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BMC Polls: उद्धव ठाकरे का कांग्रेस से मोहभंग! शिवसेना (UBT) अकेले क्यों लड़ना चाहती है BMC चुनाव?

BMC Election 2025: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों का सामना करने के बाद शिवसेना (यूबीटी) बीएमसी चुनाव अकेले ही लड़ने की तैयारी में है। सपा ने पहले ही एमवीए से निकलने की बात कह दी है। शरद पवार की एनसीपी(एसपी) का मायानगरी की राजनीति में कोई खास वजूद है नहीं। अब उद्धव ठाकरे कम से कम इस चुनाव में कांग्रेस से भी नाता नहीं रखना चाहते हैं।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व ने विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद पार्टी के आंतरिक मूल्यांकन को देखने के बाद इस तरह का मन बनाया है। इसमें पाया गया है कि मुंबई की राजनीति में दोनों दलों का सामाजिक और सियासी गणित फिट नहीं बैठ रहा है और दोनों दलों को एक-दूसरे के लिए वोट ट्रांसफर कराने में मुश्किल हो रही है।

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बीएमसी चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेगी शिवसेना (यूबीटी)-रिपोर्ट
शिवसेना (यूबीटी) के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, 'शिवसेना (यूबीटी) आने वाले बीएमसी चुनाव अकेले ही लड़ेगी और यहां की सभी सीटें हमारी परंपरागत गढ़ हैं, क्योंकि यह बीएमसी की हैं। बीएमसी चुनावों में हम कांग्रेस के साथ किसी तरह का गठबंधन नहीं करेंगे, क्योंकि बीएमसी चुनावों के लिए शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के चुनावी आधार बहुत अलग है।'

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क्या ऐसा करने से विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में बिखराव नहीं होगा तो इसके जवाब में उद्धव की पार्टी के नेता ने कहा, 'पिछले बीएमसी चुनावों (2017) में (तबकी सहयोगी) शिवसेना और बीजेपी अलग-अलग लड़ी थी।' हालांकि,कहीं न कहीं यहीं से बीजेपी और संयुक्त शिवसेना के बीच एक खाई पैदा हुई थी, जो कि 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद पूरी तरह से टूट में बदल गई।

विधानसभा चुनावों में क्या रही मुंबई की चुनावी स्थिति?
मुंबई में विधानसभा की 36 सीटें हैं। बीएमसी चुनावों का दायरा भी यही विधानसभा क्षेत्र हैं। इस बार के विधानसभा चुनावों में इनमें से 22 सीटें बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति के खाते में गई हैं, जिसमें अकेले बीजेपी 15 सीटें जीती है। वहीं शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और समाजवादी पार्टी गठबंधन के एमवीए के खाते में सिर्फ 14 सीटें गई हैं। इनमें से शिवसेना (यूबीटी) को 10, कांग्रेस को 3 और सपा को 1 सीट मिली है।

क्या अकेले चुनाव लड़कर बीएमसी पर कब्जा रख पाएंगे उद्धव?
उद्धव को भले ही लग रहा हो कि बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने में उनकी पार्टी को ज्यादा फायदा मिलेगा, लेकिन वनइंडिया के विश्लेषण में कुछ अलग ही तथ्य सामने आए हैं। खासकर यह बात ध्यान रखने की है कि शिवसेना (यूबीटी) को मुस्लिम-बहुल इलाकों में अगर बहुत ज्यादा वोट मिले हैं तो उसमें कांग्रेस का बहुत ज्यादा प्रभाव माना जा सकता है।

उदाहरण के लिए सिर्फ जोगेश्वरी विधानसभा के परिणाम को ही देखें तो यहां के 6 में से 4 वार्ड में इस बार एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बढ़त मिली। लेकिन, मुस्लिम-बहुल 2 वार्ड में ही शिवसेना (यूबीटी) को इतना वोट मिल गया कि उद्धव की पार्टी ने महायुति उम्मीदवार को हरा दिया।

महायुति ने की है मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा
जहां तक महायुति की बात है तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही साफ कर चुके हैं कि उनका गठबंधन बीएमसी चुनाव भी मिलकर ही लड़ेगा। तथ्य यह है कि बीएमसी पर 1985 से ही शिवसेना का कब्जा है, जो अभी उद्धव ठाकरे के नियंत्रण में है।

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2017 में संयुक्त शिवसेना को अकेले कड़ी टक्कर दे चुकी है बीजेपी
लेकिन, फिर भी 2017 के चुनाव में अकेले बीजेपी ने संयुक्त शिवसेना को लगभग पूरी तरह से घेर लिया था। बीजेपी को बीएमसी की 227 सीटों में से 82 सीटें मिल गई थीं और संयुक्त शिवसेना सिर्फ 2 सीटें ज्यादा 84 ही जीत सकी थी। आज की तारीख की सच्चाई है कि संयुक्त शिवसेना टूट चुकी है और उसके बड़े हिस्से का बीजेपी के साथ गठबंधन है और वह गठबंधन प्रदेश की सत्ता में भी बहुत ही विशाल बहुमत के साथ दोबारा काबिज हुआ है।

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