Bike Bot Scam: सपा के प्रदेश सचिव बाइक बोट घोटाले में गिरफ्तार, ED जांच को रफा-दफा कराने का दे रहे थे झांसा
Bike Bot Scam Latest News: बाइक बोट स्कैम मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष और प्रदेश सचिव दिनेश सिंह गुर्जर को गिरफ्तार किया है। ईडी ने बुलंदशहर निवासी दिनेश सिंह गुर्जर को नोएडा की जेपी ग्रीन सोसाइटी स्थित आवास से पकड़ा है।
सपा नेता दिनेश गुर्जर की गिरफ्तार के संबंध में ईडी ने एक प्रेस नोट भी जारी किया है। ईडी द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक, दिनेश गुर्जर बाइक बोट घोटाले के आरोपियों से संपर्क करके उनके खिलाफ चल रही ईडी जांच को रफा-दफा करने का झूठा वायदा कर वसूली कर रहे थे।

ईडी ने बताया कि गुरुवार 20 जुलाई को उनके आवास पर छापा मारकर कई अहम सुबूत भी जुटाए हैं। बाद में 21 जुलाई को ईडी ने दिनेश गुर्जर को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया। आपको बता दें कि बाइक बोट घोटाले की जांच राजधानी लखनऊ स्थित ईडी के जोनल कार्यालय द्वारा की जा रही है।
ईडी के अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि दिनेश कुमार सिंह उर्फ दिनेश सिंह गुर्जर बाइक बोट घोटाले की जांच खत्म कराने के लिए आरोपियों से उगाही कर रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद ईडी ने दिनेश गुर्जर के आवास और ऑफिस की जांच की। इस दौरान ईडी को उनके खिलाफ आपत्तिजनक सबूत मिले, जिन्होंने जब्त कर लिया गया है।
ईडी के मुताबिक, सपा नेता का बाइक बोट घोटाले में बड़ा हाथ है। तो वहीं, इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें मुख्य आरोपी संजय भाटी और अन्य व्यक्ति अभी जेल में है। बता दें कि ईडी 1665 करोड़ रुपये की बाइक बॉट घोटाले की जांच कर रही है।
वहीं, अब इस मामले को रफा-दफा करने का दावा करने और पैसे वसूलने वाले जिस शख्स को ईडी ने गिरफ्तार किया है वह (दिनेश गुर्जर) बुलंदशहर जिले के बड़े समाजवादी पार्टी के नेता है। पिछले काफी वक्त से दिनेश गुर्जर, बुलंदशहर और नोएडा तक राजनीति कर रहे हैं। वह पूर्व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के काफी करीबी बताए जा रहे हैं।
क्या थी बाइक बोट स्कीम
संजय भाटी और अन्य लोगों ने मिलकर साल 2010 में एक कंपनी की शरूआत की थी और 2017 में बाइक बॉट के नाम से एक आकर्षक स्कीम योजना लॉन्च की थी। स्कीम के तहत बाइक टैक्सी शुरू की गई। इसके तहत एक व्यक्ति से एक मुश्त 62200 रुपये का निवेश कराया गया।
इतना ही नहीं, उसके एवज में एक साल तक 9765 रुपये देने का वादा किया गया था। हालांकि, बाद में निवेश करने वालों ने आरोप लगाया था कि उन्हें पैसे नहीं दिए गए। जिसके बाद संचालक फरार हुआ तो लोगों ने मुकदमा दर्ज कराने शुरू कर दिए थे। इस मामले में संजय भारी और बीएन तिवारी समेत 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज गया था।












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