार डॉन ने तो एक संपादकीय लिखकर इस प्रतिनिधिमंडल का मजाक उड़ाया।

इस वायरल विडियो को देखें-

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