खुद के साथी ही बने विरोधी: गुटबाजी की बू....!

गुटबाजी तो नहीं पनप रही ?
गौरलब है कि नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रीमंडल में किसी वरिष्ठ नेता को तवज्जों नहीं देने की वजह से कई वरिष्ठ नेता और उनके चेले-चपाटे एकजुट हो रहे हैं। याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि लाल कृष्ण अडवाड़ीं, राजस्थान के कद्दावर नेता जसवंत सिंह आदि ऐसे वरिष्ठ नेता हैं जिनको खुले तौर नरेंद्र मोदी के प्रभाव के चलते संगठन से अलग-थलग करने की ठेस झेलनी पड़ी है। इसके अलावा बाताया जाता है कि स्वर्गीय पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुण्डे भी भाजपा से काफी दिनों से नाराज चल रहे थे। और मुण्डे की मृत्यु के बाद मुंडे की चहेती महाराष्ट्र भाजपा ने ही इस प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग सबसे पहले उठाई थी।
रेल मंत्री से मिले नेता
करीब 14.2 फीसदी की बढ़ोतरी रेल किराए में तथा 6.5 फीसदी बढ़ोतरी माल भाड़े में की गई। जिसके बाद तो शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे ने खुले तौर पर इस निर्णय का विरोध किया। फिलहाल खबर है कि अभी महाराष्ट्र से भाजपा व शिवसेना के संसादों के दल ने केंद्रीय रेल मंत्री सदानंद गौड़ा से मुलाकात की है। जिसके बाद सदानंद गौड़ा व प्रधानमंत्री असमंजस में हैं कि अब क्या किया जाए।












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