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Who is Vinod Tawde: कौन हैं भाजपा नेता विनोद तावड़े, जो महाराष्‍ट्र वोटिंग से पहले Cash for vote में फंसे

Vinod Tawde Cash for Vote: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सभी 288 सीटों पर सिंगल फेज में 20 नवंबर (बुधवार) को मतदान है। 23 नवंबर को नतीजे आएंगे। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के खिलाफ आरोप सामने आए हैं। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक विपक्षी दलों ने पैसे बांटने के आरोपों को लेकर भाजपा की आलोचना की है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों के संबंध में एफआईआर दर्ज की है, जिससे मतदान के नतीजों पर असर पड़ सकता है।

बहुजन विकास अघाड़ी के कार्यकर्ताओं ने तावड़े पर नकदी बांटकर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि तावड़े के पास मौजूद बैग में 5 करोड़ रुपये की नकदी थी। इस विवाद ने भाजपा के भीतर तावड़े की भूमिका और प्रभाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर

20 जुलाई 1963 को मुंबई के गिरगांव में जन्मे विनोद तावड़े ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी। उन्होंने मुंबई में ABVP का नेतृत्व किया और अपने कार्यकाल के दौरान संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तावड़े की राजनीतिक उन्नति तब जारी रही जब वे 1995 में भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के महासचिव बने। 1999 तक, उन्हें मुंबई भाजपा का सबसे युवा अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2002 में, उन्होंने एक विस्तारित अवधि के लिए महाराष्ट्र के महासचिव के रूप में अपनी भूमिका फिर से शुरू की।

नियम और जिम्मेदारियाँ

2008 में तावड़े को महाराष्ट्र विधान परिषद का सदस्य नियुक्त किया गया। 2011 तक वे विधान परिषद में विपक्ष के नेता बन गए थे। उनकी जिम्मेदारियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम का समन्वय करना भी शामिल था।

तावड़े ने 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बोरीवली विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। उन्होंने देवेंद्र फडणवीस सरकार में स्कूली शिक्षा और खेल समेत कई विभागों की देखरेख करने वाले मंत्री के रूप में काम किया।

भाजपा की रणनीतिक चालें

भाजपा ने महाराष्ट्र के अंदर और बाहर दोनों जगह तावड़े के व्यापक अनुभव का लाभ उठाया है। उनकी भूमिकाओं में राष्ट्रीय महासचिव बनना और बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों की देखरेख करना शामिल है। 2019 के चुनावों में अपना टिकट खोने के बावजूद, तावड़े पार्टी के ढांचे के भीतर सक्रिय रहे।

तावड़े को महाराष्ट्र में कृषि के लिए अलग बजट की वकालत करने के लिए जाना जाता है। अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने मिल मजदूरों और किसानों के समर्थन पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

विवाद का प्रभाव

तावड़े के खिलाफ आरोपों को लेकर भाजपा बचाव की मुद्रा में नजर आती है। हालांकि, तावड़े का तर्क है कि महायुति के बढ़ते समर्थन के कारण विपक्षी दल बेबुनियाद दावे कर रहे हैं। वह इन आरोपों की चुनाव आयोग द्वारा निष्पक्ष जांच पर जोर देते हैं।

तावड़े को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भरोसेमंद नेता माना जाता है। पिछले कुछ सालों में वे प्रेस कॉन्फ्रेंस और टीवी चैनलों पर बीजेपी का एक प्रमुख चेहरा बन गए हैं। यह घटना इस चुनाव अवधि के दौरान मतदाताओं के निर्णयों पर इसके संभावित प्रभाव के बारे में प्रश्न उठाती है।

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