भगवान के घर से दूर रहना चाहते दिल्ली वाले
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) अब राजधानी में मंदिरों और गुरुद्वारों से सटे घरों और दूसरी संपत्तियों को खरीददार या किराएदार नहीं मिल रहे। हालत ये हो गई है कि इन भगवान के घरों के साथ रहने या अपना कोई कामकाज शुरू करने के लिए लोग तैयार ही नहीं।

20 फीसद कम दामों पर भी संपत्तियां न तो बिक रहीं और न उन्हें कोई किराएदार मिल रहे हैं। हालात सच में चिंताजनक बने हुए हैं। साउथ दिल्ली के एलिट फ्रेंड्स कालोनी में माता के मंदिर के पास 200 गज की कोठी 15 करोड़ रुपये में भी कोई लेने को तैयार नहीं। हालांकि इसी इलाके में दूसरी जगहों में इतने साइज की कोठी मजे से 20 करोड़ रुपये से ज्यादा में निकल जाती है।
बचने लगे लोग
उधर ईस्ट दिल्ली में मयूर विहार से लेकर दिलशाद गार्डन में भी मंदिरों, गुरुद्वारों और दूसरे धार्मिक स्थलों के करीब रहने या बिजनेस शुरू करने से बचने लगे हैं लोग। बाकी दिल्ली में भी इसी तरह के सूरते-हाल हैं।
रीयल एस्टेट मामलों के जानकार जयंत बरूआ कहते हैं कि रीयल एस्टेट बाजार में कहा जाने लगा है कि धार्मिक स्थानों से सटे घर अशुभ होते हैं। जिन धार्मिक स्थानों की छाया किसी घर या दूकान पर पड़ती है, उसके लिए अशुभ दिन चालू हो जाते हैं।
दिक्कतें ही दिक्कतें
ईस्ट दिल्ली के आई.पी. एक्सटेंशन में रहने वाले एक सज्जन ने इस लेखक को अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि जब से वे एक उस फ्लैट के पास रहने लगे हैं,जो मंदिर से सटा है तब से उनके निजी जीवन और बिजनेस में दिक्कतें शुरू हो गई। उनका कोई काम नहीं बनता। इसलिए अब वे जल्दी से जल्दी उस घर को छोड़ना चाहते हैं। हालांकि घर के मालिक कहते हैं कि वे चाहें तो कम रेंट देकर भी उसमें रह सकते हैं।
दो-तीन साल पुराना ट्रेंड
राजधानी के विवेक विहार में रहने वाले एक प्रापर्टी मामलों के सलाहकार अवतार सिंह ने कहा कि ये ट्रेंड नया नहीं है। इसे हम करीब दो-तीन सालों से देख रहे हैं। लोग मंदिरों तथा गुरुद्वारों में पूजा के लिए जाना तो चाहते हैं पर वे उसके पास रहना पसंद नहीं करते। उन्हें ये अशुभ लगता है।












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