तो महाराष्ट्र में भी होगा पंजाब वाला हाल, सोनिया को 25 कांग्रेस MLA का त्राहिमाम संदेश
मुंबई, 30 मार्च: महाराष्ट्र सरकार में कांग्रेस तीसरे नंबर की सहयोगी है। पार्टी सत्ता में है, उसके मंत्री हैं, लेकिन पार्टी के विधायक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। महा विकास अघाड़ी सरकार को तो छोड़ दें, ये विधायक अपने दल के मंत्रियों की ओर से भी साइडलाइन कर दिए जाने का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे 25 विधायकों की बातों पर जब कांग्रेस कोटे के मंत्री ही ध्यान नहीं दे रहे हैं तो उन्होंने दिल्ली दरबार का दरवाजा खटखटा दिया है। विधायकों में हो रही इस सुगबुगाहट के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले भी अचानक सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली सरकार को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर काम करने का दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।

महराष्ट्र के 25 कांग्रेस एमएलए का सोनिया को त्राहिमाम संदेश
महाराष्ट्र के कम से कम 25 कांग्रेस विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात का समय मांगा है, ताकि वे महा विकास अघाड़ी सरकार के मंत्रियों के खिलाफ शिकायत कर सकें। इनका कहना है कि कांग्रेस के ये मंत्री उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। इन विधायकों ने सोनिया को एक चिट्ठी लिखकर चीजों को ठीक करने के लिए दखल देने की मांग की है। इनमें से कुछ एमएलए ने ईटी से कहा है कि एमवीए सरकार के मंत्री, खासकर कांग्रेस के मंत्री भी उनकी बातें नहीं सुनते हैं। इनमें से एक ने कहा कि 'क्षेत्र में काम करवाने के अनुरोध को लेकर', 'अगर मंत्री एमएलए को नजरअंदाज करेंगे तो पार्टी चुनावों में कैसे अच्छा कर पाएगी।'

'हर मंत्री को मिली हुई है 3 विधायकों की जिम्मेदारी'
पार्टी में तालमेल की कमी की ओर इशारा करते हुए इन विधायकों ने कहा है कि उन्हें पिछले ही हफ्ते पता चला है कि प्रत्येक मंत्रियों को विधायकों की बातें ठीक से सुनने के लिए तीन-तीन एमएलए की बातों का ख्याल रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। एक दूसरे कांग्रेस एमएलए ने कहा कि 'हमें तब पता चला जब हाल ही में एचके पाटिल ने एक बैठक की थी कि कांग्रेस के प्रत्येक मंत्रियों को एक-एक एमएलए आवंटित किए गए थे। यह एमवीए सरकार के गठन के कुछ महीने बाद ही किया गया था, लेकिन हमें अब जानकारी मिली है, अगले चुनाव से 2.5 साल पहले। अभी भी यह कोई नहीं जानता कि कौन मंत्री हमसे जोड़ा गया है।'

'तो महाराष्ट्र में भी होगा पंजाब वाला हाल'
पार्टी के बाकी विधायकों का कहना है कि कांग्रेस एनसीपी से पिछड़ती जा रही है। क्योंकि, उपमुख्यमंत्री अजित पवार लगातार अपनी पार्टी विधायकों से मिलते हैं, फंड देते हैं और उनकी बातें सुनते भी हैं। एक कांग्रेसी विधायक ने कहा, 'एनसीपी हम पर भारी पड़ रही है। एनसीपी के मंत्रियों को ज्यादा फंड आवंटित किए जाते हैं और अगर चीजें ऐसी ही रहीं तो महाराष्ट्र में भी कांग्रेस दूसरे राज्यों की तरह हाशिए पर चली जाएगी।' कांग्रेस विधायकों ने कहा कि पंजाब में हार के बाद तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है। अगर महाराष्ट्र में पार्टी यूं ही पड़ी रहती है तो वैसा ही परिणाम यहां भी देखने को मिल सकता है। (ऊपर की तस्वीरें-फाइल)

अचानक सक्रिय हो गए नाना पटोले
पार्टी विधायकों की बात सीधे आलाकमान तक पहुंचने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले भी अचानक सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा है कि 'जब हमने सरकार बनाई थी तब एनसीपी और शिवसेना ने सोनिया गांधी के साथ मिलकर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर चर्चा की थी। क्योंकि, अब महामारी काफी हद तक कम हो गई है, हमने सरकार को याद दिलाया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी का जमीनी स्तर पर विकास होना चाहिए।'












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