थाईलैंड के पास समुद्र में फंसे 150 से ज्यादा रोहिंग्या

रोहिंग्या शरणार्थियों को लिए यह नाव नवंबर के अंत के दिनों में बांग्लादेश से निकली थी. मानवाधिकार समूह 'द अराकान प्रोजेक्ट' की निदेशक क्रिस लेवा ने कहा कि नाव जब दक्षिणी थाईलैंड के रानोंग के तट के पास से गुजर रही थी तब उसमें कहीं से पानी घुसने लगा.
यात्रियों के रिश्तेदारों से की गई बातचीत के आधार पर लेवा ने बताया, "उनके पास पानी और भोजन लगभग खत्म हो गया है." उन्होंने यह भी कहा कि नाव पर मौजूद लोग नाव से पानी निकालने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं. उन लोगों ने थाईलैंड की नौसेना की एक नाव देखी थी लेकिन उसने उनकी मदद नहीं की.
नौसेना के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि नाव थाईलैंड की जल सीमा में दाखिल नाहने हुई थी और अभी भारत के क्षेत्र में थी. इस अधिकारी ने अपना नाम ना जाहिर करने को कहा क्योंकि वो मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं.
नाव पक्के तौर पर इस समय कहां है यह स्पष्ट नहीं हो पाया. थाईलैंड में रहने वाले रोहिंग्याएक्टिविस्ट सईद आलम ने भी यात्रियों के रिश्तेदारों से बातचीत के आधार पर बताया कि कुछ यात्रियों की मौत हो गई. रॉयटर्स स्वतंत्र रूप से इस बात की पुष्टि नहीं कर पाया.
उन्होंने कहा, "उनकी हालत बहुत खराब है...वो दुर्बल हो गए हैं और अगर उन्हें कोई मदद न मिली तो वो मर जाएंगे." शरणार्थियोंके लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्था (यूएनएचसीआर) ने पिछले सप्ताह कहा था कि इस साल म्यांमार और बांग्लादेश के बीच अंडमान सागर को पार करने की कोशिश करने वाले लोगों की संख्या में "नाटकीय बढ़त" देखी गई है.
यह दुनिया की सबसे खतरनाक समुद्री यात्राओं में से है जिसे इस साल कम से कम 1,900 लोगों ने पूरा किया है. 2020 के मुकाबले यह संख्या छह गुना ज्यादा है. एजेंसी ने बताया कि सिर्फ इसी साल में इस यात्रा को पूरा करने की कोशिश में कम से कम 119 लोग मर गए हैं.
यूएनएचसीआर के एक प्रवक्ता ने कहा कि एजेंसी "नाव की मौजूदा स्थिति को लेकर बेहद चिंतित" है और थाईलैंड की सरकारी से अपील कर रही है कि वो उन्हें बचा ले और नाव से सुरक्षित उतरने में मदद करे. हर साल कई रोहिंग्या म्यांमार में दमन और हिंसा से और बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरोंकी गंदगी से भागने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल कर इस तरह की यात्रा करते हैं.
इनमें से कई मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं. हाल के दिनों में ऐसी यात्राएं करने वालों की संख्या बढ़ गई है. 2017 में 7,30,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में सेना के एक हिंसक अभियान से बचने के लिए वहां से भाग कर बांग्लादेश चले गए थे.
सीके/एए (रॉयटर्स)
Source: DW
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