Firoj Alam IPS : दिल्ली पुलिस कांस्टेबल से ACP बने फिरोज आलम, पढ़ें लास्ट वर्किंग डे पर लिखा भावुक खत
नई दिल्ली। फिरोज आलम। यह नाम है बुलंद हौसलों का। कामयाबी की नई कहानी लिखने और बार-बार असफलताओं से कभी हार नहीं मानने का है। शायद यही वजह है कि जगह भी दिल्ली और ड्रेस भी खाकी, मगर कद बढ़ा हुआ है। जो फिरोज आलम कभी दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल हुआ करता था वो अब आईपीएस है।

फिरोज आलम बने दिल्ली पुलिस में एसीपी
फिरोज आलम ने दिल्ली पुलिस में पद के लिहाज से एक साथ चार पदों की छलांग लगाई है। मतलब कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल, एएसआई, एसआई, इंस्पेक्टर के बाद एसीपी बनते। चार बार प्रमोशन पाने में शायद आलम की नौकरी पूरी हो जाती, मगर फिरोज आलम अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी क्रेक करके कांस्टेबल से सीधा एसीपी बन गया है।

आईपीएस फिरोज आलम को डीएएनपी कैडर मिला
दिल्ली पुलिस कांस्टेबल के पद से रिलीव होकर फिरोज आलम ने बतौर ट्रेनी आईपीएस दिल्ली पुलिस फिर से ज्वाइन किया है, क्योंकि इन्हें यूपीएससी पास करने के बाद आईपीएस के रूप में दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANP) कैडर मिला है। जिसके तहत आलम को दिल्ली में ही बतौर एसीपी पोस्टिंग मिली है।

फिरोज आलम ने फेसबुक पर शेयर किया आखिरी खत
दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल फिरोज आलम की नौकरी का आखिरी दिन 31 मार्च 2021 था। अपने लास्ट वर्किंग डे के मौके पर फिरोज आलम ने एक भावुक खत लिखा है, जिसे अपनी फेसबुक आईडी पर शेयर किया है। पोस्ट में फिरोज आलम ने दस जून 2010 को कांस्टेबल के रूप में दिल्ली पुलिस ज्वाइन करने से लेकर अब आईपीएस बनने तक का पूरा सफर बयां करते हुए दिल्ली पुलिस के साथियों व सीनियर अधिकारियों को थैंक्स भी बोला है।

फिरोज आलम आईपीएस का साक्षात्कार
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में आईपीएस फिरोज आलम ने बताया कि वे इन दिनों दिल्ली पुलिस पीसीआर लाइन में मॉडल टाउन में कार्यरत थे। आईपीएस बनने के बाद उन्हें दिल्ली पुलिस में अंडर ट्रेनी आईपीएस लगाया गया है। बतौर एसीपी दिल्ली पुलिस फिर से ज्वाइन किया है। वे जल्द ही ट्रेनिंग पर जाएंगे।

आईपीएस फिरोज आलम की जीवनी
बता दें कि दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल से आईपीएस बनने वाले फिरोज आलम मूलरूप से यूपी के हापुड़ जिले के रहने वाले हैं। इनका गांव आजमपुर दहपा पिलखुवा कोतवाली पुलिस थाना इलाके में पड़ता है।
कबाड़ी मोहम्मद शहादत व मुन्नी बानो के घर जन्मे फिरोज आलम ने 12वीं कक्षा पास करने के बाद ही 2010 में दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हो गए थे। फिरोज आलम के पांच भाई व तीन बहन हैं।

अफसरों को देख ठाना अफसर बनना
फिरोज कहते हैं कि साल 2010 में दिल्ली पुलिस ज्वाइन करने के बाद मैं अपने सीनियर अफसरों के कामकाज के तरीके और उनके रुतबे से काफी प्रभावित हुआ। उन्हें देखकर मैंने भी तय कर लिया था कि मुझे भी अफसर बनना है और इसका एकमात्र जरिया था यूपीएससी। ऐसे में मैं कांस्टेबल की नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारियों में जुट गया।

आईपीएस विजय सिंह गुर्जर बने फिरोज की प्रेरणा
बकौल, फिरोज यूपीएससी पास करना जैसा मैंने सोचा था उतना आसान नहीं था। मैं लगातार फेल होता गया। पांच बार असफल होने के बाद मैंने अफसर बनने का ख्वाब देखना लगभग छोड़ दिया, मगर मेरे साथ ही राजस्थान के झुंझुनूं जिले की नवलगढ़ तहसील के गांव देवीपुरा विजय सिंह गुर्जर ने जब दिल्ली पुलिस कांस्टेबल से आईपीएस बने तो मुझमें में भी हिम्मत आई और मैंने छठा प्रयास किया। साल 2019 में 645 रैंक के साथ यूपीएससी पास करके आईपीएस बन गया।
फिरोज आलम का खत
दिल्ली पुलिस को धन्यवाद पत्र
मैं फिरोज आलम 10/06/2010 को दिल्ली पुलिस में भर्ती हुआ। आज दिल्ली पुलिस में एक कांस्टेबल के रूप में मेरा आखिरी कार्य दिवस है, लेकिन मैं हमेशा इस परिवार का हिस्सा बना रहूंगा। मैं सिर्फ उन सभी समर्थन और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद और सराहना करना चाहता हूं जो आपने मुझे पिछले 10 वर्षों में प्रदान किए हैं।
मैंने 10 साल तक दिल्ली पुलिस के कई पुलिस थानों में कांस्टेबल के रूप में काम किया। दिल्ली पुलिस में एक कांस्टेबल के रूप में काम करते हुए मुझे व्यापक अनुभव, समाज के विभिन्न वर्गों के संपर्क में आने का अवसर मिला। कांस्टेबल मेरी पहली नौकरी थी, दुनिया का कोई भी व्यक्ति अपनी पहली नौकरी कभी नहीं भूल सकता। दिल्ली पुलिस में अधिकारियों के काम, जुनून और प्रतिबद्धता ने मुझे सिविल सेवाओं की तैयारी के लिए प्रेरित किया।

फिरोज आलम के खत के अंश
मैं अपने कांस्टेबल दोस्तों से कहूंगा कि मैं अपने स्कूल के दिनों में एक होशियार छात्र नहीं था, लेकिन परिवार और दोस्तों की कड़ी मेहनत और आशीर्वाद ने मेरे जीवन में सफलता दिलाई है।
मैं दिल्ली पुलिस के उन सभी सहयोगियों और कर्मचारियों का विशेष रूप से धन्यवाद करूंगा जो मेरी यात्रा के साक्षी थे। दिल्ली पुलिस ने मुझे आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक रूप से समर्थन दिया। मुझे 10 साल के लिए दिल्ली पुलिस का हिस्सा होने के लिए समाज में सम्मान दिया गया था।
दिल्ली कांस्टेबल के रूप में काम करने की यादें कभी भी मन से नहीं मिटेंगी। एक बार फिर मैं आज कहना चाहूंगा कि मैं दिल्ली पुलिस की वजह से हूं। आज एक बार फिर मैं कहूंगा कि मैं दिल्ली पुलिस को नहीं छोड़ रहा हूं, बल्कि अधिक जिम्मेदारियों और अधिक जवाबदेही के साथ फिर से जुड़ रहा हूं ताकि मैं समाज और राष्ट्र के लोगों के लिए और अधिक काम कर सकूं। ऐसा करने का आह्वान करने पर मैं दिल्ली पुलिस परिवार के प्रत्येक सदस्य की मदद के लिए हमेशा तैयार रहूंगा।
आपका मित्र और दिल्ली पुलिस परिवार का सदस्य- फिरोज आलम।
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