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'सनातन ना होता तो जित्तुद्दीन हो गए होते', जितेंद्र आव्हाड के बयान पर भड़के संजय निरूपम और शाइना

Maharashtra News: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने सनातन धर्म पर एक विवादास्पद बयान दिया है जिस पर सत्‍तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल पार्टियां भड़क उठी है। जितेंद्र के बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उनके विवादित बयान पर शिवसेना (शिंदे गुट) की नेता शाइना एनसी और संजय निरुपम और नेतीखी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दलों को घेरा है।

आव्हाड के सनातन धर्म पर दिए बयान पर, शिवसेना नेता शायना एनसी ने कहा "विपक्ष के लिए सनातन धर्म की आलोचना करना एक चलन बन गया है। आव्हाड का यह कहना कि सनातन धर्म एक 'विकृत' और 'हिंदू धर्म से अलग' विचारधारा है, उनकी अज्ञानता दर्शाता है। ऐसे बेतुके बयान देकर वे जातिगत उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार के लिए जिम्मेदार हैं।"

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संजय बोले- सनातत होता न होता तो आज जित्तुद्दीन' हो गए होते'

राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता जितेंद्र अव्हाड पर सनातन धर्म को बदनाम करने हेतु कथित तौर पर फ़र्ज़ी कहानियाँ सुनाने का आरोप है। इस पर प्रतिक्रिया में, यह तर्क दिया गया है कि यदि सनातन धर्म नहीं होता, तो वे स्वयं अब तक शायद 'जित्तुद्दीन' हो जाते। सनातन का सबसे बड़ा योगदान भारत की सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं को हज़ारों वर्षों से संरक्षित रखने में है। यह भी कहा गया है कि सनातनी न होते तो यह देश कब का 'सऊदी अरब' बन जाता। ऐसे में, सनातन धर्म को 'आतंकवादी' कहना घोर अहसानफ़रामोशी है।

जितेंद्र आव्हाड क्‍या कहा था?

गौरतलब है कि शरद पवार गुट वाली एनसीपी के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा था , "सनातन धर्म ने भारत को बर्बाद कर दिया। सनातन धर्म नाम का कभी कोई धर्म था ही नहीं। हम हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। यह वही तथाकथित सनातन धर्म था जिसने हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज को उनका राज्याभिषेक नहीं करने दिया। इस सनातन धर्म ने हमारे छत्रपति संभाजी महाराज को बदनाम किया।

सावित्रीबाई फुले और अंबेडकर का भी किया जिक्र

इस सनातन धर्म के अनुयायियों ने ज्योतिराव फुले की हत्या का प्रयास किया। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पर गोबर और गंदगी फेंकी।" जितेंद्र आव्हाड ने कहा, "इसी सनातन धर्म ने शाहू महाराज की हत्या की साजिश रची। इसने डॉ. बी.आर. अंबेडकर को पानी पीने या स्कूल जाने की भी अनुमति नहीं दी। यह बाबासाहेब अंबेडकर ही थे जो अंततः सनातन धर्म के खिलाफ उठे, मनुस्मृति जलाई और उसकी दमनकारी परंपराओं को अस्वीकार कर दिया। मनुस्मृति का निर्माता स्वयं इसी सनातनी परंपरा से उभरा था। खुले तौर पर यह कहने में डरना नहीं चाहिए कि सनातन धर्म और उसकी सनातनी विचारधारा विकृत हैं।

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