भाषा विवाद के बीच उद्धव की शिवसेना में बड़ी टूट की आहट, BJP बोली- 'कई सांसद-विधायक हमारे संपर्क में'

Three language policy Maharashtra controversy: महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गरमा गई है, जहां बीजेपी नेता और राज्य सरकार में मंत्री गिरीश महाजन ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) पर सीधा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने न सिर्फ ठाकरे गुट के कई सांसदों और विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने का दावा किया, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर जनता के भरोसे को खत्म हुआ बताया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में तीन-भाषा नीति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है। महाजन ने ठाकरे को "पलटीबहादुर" कहकर न सिर्फ उनके फैसलों पर सवाल उठाया, बल्कि उनके राजनीतिक रवैये को अपरिपक्व और स्वार्थपूर्ण बताया।

महाजन का आरोप है कि उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने की लालसा में अपने पिता और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से समझौता किया, और यही उनके राजनीतिक पतन की सबसे बड़ी वजह बन गई।

Three language policy Maharashtra controversy

राज और उद्धव की साझा रैली के बाद आया बयान

बीजेपी नेता का यह बयान उस दिन आया जब उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे (मनसे प्रमुख) ने लगभग दो दशकों बाद एक साथ मंच साझा किया। यह रैली उस निर्णय के बाद हुई जिसमें महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने कक्षा 1 से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने वाली दो सरकारी अधिसूचनाएं वापस लीं।

'उद्धव सरकार ने खुद लागू की थी हिंदी नीति'

महाजन ने कहा, 'आज भी उद्धव गुट के कई विधायक और सांसद मेरे संपर्क में हैं। अगर यकीन नहीं है तो जल्द ही आप खुद देख लेंगे। उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में अब कोई भरोसा नहीं रह गया है। पिछले महीने जब राज्य सरकार ने दोनों GRs वापस लिए थे, तब उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया था कि बतौर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ही डॉ. रघुनाथ माशेलकर समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर तीन-भाषा नीति लागू करने की मंजूरी दी थी।

हालांकि, उद्धव ठाकरे ने यह कहते हुए आरोपों को नकारा था कि उन्होंने सिर्फ एक अध्ययन समूह का गठन किया था, जिसने एक भी बैठक नहीं की।

'उसी नीति का अब विरोध, ये साफ पलटी है'

महाजन ने तंज कसते हुए कहा, 'यह वही निर्णय है जिस पर उद्धव सरकार की कैबिनेट ने सहमति दी थी और जिसकी फाइल पर खुद उनके हस्ताक्षर हैं। अब उसी का विरोध कर रहे हैं।

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'यह एक स्पष्ट यू-टर्न है'

उन्होंने कहा, यह साफ दिखाता है कि उद्धव ठाकरे सिर्फ वर्तमान सरकार का विरोध करने के लिए अपनी ही नीतियों से मुकर रहे हैं। महाजन ने ठाकरे पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने 2019 में मुख्यमंत्री बनने के लिए बालासाहेब के हिंदुत्व सिद्धांत को दरकिनार कर दिया और शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया।

सत्ता की लालसा में उन्होंने अपनी विचारधारा और राजनीतिक विरासत दोनों को त्याग दिया, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो गया। उन्होंने अंत में कहा कि आगामी जिला परिषद, पंचायत समिति और नगरपालिका चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि जनता किस नेता पर कितना भरोसा करती है।

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