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Chanchal Rana : ये हैं ओडिशा में दुग्ध क्रांति लाने वाले IAS, Balangir DM बनकर आपदा को अवसर में बदला

ओडिशा के आईएएस अधिकारी चंचल राणा बलांगीर में जिला कलेक्‍टर हैं। ये दुग्‍ध उत्‍पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं और सफल भी रहे हैं। 21 दिसम्‍बर से Balangir Dairy Summit 2022 करवा रहे हैं।

Chanchal Rana IAS Balangir Dairy Summit
IAS Chanchal Rana DM Balangir & Dairy Summit 2022 : मिल्‍कमैन ऑफ इंडिया माने वर्गीज कुरियन। वो शख्‍स जो भारत में श्‍वेत क्रांति के सूत्रधार थे। उन्‍हीं की बदौलत भारत दुनिया में सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में से एक बनकर उभरा। वर्गीज कुरियन के ही नक्‍शे कदम पर ओडिशा कैडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक अधिकारी चल रहे हैं। नाम है चंचल राणा। (वीडियो नीचे)

आईएएस चंचल राणा डीएम बलांगीर

आईएएस चंचल राणा डीएम बलांगीर

आईएएस चंचल राणा इस वक्‍त पश्चिमी ओडिशा में बलांगीर जिला कलेक्‍टर पद पर सेवाएं दे रहे हैं। बलांगीर में दुग्ध क्रांति की दिशा में डीएम राणा के बढ़ते कदमों का अंदाजा इस बात से सहज लगा लीजिए कि 21 दिसम्‍बर से शहर के कौशल कला मंडल में Balangir Dairy Summit 2022 (गोपालन उत्‍सव ओडिशा ) हो रहा है, जिसमें दूध संघ, डेयरी व पशुपालन से जुड़े जाने-माने लोग हिस्‍सा लेंगे। पहली बार होने जा रहे इस दो दिवसीय डेयरी समिट में बलांगीर में दुग्ध क्रांति को एक कदम और आगे ले जाने तथा अब तक के सफर में रही कमियों पर मंथन होगा।

 आईएएस चंचल राणा का इंटरव्‍यू

आईएएस चंचल राणा का इंटरव्‍यू

वन इंडिया हिंदी से विशेष बातचीत में आईएएस चंचल राणा कहते हैं कि प्रोजेक्‍ट डायरेक्‍टर बारीपाडा मयूरभंज से मेरा ट्रांसफर बलांगीर जिला कलेक्‍टर पद पर हुआ था। मैंने 14 नवंबर 2020 को बतौर बलांगीर डीएम ज्‍वाइन किया। तब पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में थी। बलांगीर भी अछूता नहीं था। ईंट-भट्ठों पर मजदूरी करने तमिलनाडु व तेलंगाना गए लोग भी बड़ी संख्‍या में लौट आए थे। रोजगार के अभाव में लोग बेबस थे।

 पहले आय का जरिया सिर्फ कृषि

पहले आय का जरिया सिर्फ कृषि

डीएम राणा कहते हैं कि बलांगीर में बड़ा हिस्‍सा वन क्षेत्र है। लोगों की आय का जरिया सिर्फ कृषि है। हर दो-तीन साल सूखा पड़ने के कारण कृषि भी फायदे का सौदा नहीं रही। इसी वजह से बलांगीर से हजारों लोग रोजगार के सिलसिले में दूसरे राज्‍यों में जाने को मजबूर थे। ऐसे में बलांगीर जिला प्रशासन ने यहां की विपरीत भौगोलिक परिस्थिति व कोरोना की आपदा को अवसर में बदलने की योजना पर काम करना शुरू किया। सफल भी हुए।

 हर ग्राम पंचायत में दुग्‍ध संकलन केंद्र

हर ग्राम पंचायत में दुग्‍ध संकलन केंद्र

आईएएस चंचल राणा की देखरेख में बलांगीर जिला प्रशासन ने मिल्‍क कॉपरेटिव सोसायटी पर जोर दिया। ज्‍यादा से ज्‍यादा सदस्‍य बनाए। लोगों को पशु खरीदने व पालने के लिए कम ब्‍याज दर पर ऋण दिलवाए। जिलेभर की 370 ग्राम पंचायतों में जगह-जगह दुग्‍ध संकलन केंद्र खोले गए। पशुपालकों के घर से दूध को संकलन केंद्र तक पहुंचाने के लिए वाहनों की सुविधा मुहैया करवाई। पटनागढ़ में पहाड़ी क्षेत्र होने से बड़े टेंकर नहीं पहुंच पाए तो ऑटो लगा दिया।

 प्रतिदिन अधिकतम 70 हजार लीटर दूध का उत्‍पादन

प्रतिदिन अधिकतम 70 हजार लीटर दूध का उत्‍पादन

बलांगीर जिला प्रशासन की मेहनत रंग लाई और देखते ही देखते जिले में मिल्‍क कॉपरेटिव सोसायटी की संख्‍या 250 को पार कर गई। अब प्रत्‍येक ग्राम पंचायत पर एक सोसायटी की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी तरह से पूरे जिले में पहले रोजाना अधिकतम 30 हजार लीटर दूध उत्‍पादित होता था। यह आंकड़ा जून 2022 में 70 हजार लीटर प्रति दिन तक पहुंच गया। अब पशुपालक एक से दो पशु रखकर प्रतिमाह 15 हजार रुपए तक कमा रहे हैं।

 हर दस दिन में खाते में जमा हो जाते रुपए

हर दस दिन में खाते में जमा हो जाते रुपए

आईएएस चंचल राणा कहते हैं कि पशुपालक को सिर्फ दूध अपने नजदीकी संकलन केंद्र तक पहुंचाना होता है। यहां पर दूध की गुणवत्‍ता के हिसाब से पैसे तय होते हैं, जो प्रति लीटर 40 रुपए तक भी मिल जाते हैं। फिर दस दिन में पशुपालक के खाते में दूध का ऑनलाइन पेमेंट आ जाता है। दूध की मार्केटिंग का काम यूनियन के जिम्‍मे होता है। संकलन केंद्र से दूध संबलपुर व कालाहांडी जिले में स्थित प्‍लांट पर भेजा जाता है। वहां दूध से कई तरह के प्रोडेक्‍ट बनते हैं।

लगातार बढ़ रही मिल्‍क कॉपरेटिव सोसायटी की संख्‍या

लगातार बढ़ रही मिल्‍क कॉपरेटिव सोसायटी की संख्‍या

बलांगीर-कालाहांडी-नुआपाड़ा (बीकेएन) क्षेत्रीय दुग्ध संघ महाप्रबंधक डॉ. सरोज कुमार साहू कहते हैं कि मिल्‍क कॉपरेटिव सोसायटी की संख्‍या लगातार बढ़ती जा रही है। यह सब जिला कलेक्‍टर चंचल राणा के प्रयासों का नतीजा है। बात अगर बलांगीर जिले की करें तो दिसम्‍बर 2020 में 211 मिल्‍क कॉपरेटिव सोसायटी थी जो साल 2021 में 235 और अब 2022 में बढ़कर 250 हो गई। इसी क्रम में बीकेएन में 307, 335 व 344 हो गई।

 कौन हैं आईएएस चंचल राणा?

कौन हैं आईएएस चंचल राणा?

बता दें कि चंचल राणा मूलरूप से ओडिशा के ही रहने वाले हैं। अंगुल जिले में नाल्‍को से रिटायर अनिल कांता राणा और हाउसवाइफ बनज्‍योत्‍सना राणा के घर इनका जन्‍म हुआ। NIT सिलचर से डिग्री प्राप्‍त की और यूपीएससी की तैयारियों में जुट गए। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में सातवीं रैंक पाकर होम कैडर ओडिशा में आईएएस बने।

बलांगीर में दो बड़े डेम भी प्रस्‍तावित

बलांगीर चंचल राणा कहते हैं कि जिले में पशुपालन व डेयरी के साथ साथ अब कृषि में भी नई जान फूंकने की तैयारी में हैं। टीटलागढ़ व ब्‍लांगीर में दो नए बड़े डेम प्रस्‍तावित हैं, जो अगले साल बनकर तैयार हो जाने की उम्‍मीद है। फिर लोगों को सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्‍ध हो सकेगी। पशुपालन के साथ साथ खेती होने से लागत कम हो जाती है।

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