Manoj Jarange : सरकार के आश्वासन पर मनोज जरांगे ने तोड़ा अनशन, कैसे बने मराठा आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा?

Manoj Jarange: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आए मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने रविवार को महाराष्ट्र सरकार के साथ बातचीत के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। जलना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से शुरू हुआ उनका यह आंदोलन 15 घंटे में खत्म हो गया। आपको बता दें कि तेज धूप में बैठने के कारण उनकी देर रात हालत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था।

लेकिन सरकार के प्रतिनिधिमंडल से आश्वासन के बाद उन्होंने आज अनशन खत्म कर दिया, उनका यह विरोध प्रदर्शन महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, जो मराठा आरक्षण कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख हैं, की मौजूदगी में समाप्त हुआ।

Manoj Jarange

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, समर्थकों को संबोधित करते हुए जरांगे-पाटिल ने कहा कि 'सरकार उन 58 लाख रिकॉर्ड्स के आधार पर 'कुनबी' जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर सहमत हो गई है, जिनकी पहचान पहले ही की जा चुकी है।'

कौन हैं मनोज जरांगे पाटील?

1 अगस्त 1982 को जन्मे मनोज रावसाहेब जरांगे एक भारतीय कार्यकर्ता हैं जो मराठों को OBC समूह के रूप में मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। महाराष्ट्र के बीड जिले के मटोरी गांव के रहने वाले हैं और अब शाहगढ़ में बस गए हैं। जरांगे पाटिल और उनकी पत्नी सुमित्रा की तीन बेटियां और एक बेटा है। वह पिछले एक दशक से अधिक समय से मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए सक्रिय हैं। उन्होंने मराठा समाज को संगठित करने के लिए 'शिवबा संघटना नामक संगठन' की स्थापना भी की।

सामाजिक आंदोलन से जुड़े हुए हैं मनोज जरांगे पाटील

हालांकि वह लंबे समय से सामाजिक आंदोलन से जुड़े रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान सितंबर 2023 में हुई, जब उन्होंने जलना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया। उस आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज की घटनाओं ने पूरे महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था।

मराठा आरक्षण आंदोलन का बड़ा चेहरा हैं मनोज जरांगे पाटील

बताते चले कि महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग नई नहीं है। यह आंदोलन कई दशकों से चल रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में मनोज जरांगे पाटील इसके सबसे प्रभावशाली चेहरे बनकर उभरे हैं। उनकी प्रमुख मांग यह रही है कि मराठा समुदाय को 'कुनबी' के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के तहत आरक्षण का लाभ मिल सके।

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कई बार कर चुके हैं भूख हड़ताल

मनोज जरांगे पाटील का आंदोलन सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कई बार भूख हड़ताल और पदयात्राओं के जरिए सरकार पर दबाव बनाया है। वर्ष 2024 में मुंबई के आजाद मैदान तक निकाले गए उनके आंदोलन ने पूरे राज्य का ध्यान खींचा था।

'मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस केस वापस लिए जाएं'

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ये रिकॉर्ड ग्राम पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे, जबकि जाति प्रमाण पत्र जारी करने के काम की देखरेख संभागीय आयुक्त का कार्यालय करेगा। उन्होंने सरकार को मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस केस वापस लेने के लिए एक महीने का अल्टीमेटम भी दिया। फिलहाल अनशन तोड़ने के बाद उन्हें आगे की मेडिकल जांच और इलाज के लिए छत्रपति संभाजीनगर के एक अस्पताल ले जाया गया है।

कुनबी क्या है?

कुनबी महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में पाया जाने वाला एक प्रमुख कृषक (किसान) समुदाय है। ऐतिहासिक रूप से कुनबी समुदाय खेती-किसानी से जुड़ा रहा है और महाराष्ट्र के ग्रामीण समाज में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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