महाराष्‍ट्र चुनाव में फ्लॉप हुई "ठाकरे ब्रदर्स" की राजनीति, केवल उद्धव ही नहीं राज भी हो गए खत्‍म

Maharashtra Election Results 2024: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम में भाजपा के नेतृत्‍व वाले महायुति गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। वहीं सत्‍ता में वापसी करने का दावा करने वाला विपक्षी महाविकास अघाड़ी गठबंधन को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। इस चुनाव में सबसे तगड़ा झटका महाराष्‍ट्र की राजनीति में लंबे समय से हनक रखने वाले ठाकरे ब्रदर्स को लगा है।

बाला साहेब जैसे सफल राजनीतिज्ञ के बेटे शिवसेना (UBT) प्रमख उद्धव ठाकरे और उनका भतीजा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे दोनों ही फ्लाप हो गए। इस चुनाव में ठाकरे परिवार की राजनीति पैतरे फेल साबित हुए और दोनों की पार्टियां राज्‍य में हाशिये पर पहुंच चुकी हैं।

Raj Thackeray Uddhav Thackeray

उद्वव ठाकरे चुनाव को मिली महज इतनी सीटें?
शिवसेना यूबीटी प्रमख उद्धव ठाकरे की पार्टी इस चुनाव में महज 20 सीटों पर सिमट कर रह गई है। जबकि 2019 के विधानसभा चुनाव में उद्वव ठाकरे की शिवसेना ने 63 सीटों पर जीत हासिल की थी।

क्‍यों अर्स से फर्श पर आई उद्वव ठाकरे की शिवसेना?

2019 के विधानसभा चुनाव शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन करके लड़ा था और बेहरीन जीत हासिल की थी लेकिन मुख्‍यमंत्री की कुर्सी की लालच में भाजपा से गठबंधन तोड़ हिंदुत्‍ववादी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विपक्षी विचारधारा वाली कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी से हाथ मिलकार महाविकास अघाड़ी सरकार बनाकर सीएम की कुर्सी हासिल कर ली थी।

शिवसेना मतलब ठाकरे नहीं?

वहीं 2022 में हिंदुत्‍ववादी शिवसैनिक एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी और शिवसेना से 39 विधायकों को तोड़कर भाजपा के साथ हाथ मिला कर उद्धव ठाकरे के प्रति‍निधित्‍व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार गिरा दी थी। जिसके बाद महायुति सरकार का गठन हुआ और एकनाथ शिंदे मंत्री बने।

महज ढाई साल सत्‍ता संभलाने के बाद 2024 में हुए चुनाव एकनाथ शिंदे ने भाजपा के नेतृत्‍व वाले भाजपा के साथ लड़ा और 53सीटो पर जीत हासिल कर उद्वव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी को तगड़ा झटका दिया। ये चुनाव शिवसेना के अस्तित्‍व का चुनाव था। चुनाव परिणाम ने साबित कर दिया कि शिवसेना का मतलब ठाकरे नहीं है। शिवसेना मतलब हिंदुत्‍वाद।

राज ठाकरे की MNS का हो गया पूरी तरह से सफाया

वहीं उद्वव ठाकरे के चचेरे भाई और कट्टर विरोधी राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)का इस चुनाव में पूरी तरह सफाया हो गया है। राज ठाकरे ने 125 सीटों पर अपनी पार्टी के उम्‍मीदवार उतारे थे और सभी हार गए। इतना ही नहीं राज ठाकरे ने महिम सीट पर अपने बेटे अमित ठाकरे को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा था लेकिन वो भी हार गए। MNS ने अपने पहले चुनाव में 13 सीटें और 2014 के लोकसभा चुनावों में MNS ने एक सीट हासिल की थी। लगातार खराब प्रदर्शन करने वाली एमएनएस का 2024 के चुनाव में खाली हाथ रह गई है।

क्‍यों भाई-भाई के बने दुश्‍मन
याद रहे 2006 में बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच शिवसेना में वर्चस्‍व को लेकर मतभेद हुआ जिसके बाद राज ने शिवसेना छोड़ दी थी। जब कि बाला साहेब के सानिध्‍य में राज ठाकरे ने राजनीति के गुर सीखे थे और उनके राजनीतिक उत्‍तराधिकारी माने जा रहे थे।

मनसे का गठन कर 2009 के चुनाव में शिवसेना को सिखाया सबक?

शिवसेना छोड़ने के बाद राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का गठन किया था और हिंदुत्व और मराठी मानुस के एजेंडे पर खड़ा किया और 2009 के चुनाव में महाराष्‍ट्र में रह रहे यूपी , बिहार के प्रवासियों को निशाना बनाते हुए मराठी भाषी का वोट पाया और ठाकरे की शिवसेना को जमकर नुकसान पहुंचाया।

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