गलत आधार लिंक होने से महिला के खाते से उड़ाया एक लाख रुपया, वापस करने से इनकार, बोला- मुझे PM मोदी ने दिया है
कोरोना महामारी के समय शख्स ने महिला के खाते से अंगूठा लगाकर पैसे निकाल लिए। वापस करने को कहा तो कहने लगा हमें पीएम मोदी ने दिए हैं।

Jharkhand: झारखंड के पश्चिमि सिंहभूम जिले में अजब मामला सामने आया है। यहां बैंक खाता किसी और का और आधार किसी और का है। महिला के खाते में गलत आधार कार्ड लिंक होने से शख्स ने उसके खाते से एक लाख रुपये उड़ा लिए। महिला को पता चलने पर बैंक में शिकायत की तो मालूम हुआ कि महिला के बैंक खाते में किसी और का आधार लिंक है। महिला के खाते से पैसे निकालने के आरोप में पुलिस ने शख्स को गिरफ्तार कर लिया है।
बैंककर्मी ने बताया कि महिला के खाते में गलती से अन्य शख्स का आधार कार्ड लिंक हो गया था, जिसके चलते ये घटना हुई। उन्होंने बताया कि दो साल पहले गलती से बीड़ी वर्कर जीतराय सामंत के आधार नंबर से महिला का खाता जुड़ गया था। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 42 वर्षीय जीतराय सामंत को इसलिए गिरफ्तार किया गया, क्योंकि उसने पैसे वापस करने में विफल रहा। साथ ही वह इस संबंध में समन के दौरान पेश नहीं हुआ, जिसके चलते उसे गिरफ्तार किया गया।
जीतराय ने कोविड महामारी के दौरान लॉकडाउन में कॉमन सर्विस सेंटर पर अंगूठा लगाकर पैसे निकाला था। लॉकडाउन में पैसे की जरूरत होने पर उसने कई बार पैसे निकाला था। कई महीनों बाद सितंबर 2022 में महिला ने झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक में शिकायत की। महिला श्रीमती लागुरी ने बैंक मैनेजर को दी शिकायत में कहा कि उनके खाते से पैसे साफ हो रहे हैं। गहनता से जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि आधार लिंकिंग में गलती हुई है। महिला के खाते में जीतराय सामंत नामक अन्य शख्स का आधार लिंक हो गया है।
जीतराय को जब पैसे वापस करने को कहा गया तो वह नहीं लौटाया। इसके बाद अक्टूबर में उसके खिलाफ मुफस्सिल पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने कहा कि पैसे निकालने के दौरान जीतराय ने खाताधारक का नाम देखा होगा, लेकिन उसने अनदेखी कर दी।
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वहीं, बैंक प्रबंधक मनीष कुमार ने बताया कि ग्रामीण बैंक के लिए प्रायोजन बैंक ऑफ इंडिया से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बदल गया। जब अप्रैल 2019 में पूरे डेटा को एसबीआई में मर्ज कर दिया गया तो सामंत का आधार नंबर गलती से किसी और के बैंक खाते से जुड़ गया। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला ने अगर पहले शिकायत की होती तो हम इसे रोक सकते थे। उन्होंने कहा कि यह गलती सिर्फ बैंककर्मियों की ही नहीं है। वहीं, यूएआईडीए के एक अधिकारी का कहना है कि यह गड़बड़ी स्पष्ट रूप से बैंक की है। पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर ने कहा कि आरोपी ने किसी को भनक न लगे इसके लिए उसने सीएससी प्वाइंट पर रिश्वत दी। पूछताछ में उसने पूरे विश्वास से कहा कि यह पैसा कोरोना के समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिए हैं।
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