मुंबई की अदालत ने ड्रग्स तस्करी मामले में महिला को किया बरी, कहा- 'पुरुषों के सामने ली गई उनकी तलाशी'
Mumbai Court Drugs Case: मुंबई कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। उन्होंने एक महिला को ड्रग्स रखने के आरोप से बरी कर दिया है। कोर्ट ने एनडीपीएस (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act 1985) अधिनियम का उल्लंघन करते हुए पुरुष अधिकारियों के सामने तलाशी लेने पर एक महिला को ड्रग्स रखने के आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि महिला की तलाशी पुरुष पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में की गई, जो एनडीपीएस अधिनियम का उल्लंघन है। साथ ही ट्रायल के दौरान, अभियोजन पक्ष मादक पदार्थ की जब्ती मामले में स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सके। बता दें कि महिला को 16 ग्राम हेरोइन रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

विशेष एनडीपीएस अदालत ने इस मामले में गोवंडी निवासी जायदा बानो उर्फ जूली जावेद हुसैन को बरी कर दिया। मादक पदार्थ रखने के संदेह में पुरुष अधिकारियों के सामने महिला की तलाशी ली गई। अदालत ने कहा कि यह निमयों का उल्लंघन है। क्योंकि, किसी भी महिला की तलाशी पुरुष पुलिस अधिकारियों के सामने नहीं ली जा सकती है।
मुंबई पुलिस के एंटी-नारकोटिक सेल ने जायदा बानो उर्फ जूली जावेद हुसैन को 16 ग्राम हेरोइन के आरोप में गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार 4 नवंबर 2011 को एएनसी की आजाद मैदान इकाई के पुलिस कांस्टेबल नीलेश पानसरे को सूचना मिली थी कि एक महिला जायदा बानो हेरोइन बेचने के लिए फ्लोरा फाउंटेन में आने वाली है। सूचना के आधार पर यूनिट के अधिकारियों ने मौके पर जाकर महिला को पकड़ने के लिए जाल बिछाया था।
महिला को नशीले पदार्थ रखने के आरोप में गिरफ्तार कर चालान कर दिया गया। ट्राइल के दौरान अभियोजन पक्ष स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सके। आरोपी ने तर्क दिया कि मामले की जांच करने वाले हेड कांस्टेबल केशव दलवी ने स्वीकार किया कि जब उसकी व्यक्तिगत तलाशी ली गई तो छापेमारी दल के सदस्य मौजूद थे। महिला की तलाशी के दौरान पुरुष पुलिस अधिकारी मौजूद थे।
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