कांशीराम जयंती पर भोपाल में बहुजन समाज का बड़ा संदेश: संविधान बचाने के लिए राहुल गांधी का साथ दें

बहुजन आंदोलन के महानायक कांशीराम की जयंती रविवार को राजधानी भोपाल में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। शहर के बी-2/74 स्थित बंगले पर आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों बहुजन कार्यकर्ता, युवा और प्रबुद्धजन शामिल हुए। इस अवसर पर वक्ताओं ने कांशीराम के संघर्षमय जीवन को याद करते हुए कहा कि आज देश में सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के लिए उनके विचारों की पहले से ज्यादा जरूरत महसूस की जा रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी टी.आर. अहिरवार ने की, जबकि संचालन कांग्रेस नेता एडवोकेट सिद्धार्थ मौर्य ने किया। वक्ताओं ने देश में बढ़ते जातिवाद और सामाजिक विभाजन पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज को एकजुट होकर संविधान की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।

Big event in Bhopal on Kanshi Ram Jayanti Rahul Gandhi statement gets support

राहुल गांधी की मांग को मिला समर्थन

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का जोरदार समर्थन किया। वक्ताओं का कहना था कि यह मांग केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि करोड़ों बहुजनों के आत्मसम्मान और अधिकारों की लड़ाई को मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. विक्रम चौधरी ने कहा कि कांशीराम जैसे महान सामाजिक चिंतक को भारत रत्न देना देश के बहुजन समाज के संघर्षों को सम्मान देने के बराबर होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा उठाई गई इस मांग के लिए बहुजन समाज आभार व्यक्त करता है।

संविधान बचाने की चुनौती

अध्यक्षीय संबोधन में टीआर अहिरवार ने कहा कि आज देश के सामने संविधान की रक्षा की बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि संविधान समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद है, इसलिए इसे बचाने के लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक होना होगा।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार संविधान की बात कर रहे हैं और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठा रहे हैं। ऐसे में बहुजन समाज को उनके प्रयासों को समर्थन देना चाहिए।

साइकिल से देशभर में जागरूकता अभियान

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कांशीराम के जीवन संघर्षों और बहुजन आंदोलन में उनके योगदान को विस्तार से याद किया। डॉ भंवर सिंह गंगवाल ने कहा कि कांशीराम ने दलित और वंचित समाज में जागरूकता फैलाने के लिए साइकिल से पूरे देश का भ्रमण किया। उन्होंने अपना पूरा जीवन शोषित समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया और निजी जीवन के सभी सुखों का त्याग किया।

उन्होंने कहा कि कांशीराम का उद्देश्य केवल सामाजिक चेतना जगाना नहीं था, बल्कि बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना भी था।

नौकरी छोड़कर चुना सामाजिक आंदोलन का रास्ता

कार्यक्रम में वरिष्ठ बामसेफ सदस्य उत्तम साल्वे और दलित बांसोड़ ने कहा कि कांशीराम ने पुणे में वैज्ञानिक की नौकरी छोड़कर अंबेडकरवादी आंदोलन की राह चुनी। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने BAMCEF और DS-4 जैसे संगठनों के माध्यम से बहुजन समाज को संगठित किया और सामाजिक-राजनीतिक चेतना जगाई।

वक्ताओं ने याद दिलाया कि "वोट से लेंगे सीएम-पीएम" जैसे नारों के जरिए उन्होंने बहुजन समाज को सत्ता में भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में महेंद्र जादव, मिलिंद बोर्डे, जयंत यादव, आकाश पाटिल, दिनेश सोनोने, सागर जाटव सहित बड़ी संख्या में युवा और समाज के प्रबुद्धजन मौजूद रहे। अंत में महेश नंदमेहर ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

बहुजन एकता और संविधान रक्षा का संकल्प

कार्यक्रम केवल कांशीराम को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बहुजन समाज की एकता और संविधान की रक्षा के संकल्प का मंच भी बना। वक्ताओं ने कहा कि आज देश में सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है। कांशीराम के विचार और संघर्ष आज भी बहुजन समाज को दिशा देते हैं।

कांशीराम की जयंती पर दिया गया यह संदेश पूरे प्रदेश में गूंज रहा है कि जातिवाद और भेदभाव को खत्म कर संविधान की भावना को मजबूत करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+