MP News: अब चीतलों पर चिंतित सरकार, कान्हा नेशनल पार्क में साऊथ अफ्रीका के फॉर्मूले से हो रही शिफ्टिंग
मंडला के कान्हा नेशनल पार्क में चीतलों का संतुलन बनाए रखने साउथ अफ्रीका की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा हैं। जिस क्षेत्र में संख्या में कम है, वहां चीतलों की शिफ्टिंग की जा रही हैं।

Kanha National Park: मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क के अलग-अलग जोन में चीतलों की संख्या संतुलित करने प्रयास तेज हो गए हैं। वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में शिवराज सरकार पहले से ही गंभीर हैं। साउथ अफ्रीका का फॉर्मूला अपनाकर मुक्की जोन के बिसनपुरा और औरई से चीतलों को भैसानघाट वन परिक्षेत्र में शिफ्ट किया जा रहा हैं।

कान्हा नेशनल पार्क में चीतलों की बड़ी तादात हैं। लेकिन यहां कुछ क्षेत्रों में कई बार शाकाहारी चीतल बाघों की खुराक बन जाते हैं। वन्य प्राणियों के बीच संघर्ष जैसे हालात भी देखने को मिल चुके हैं। चीतल के अलावा अन्य जानवरों को भी बाघ भ्रमण के दौरान अपना निवाला बने चुके। इन स्थितियों की सरकार तक जब जानकारी पहुंची, तो चीतलों को शिफ्ट करने की योजना बनाई गई। कान्हा नेशनल पार्क के अधिकारियों के मुताबिक अभी तक 1500 चीतलों को शिफ्ट किया गया हैं।
बताया गया कि पार्क के कोर एरिया में लगभग 29 हजार चीतल हैं। तीन जोन कान्हा, किसली और मुक्की में ये बहुतायत में हैं। जबकि इसके अन्य क्षेत्र में चीतलों की संख्या कम हैं। यहां के सभी क्षेत्रों में संख्या संतुलित करने फेन सेंचुरी और भैसानघाट में चीतल शिफ्ट हो किए जा रहे हैं। पार्क प्रबंधन ने साउथ अफ्रीका के फॉर्मूले को अपनाया हैं। जिसके तहत फनल के शेप का 'बोमा' बनाया जाता हैं। जहां चीतल इकठ्ठे हो जाते है। फिर इस बोम के दूसरे छोर से वाहनों में चीतों को लोड किया जाता है। फिर संबंधित क्षेत्र में इन्हें छोड़ दिया जाता हैं। दरअसल बाघ समेत कई ऐसे मांसाहारी प्राणी है जो भोजन की तलाश में रहते है। साइटिंग के वक्त शिकार दिखते ही ऐसे प्राणी चीतल जैसे जानवरों पर टूट पड़ते है। बफर जोन से हटकर की जा रही इस व्यवस्था से काफी हद तक चीतलों की कम हो रही संख्या पर नियंत्रण लाया जा सकेगा।












Click it and Unblock the Notifications