सियासी खेल बनाती-बिगाड़ती प्याज ने लगाई सेंचुरी

दिल्ली में सियासी खेल खेलने वाली प्याज चुनाव के लिए मुख्य मुद्दा बनती जा रही है। एक ओर कांग्रेस है, जो अपनी सरकार बचाने के लिए प्याज के दाम को कम करने के लिए जुगत कर रही है तो दूसरी ओर, भाजपा भी शीला सरकार की किरकिरी करने के लिए प्याज को उछाल रही है। 1998 में प्याज का हथियार बनाकर जिस शीला दीक्षित ने भाजपानीत सरकार की नींव हिला दी थी। अब उसे इस साल होने वाले चुनाव में डर लगा रहा है। प्याज का भूत उन्हें भयभीत कर रहा है।
दूध की जली भाजपा भी प्याज की गर्मी को लेकर वैसा ही हमला शीला सरकार पर करना चाह रही है जैसा 15 साल पहले कांग्रेस की सरकार ने उनपर किया था। प्याज के इस 'खेल' ने दिल्ली सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सरकार घबरा रही है कि कहीं इस बार प्याज उसका खेल न बिगाड़ दे और उसे सत्ता से उठाकर विपक्ष में न फेंक दे। दिल्ली की राजनीति के साथ-साथ मुद्दा अब केन्द्र की सियासत तक पहुंच गई है। भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से प्याज निर्यात की बात कही है। सीमा पर हम पहले ही पाक सेना की गोलियां खा रहे है, लेकिन अब पड़ोसी देश की प्याज भी हमारी मजबूरी हो गई है। आसमान छूती प्याज की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार आयात के दरवाजे खोल दिए है। भारत में उठी प्याज संकट का सबसे ज्यादा फायदा भी पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के व्यापारी और निर्यातक ही उठाएंगे।
वहीं त्यौहारों के इस मौसम में प्याज की कीमतें 100 रु. के पार हो गई है। प्याज लगातार आम लोगों के आंसू निकाल रहा है जो प्याज एक हफ्ते पहले 50-से 60 रुपये किलो मिल रहा था। अचानक उसकी कीमतों में उछाल आ गया है। देश के कई शहरों में प्याज 100 रुपये के ऊपर पहुंच गया है। प्याज की बढ़ी कीमतों के बावजूद सरकार प्याज के निर्योत पर रोक नहीं लगाना चाहती, हलांकि आयात के लिए सरकार ने सहमति दे दी है।












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