"अब तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लग चुका होता", उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार में देरी के बीच बोली ये बात
महाराष्ट्र में भले ही चुनाव परिणाम महायुति के पक्ष में रहे हों, लेकिन मुख्यमंत्री की नियुक्ति और सरकार के गठन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि भाजपा ने नई सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख का ऐलान 5 दिसंबर कर दिया है। हालांकि सीएम पद को लेकर खुलासा नहीं हुआ है। वहीं महाराष्ट्र में चल रहे गतिरोध के बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे ने नई सरकार के गठन में देरी पर बड़ा बयान दे डाला है।
उद्धव ठाकरे ने कहा अगर उनकी पार्टी इस देरी के लिए जिम्मेदार होती, तो राज्य में अब तक राष्ट्रपति शासन पहले ही लागू हो चुका होता।

राजनीतिक नाटक में और इजाफा करते हुए ठाकरे ने पुणे में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बाबा अधव के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का जिक्र किया, जो चुनाव परिणामों के खिलाफ मुखर रहे हैं, खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ को लेकर चिंताओं को उजागर किया है।
उद्धव ठाकरे ने लाडली बहन योजना के माध्यम से वोटों में हेराफेरी के आरोपों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। जिसके बाद आलोचकों ने दावा किया है कि इस योजना को चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए बनाया गया था
इसके अलावा उद्वव ठाकरे ने सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आढाव जो ईवीएम को लेकर आंदोलन कर रहे है उनको लेकर कहा उन्होंने कहा "महाराष्ट्र क चुनाव के खिला पुणे के महात्मा फुले की जन्मभूमि में डॉ बाबा बीते तीन दिनों से आंदोलन कर रहे हैं उनसे मिले के लिए विपक्षी पार्टियों के नेताओं का ताता लगा हुआ है।
वहीं सरकार के गठन से पहले महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का संकट को लेकर देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में भारतीय जैन संगठन (BJS) के राष्ट्रीय अधिवेशन में कहा "महाराष्ट्र राज्य में हमेशा से 50 प्रतिशत पानी की समस्या रही है और जल संरक्षण ही एकमात्र ऐसी चीज है जो इस समस्या का समाधान कर सकती है।












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