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महाराष्ट्र में BJP की बड़ी जीत के बाद कैसा होगा BMC चुनाव, क्या उद्धव बचा सकेंगे शिवसेना (UBT) की विरासत?

BMC election: महाराष्ट्र में नई सरकार के नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक की देरी है। इसके बाद देश के कई छोटे राज्यों से बड़े बजट वाली बीएमसी (BMC Elections) चुनावों की सुगबुगाहट भी तेज होने की संभावना है। शिवसेना ने एकनाथ शिंदे को ही सीएम बनाए रखने के लिए बीजेपी के सामने एक दलील यह भी रखी कि कम से कम बीएमसी चुनाव उनके नेतृत्व में ही हो जाने दें।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में 52,000 करोड़ से ज्यादा के बजट वाली एशिया की सबसे अमीर नगर नगर निकाय बीएमसी के चुनावों में पहले ही तीन साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है। यह चुनाव इस बार उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए अस्तित्व का चुनाव साबित हो सकता है, जिसका करीब तीन दशकों से इसपर कब्जा है।

bmc election

विधानसभा चुनावों के बाद बीएमसी चुनावों की बारी
असल में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में जिस तरह के नतीजे आए हैं, वह न केवल बीएमसी चुनावों के लिए मायने रखते हैं, बल्कि दोनों प्रमुख गठबंधनों- महायुति और महा विकास अघाड़ी के घटक दलों के बीच इसमें सीटों के बंटवारे के लिए भी बहुत ज्यादा अहमियत रखने वाले हैं।

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मुंबई में भी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी,महायुति को भारी बढ़त
मुंबई में विधानसभा की कुल 36 सीटें हैं। इनमें से 22 सीटें बीजेपी के अगुवाई वाले महायुति को मिली हैं और 14 सीटें शिवसेना (यूबीटी) की अगुवाई वाले एमवीए के खाते में गई हैं। महायुति की 22 सीटों में बीजेपी ने 15 सीटें (11 उपनगरीय और 4 आइलैंड सिटी) जीती हैं।

एमवीए में शिवसेना (यूबीटी) को ज्यादा सीटें
वहीं शिवसेना के खाते में गई सभी 6 सीटें उपनगरीय इलाकों की ही हैं। एनसीपी ने भी जो 1 सीट जीती है, वह उपनगरीय क्षेत्र की है।

एमवीए में सबसे ज्यादा 10 सीटें शिवसेना(यूबीटी) को मिली हैं। वह उपनगरीय क्षेत्र में 6 और 4 आइलैंड सिटी में जीती है। कांग्रेस को मिली 3 सीटों में 1 उपनगरीय और 2 आइलैंड सिटी की हैं। सपा की एकमात्र सीट भी उपनगरीय है।

बता दें कि मुंबई की कुल 36 विधानसभा सीटों में से 26 सीटें जो बांद्रा से दहिसर और चेंबूर से लेकर मुलुंड तक हैं, वे उपनगरीय इलाके कहलाते हैं। वहीं कोलाबा से लेकर धारावी और माहिम तक की 10 सीटें आइलैंड सिटी क्षेत्र में आती हैं।

उपनगरीय इलाकों में महायुति को मिले 51% वोट
सीटों के मामले में बीजेपी का दोनों ही इलाकों में अपना दबदबा दिख रहा है। हालांकि आइलैंड सिटी में शिवसेना यूबीटी भी टक्कर में लग रही है। अगर वोट शेयर के हिसाब से समीकरण देखें तो उपनगरीय इलाकों की सीटों पर महायुति को 51% वोट पड़े हैं और एमवीए सिर्फ 35% ही वोट जुटा सका है।

आइलैंड सिटी में एमवीए को वोट शेयर में मामूली बढ़त
लेकिन, आइलैंड सिटी में एमवीए को 44% और महायुति को 42% वोट आए हैं। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना किसी भी गठबंधन के साथ नहीं है, लेकिन मराठी-भाषी मतदाताओं में प्रभाव की वजह से वह क्रमश:उपनगरीय और आइलैंड सिटी में 6% और 10% वोट जुटाने में सफल रही है।

इसलिए, विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन की वजह से राज ठाकरे की पार्टी की मान्यता भले ही संकट में पड़ी हो, लेकिन अगर उन्होंने बीएमसी चुनावों में फिर से बीजेपी से हाथ मिला लिया तो उद्धव ठाकरे की यूबीटी का संकट गहराना तय है।

बीजेपी जहां जीती,वहां अधिकतर सीटों पर 50% से भी ज्यादा वोट
जहां तक भाजपा की जीती हुई 15 सीटों की बात है तो उसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगता है कि इनमें से 13 में उसे 50% से भी ज्यादा वोट मिले हैं। इनमें मालाबार हिल में सबसे ज्यादा 74% और कम की बात करें तो घाटकोपर वेस्ट में 43.77% और सायन-कोलवाड़ा में 48.26%.

सीधी लड़ाई में भाजपा यूटीबी पर पड़ी भारी
आइलैंड सिटी में बीजेपी और शिवसेना (यूबीटी) दोनों को ही चार-चार सीटें मिली हैं। लेकिन, तथ्य यह है कि उद्धव की पार्टी ने इनमें से तीन माहिम, वर्ली और बायकुला में शिवसेना को सीधी लड़ाई में हराया है और एक सीट पर एमएनसी के खिलाफ जीत दर्ज की है।

लेकिन, उसका दो ही सीटों पर बीजेपी से सीधा मुकाबला हुआ है और वह दोनों ही सीटें हार गई है। इसी तरह से बीजेपी ने कांग्रेस को सायन-कोलिवाड़ा और कोलाबा दोनों ही सीटों पर सीधे मुकाबले में हराया है। जबकि, कांग्रेस जो धारावी और मुंबादेवी में जीती है, वह उसे शिवसेना के खिलाफ लड़कर मिली हैं।

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जोगेश्वरी विधानसभा सीट पर अपनी पत्नी मनीषा वायकर की यूबीटी से हार को लेकर शिवसेना सांसद रविंद्र वायकर ने काह, 'क्षेत्र के 6 वार्ड में से 4 पर हमें बढ़त मिली। सिर्फ दो में जहां अल्पसंख्यकों की भारी आबादी है, वहां यूबीटी को मिले, जिसका उन्हें फायदा मिल गया। इससे लगता है कि वार्ड स्तर पर हमारी स्थिति काफी अच्छी है, यूबीटी सिर्फ अल्पसंख्यक वाले इलाकों में प्रभावी है।'

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