मुरैना में सैनिक अरविंद तोमर की आत्महत्या: मानसिक प्रताड़ना के आरोप, सैन्य सम्मान न मिलने पर चक्काजाम
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में भारतीय सेना की सिग्नल कोर में तैनात हवलदार अरविंद सिंह तोमर (32) की आत्महत्या ने उनके परिवार और समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है। अरविंद के भाई इंद्र कुमार तोमर ने आरोप लगाया कि सेना के कुछ अधिकारियों की मानसिक प्रताड़ना के कारण उनके भाई ने यह कठोर कदम उठाया।
रविवार को अरविंद का शव मुरैना जिले के पोरसा तहसील के खलक का पुरा गांव में पहुंचा, लेकिन सैन्य सम्मान न मिलने से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने NH-552 पर चक्काजाम कर दिया। 6 घंटे तक चले इस प्रदर्शन के बाद ग्वालियर से सेना का एक दल पहुंचा, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।

यह मामला सेना में मानसिक स्वास्थ्य, प्रताड़ना, और सैन्य सम्मान की प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाता है। आइए, इस घटना के तथ्यों, परिवार के आरोपों, और सामाजिक-प्रशासनिक प्रभावों को विस्तार से समझते हैं।
घटना का विवरण: आत्महत्या और मानसिक प्रताड़ना के आरोप
हवलदार अरविंद सिंह तोमर, जो 2013 में सिग्नल कोर में भर्ती हुए थे, वर्तमान में उधमपुर (जम्मू-कश्मीर) में तैनात थे। शनिवार, 21 जून 2025 को उन्होंने आत्महत्या कर ली।
अरविंद के भाई इंद्र कुमार तोमर ने बताया, "कुछ वरिष्ठ अधिकारी अरविंद को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। वह कई बार परेशान होकर घर फोन करते थे। हमने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन वह चुप रहते थे।" परिवार ने यह भी दावा किया कि अरविंद ने हाल के महीनों में छुट्टी लेने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी अर्जी खारिज कर दी गई।
आत्महत्या का कारण
मानसिक प्रताड़ना: परिवार का आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने अरविंद पर अनुचित दबाव डाला, जिससे उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई।
कार्यस्थल का तनाव: सिग्नल कोर में तकनीकी और संचार से जुड़े कार्यों में अरविंद की भूमिका थी, जो उच्च दबाव वाला माहौल हो सकता है।
पारिवारिक संपर्क: अरविंद ने अपनी पत्नी से नौकरी छोड़ने की बात कही थी, जो उनकी निराशा को दर्शाता है।
सेना ने अभी तक इन आरोपों पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन उधमपुर सैन्य स्टेशन ने मामले की आंतरिक जांच शुरू करने की बात कही है।
शव का गांव पहुंचना: सैन्य सम्मान की कमी
रविवार सुबह अरविंद का शव प्राइवेट एंबुलेंस से खलक का पुरा गांव पहुंचा। उनके साथ केवल दो सैनिक और अरविंद का सेना में तैनात भाई मौजूद थे। परिजनों ने जब सैन्य सम्मान दल के बारे में पूछा, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
परिजनों का कहना था, "अरविंद ने देश के लिए 12 साल सेवा की। उनकी मौत के बाद भी उन्हें सम्मान नहीं दिया गया। दो सैनिकों के साथ शव भेज देना अपमानजनक है। हम चाहते हैं कि उनकी अंतिम विदाई सैन्य सम्मान के साथ हो।" यह मांग भारतीय सेना की सैन्य सम्मान प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, खासकर उन मामलों में जहां मृत्यु आत्महत्या से हुई हो।
सैन्य सम्मान की प्रक्रिया
- सामान्य प्रथा: शहीद सैनिकों या ड्यूटी के दौरान मृत सैनिकों को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाती है, जिसमें गार्ड ऑफ ऑनर, बिगुल बजाना, और राष्ट्रीय ध्वज में शव लपेटना शामिल है।
- आत्महत्या के मामले: सेना नियमावली के अनुसार, आत्महत्या के मामलों में सैन्य सम्मान का निर्णय यूनिट कमांडर और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कई बार इसे नागरिक अंतिम संस्कार के रूप में ही किया जाता है।
- परिवार की शिकायत: परिजनों का मानना है कि अरविंद की 12 साल की सेवा को नजरअंदाज किया गया।
- चक्काजाम और प्रदर्शन: 6 घंटे का तनाव
- सैन्य सम्मान न मिलने से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने रविवार सुबह 9 बजे NH-552 पर अरविंद का शव रखकर चक्काजाम शुरू कर दिया।
- सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार।
- मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की निष्पक्ष जांच।
- परिवार के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी।
चक्काजाम के कारण मुरैना-ग्वालियर मार्ग पर 6 घंटे तक यातायात ठप रहा। पोरसा थाना प्रभारी और तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर समझाइश की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। दोपहर 2 बजे ग्वालियर से 16 मराठा लाइट इन्फैंट्री का एक सैन्य दल पहुंचा, जिसने सैन्य सम्मान के साथ अरविंद का अंतिम संस्कार कराया। इसके बाद परिजनों ने चक्काजाम समाप्त किया।
प्रदर्शन का प्रभाव
- यातायात अवरोध: NH-552 पर सैकड़ों वाहन फंसे, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई।
- सामाजिक तनाव: गांव में सेना और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बढ़ा।
- राजनीतिक हस्तक्षेप: कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की।
- परिवार का दर्द: अरविंद की कहानी
अरविंद सिंह तोमर (32) खलक का पुरा गांव के एक साधारण किसान परिवार से थे। 2013 में सिग्नल कोर में भर्ती होने के बाद उन्होंने उधमपुर, जम्मू, और अन्य स्थानों पर सेवा दी। उनकी पत्नी चांदनी और दो छोटे बच्चे (5 और 3 वर्ष) हैं। अरविंद के पिता राम सिंह तोमर ने कहा, "मेरा बेटा देश के लिए जवान था। वह हमेशा कहता था कि वह गर्व से वा करता है। आकतियों ने उसे इतना तंग किया कि उसने अपनी जान दे दी।"
- आर्थिक स्थिति: परिवार की आय का मुख्य स्रोत अरविंद की तनख थी। अब उनकी पत्नी और बच्चे आर्थिक संकट का सामना कर सकते हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य: परिवार का कहना है कि अरविंद ने हाल के महीनों में तनाव और नींद की कमी की शिकायत की थी, लेकिन सेना ने इसकी अनदेखी की।
- सेना का रवैया: परिजनों ने आरोप लगाया कि उधमपुर यूनिट ने अरविंद की मृत्यु के बाद भी परिवार से संपर्क नहीं किया।
- मानसिक स्वास्थ्य संसाधन: सेना में साइकोलॉजिकल काउंसलिंग और मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन उपलब्ध हैं, लेकिन इनका उपयोग सीमित है।
- प्रताड़ना के आरोप: जूनियर सैनिकों पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अनुचित दबाव के मामले पहले भी सामने आए हैं।
- सुधार के कदम: रक्षा मंत्रालय ने 2024 में मानसिक स्वास्थ्य नीति की घोषणा की थी, जिसमें स्ट्रेस मैनेजमेंट और काउंसलिंग पर जोर दिया गया।












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