ज्ञानवापी मस्जिद केस: अदालत में पहली जीत पर हिंदू पक्ष के वकील बोले- जल्द ही वहां भव्य मंदिर का निर्माण होगा
Gyanvapi Masjid Case News in Hindi: वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद से जुड़े शृंगार गौरी केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका दिया है।

Allahabad HC On Gyanvapi Masjid Case: उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर हिंदू पक्ष की ओर से पूजा करने के अधिकार की मांग करने के मामले में अहम सुनवाई की। इस मामले में वाराणसी कोर्ट में दायर पांच हिंदू महिला उपासकों के मुकदमे को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है।
अदालत के इस फैसले से अब हिंदू पक्ष की याचिका पर हो सकेगी सुनवाई
हिंदू महिला उपासकों के खिलाफ दी गई याचिका खारिज होने से जहां मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है वहीं हिंदू पक्ष के लिए अच्छी खबर है। अदालत के लिए इस फैसले से अब हिंदू पक्ष की नियमित पूजा की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
जल्द ही वहां एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा: हिंदू पक्ष के वकील
इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील हरि शंकर जैन ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि वह दिन दूर नहीं है जब हम वहां एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करेंगे और वर्तमान ढांचे को हटा दिया जाएगा। दरअसल, शीर्ष अदालत ने पांच महिला उपासकों द्वारा दायर मुकदमे की स्थिरता को बरकरार रखा है जो कि वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर पूजा करने का अधिकार मांग रहे हैं।
वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने भी किया स्वागत
हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि यह हिंदू पक्ष की बड़ी जीत है। हम अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति द्वारा दायर याचिका को खारिज करने के अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं, जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर पूजा करने के अधिकार की मांग करने वाली पांच हिंदू महिला उपासकों के मुकदमे की स्थिरता को चुनौती दी गई थी।
यह हिंदू पक्ष के लिए कोई बड़ी जीत नहीं: मुस्लिम पक्ष के वकील
ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता मोहम्मद तौहीद खान ने कहा कि यह हिंदू पक्ष के लिए कोई बड़ी जीत नहीं है क्योंकि अदालत ने अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति द्वारा दायर आदेश 7 नियम सीपीसी याचिका पर ही फैसला सुनाया। हम पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं। आदेश पढ़ने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।












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