Viral Video: माइक टायसन बने शिवसेना MLA! कैंटीन कर्मचारियों पर बरसाए घूंसे, ये है पूरा मामला

Shiv Sena MLA Sanjay Gaikwad: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उस वक्त विवादों के घेरे में आ गई है, जब शिवसेना (मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। शिवसेना ( एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर इस कदर वायरल हुआ।

आम जनता से लेकर विपक्ष तक, हर कोई हैरान और नाराज नजर आ रहा है। यह वीडियो महज कुछ सेकंड का है, लेकिन उसमें नजर आने वाली हरकतें और व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों को मूक रूप से कुचलते हुए दिखते हैं।

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मुंबई के विधायकों के सरकारी हॉस्टल की कैंटीन में रिकॉर्ड हुए इस वीडियो में विधायक गायकवाड़ एक कर्मचारी को थप्पड़ मारते दिखते हैं, कैंटीन स्टाफ से गाली-गलौज करते हैं और अपना गुस्सा सब पर निकालते हैं - वजह सिर्फ इतनी कि उन्हें परोसा गया खाना "बासी और बदबूदार" लगा।

Shiv Sena MLA Sanjay Gaikwad का थप्पड़ का कांड

घटना 8 जुलाई की रात की है, जब Shiv Sena MLA Sanjay Gaikwad ने अपने कमरे में कैंटीन से मंगवाया गया खाना चखने के बाद गुस्से में आकर सीधे कैंटीन में धावा बोल दिया। वहां उन्होंने न सिर्फ मारपीट की, बल्कि अन्य कर्मचारियों को भी धक्का-मुक्की का शिकार बनाया और मौजूद लोगों से बिल न भरने की बात कही।

गायकवाड़ ने बाद में समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, "मैंने कई बार शिकायत की थी, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं होती है, तो ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं। जब कोई लोकतांत्रिक भाषा नहीं समझता, तब मुझे मजबूरी में यही भाषा बोलनी पड़ती है।" उन्होंने साफ किया कि उन्हें इस घटना पर कोई पछतावा नहीं है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका हमला भाषा या जाति के आधार पर नहीं था, बल्कि खराब सेवाओं के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि मैंने ये नहीं देखा कि वो मराठी था या हिंदी भाषी, मैंने सिर्फ खराब खाना के खिलाफ कार्रवाई की।

MLA Sanjay Gaikwad ने दूसरों को भी भुगतान न करने की सलाह

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गायकवाड़ न सिर्फ मारपीट करते हैं, बल्कि बिल का भुगतान करने से इनकार करते हैं और आसपास मौजूद अन्य लोगों से भी कहते हैं कि वे भी भुगतान न करें। इस दौरान कैंटीन स्टाफ गायकवाड़ को शांत करने की कोशिश करता है, लेकिन विधायक का गुस्सा थमने का नाम नहीं लेता।

विपक्षी पार्टियों ने इस घटना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। खासकर कांग्रेस ने संजय गायकवाड़ के पुराने बयानों को याद करते हुए कहा कि यह वही विधायक हैं जिन्होंने पिछले साल राहुल गांधी के एक बयान पर ₹11 लाख का इनाम घोषित कर दिया था, उस शख्स के लिए जो राहुल की जीभ काट कर लाए। कांग्रेस ने इस बयान को "घृणास्पद और असंवैधानिक" बताया था, और अब इस नए घटनाक्रम को उसी आक्रामक मानसिकता का परिणाम कहा जा रहा है।

गायकवाड़ की सफाई: "जहर जैसा खाना परोसा जा रहा है"

वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए संजय गायकवाड़ ने बुधवार, 9 जुलाई को कहा कि उन्होंने बार-बार कैंटीन स्टाफ से बेहतर भोजन देने की गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी बातें अनसुनी की जाती रहीं। गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि कैंटीन में अंडे 15 दिन पुराने होते हैं, नॉनवेज 20 दिन तक पुराना होता है और सब्ज़ियां भी 2-4 दिन पुरानी दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि मैं पिछले 30 सालों से इस कैंटीन में आता हूं और यहां 5.5 साल से रह रहा हूं। मैंने कई बार कहा कि अच्छा खाना परोसा जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। कोई कहता है खाने में छिपकली मिली, कोई कहता है चूहा या रस्सी मिली है।

गायकवाड़ ने यह भी कहा कि रसोई में गंदगी है और चूहे घूम रहे हैं, जिस पर प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। विधायक ने बताया कि हर साल हजारों शिकायतें सरकार को दी जाती हैं लेकिन कोई पूछताछ नहीं होती। उन्होंने कहा कि "किचन में चूहे हैं, गंदगी है... इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता। मैं अनुरोध करता हूं कि इस पर सख्त कार्रवाई हो ताकि जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।"

"ये बीजेपी का साथी है, इसलिए चुप है मीडिया" - प्रियंका चतुर्वेदी

इस घटना के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सत्ताधारी महायुति सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मिलिए शाह सेना के विधायक संजय गायकवाड़ से। पिछले साल इन्होंने राहुल गांधी की जुबान काटने पर 11 लाख का इनाम रखा था। अब एक गरीब कैंटीन कर्मचारी को पीट रहे हैं। लेकिन टीवी चैनलों पर कोई हंगामा नहीं, क्योंकि ये बीजेपी का सहयोगी है।"

विधानसभा सत्र में उठाएंगे मामला: Shiv Sena MLA Sanjay Gaikwad

गायकवाड़ ने यह भी कहा कि वह इस "बासी खाने" का मुद्दा महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में उठाएंगे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले भी शिकायतें की थीं, लेकिन कैंटीन की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ। इस घटना ने ना सिर्फ महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि विधायकों के विशेषाधिकार, उनके व्यवहार और आम कर्मचारियों के साथ उनके रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर लोग विधायक की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस वायरल वीडियो और जनदबाव के चलते महाराष्ट्र सरकार और विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह मामला भी अन्य राजनीतिक विवादों की तरह समय के साथ दब जाएगा।

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