Mumbai Monorail: 17 स्टेशनों को जोड़ने वाला सपना, जो बारिश में अटका! 3,000 करोड़ की लागत, फिर क्यों भटकी राह?
Mumbai Monorail Updates: मुंबई की सड़कों पर ट्रैफिक का तमाशा खत्म करने के लिए बनाई गई मुंबई मोनोरेल 19 अगस्त 2025 को भारी बारिश में फिर सुर्खियों में आई, जब चेंबूर और भक्ति पार्क के बीच एक ट्रेन अटक गई। करीब 150 यात्री दो घंटे तक फंसे रहे, बिना AC और बंद दरवाजों में 'दम घुटने' की हालत में।
लेकिन क्या है इस मोनोरेल की कहानी? यह कितने स्टेशनों को जोड़ती है, कितने में बनी, और अपने मकसद से कहां भटक गई? आइए, जानते हैं...

Mumbai Monorail: 17 स्टेशनों का जाल
मुंबई मोनोरेल 20 किमी लंबी लाइन पर 17 स्टेशनों को जोड़ती है, जो चेंबूर से वडाला और फिर संत गाडगे महाराज चौक (जैकब सर्कल) तक फैली है। चेंबूर, मैसूर कॉलोनी, भक्ति पार्क, वडाला डिपो, और जैकब सर्कल इसके प्रमुख स्टेशन हैं। इसका पहला चरण (चेंबूर-वडाला, 8.8 किमी): 1-2 फरवरी 2014 को शुरू हुआ था। वहीं, दूसरा चरण (वडाला-जैकब सर्कल, 11.2 किमी): 3-4 मार्च 2019 को चालू हुआ।
मुंबई मोनोरेल कितनी लागत में बनी?
मुंबई मोनोरेल परियोजना की अनुमानित लागत 3,000 करोड़ रुपये (लगभग $380 मिलियन) थी। ठेका 11 नवंबर 2008 को Larsen & Toubro और Scomi Engineering के कॉन्सॉर्शियम को 2,460 करोड़ रुपये में मिला। इसमें डिजाइन, निर्माण, और ऑपरेशन-मेंटेनेंस शामिल था। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने 2005 में इसकी योजना बनाई और इसे लागू किया।
मुंबई मोनोरेल का मकसद क्या?
मोनोरेल Straddle-type डिजाइन पर बनी, जो एक स्टील या कंक्रीट बीम पर चलती है। यह ALWEG-प्रेरित तकनीक संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों, और ऊंचाई बदलाव के लिए उपयुक्त है। लोकल ट्रेन और मेट्रो को जोड़ने के लिए एक तेज, हल्का, और इको-फ्रेंडली परिवहन सिस्टम माना गया। चेंबूर, वडाला, और सायन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुगम कनेक्टिविटी। मुंबई की जाम-पैक सड़कों पर वैकल्पिक परिवहन देना।
तकनीकी खामियां: कहां भटक गई राह?
19 अगस्त 2025 को चेंबूर-भक्ति पार्क के बीच मोनोरेल फंसने का कारण बिजली आपूर्ति में खराबी और ओवरलोडिंग था। MMRDA के जॉइंट कमिश्नर आस्तिक पांडे ने कहा, 'मोनोरेल की क्षमता 109 मीट्रिक टन थी, लेकिन भीड़ ने इसे ओवरलोड किया।' बार-बार बिजली और ब्रेक की समस्याएं (2014-25 में 20+ बार सर्विस बाधित)।
MMRDA ने अनुमान लगाया था कि रोज 3-4 लाख यात्री सफर करेंगे, लेकिन 2025 तक औसतन 15,000-20,000 यात्री ही रोज सफर करते हैं। 3,000 करोड़ की लागत के बावजूद, टिकट से होने वाली कमाई (10-40 रुपये प्रति टिकट) मेंटेनेंस और ऑपरेशन कॉस्ट को कवर नहीं कर पाती। भारी बारिश (19 अगस्त को 300-500 मिमी) ने मोनोरेल को बार-बार ठप किया।
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