प्रवासी भारतीय सम्मेलन: मोदी सरकार की NRI पर नजर, समर्थन हासिल करने की करेगी कोशिश
नई दिल्ली: प्रवासी भारतीय दिवस उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 21 जनवरी से 25 जनवरी तक आयोजित होने वाला है। इस कार्यक्रम के जरिए भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए विदेशों में रहने वाले भारतीयों को लुभाने की कोशिश करेगी। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ये इनको लुभाने की आखिरी बड़ा अभ्यास होगा। अभी तक 7000 लोगों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवींद्र जगन्नाथ इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। वो ये सम्मान हासिल करने वाले प्रथम व्यक्ति होंगे जिनकी जड़े इस राज्य से जुड़ी हुई हैं जो इस साल इसे आयोजित कर रहा है।

वाराणसी में 21 से 25 जनवरी तक चलेगा
जगन्नाथ के पूर्वज बलिया जिले में स्थित रसड़ा कस्बे से आते हैं। अपनी भार यात्रा के दौरान उन्होंने यहां की यात्रा की थी और कई लोगों से मुलाकात की थी। पीबीडी 2015 से दो साल में होने वाला कार्यक्रम है जो जनवरी 9 के आसपास होता है। इस साल इसकी तारीख में बदलाव इसलिए किया गया ताकि जो लोग इसमें शामिल हों वो प्रयागराज में होने वाले कुंभ और राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हो सकें। बुधवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लखनऊ में पत्रकारो से कहा था कि हमने कार्यक्रम की तिथियों में बदलाव इसलिए किया ताकि लोग गणतंत्र दिवस परेड और कुंभ मेला देख सकें। हमने ये एनआरआई लोगों की मांग पर किया। उन्होंने आगे कहा कि तीन दिन चलने वाले कार्यक्रम की शुरुआत 21 जनवरी को वाराणसी में एक विशेष दिन के कार्यक्रम के साथ शुरू होगी जो विदेशों में बसे युवा पीढ़ी को हमारी समृद्ध विरासत की झलक देगा। पीबीडी का औपचारिक उद्घाटन 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अगले दिन समापन समारोह की अध्यक्षता करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी करेंगे उद्धघाटन
इस कार्यक्रम की प्लॉनिंग में शामिल एक व्यक्ति ने बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में ये आयोजन तीसरी बार हो रहा है और ये प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के प्रयासों से विदेशी भारतीय लोगों के बीच उन्हें शिखर तक पहुंचाएगा। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले भारतीय कई स्पेशल प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले हैं। पीबीडी के दौरान गंगा नदी को गंगा अवतरण के रुप में प्रतिष्ठित स्थान दिलाने के लिए 22 जनवरी को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम किया जाएगा जिसमें उनकी धरती पर अवतरित होने की कहानी बताई जाएगी।

वाराणसी में NRI को मिलेगी ये सुविधा
इसके अलावा प्रतिनिधियों के लिए एक तम्बू शहर की स्थापना की स्थापना की जाएगी और पीबीडी का एक विशेष हिस्सा "काशी का आथित्य" का होगा। प्रवासी भारतीयों के लिए वाराणसी के घरों में रहने के लिए कोई फीस नहीं ली जाएगी। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी "काशी का आथित्य" वाले विचार को लेकर बेहद उत्सुक हैं। एक हजार लोग इस इवेंट का हिस्सा बनकर अपनी जड़ों से जुड़ेंगे।












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