Manoj Jarange Patil Net Worth: मराठा आरक्षण का ‘योद्धा’ जरांगे कितने अमीर? क्या करती है पत्नी-कितने बच्चे?
Manoj Jarange Patil Maratha Aarakshan Protest News: महाराष्ट्र की सियासत में एक नाम पिछले कुछ सालों से गूंज रहा है-मनोज जरांगे पाटिल। एक साधारण किसान से मराठा आरक्षण आंदोलन का चेहरा बने जरांगे ने अपनी भूख हड़तालों और विशाल रैलियों से सरकारों को हिलाकर रख दिया। 2 सितंबर 2025 को मुंबई के आजाद मैदान में उनकी अगुवाई में मराठा समुदाय का आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें 3 सितंबर की सुबह तक मैदान खाली करने का समय दिया, लेकिन जरांगे अडिग हैं। उन्होंने ऐलान किया, 'चाहे मेरी जान चली जाए, मैं मराठा आरक्षण के बिना मुंबई नहीं छोड़ूंगा।' इस जुझारू नेता की जिंदगी, उनके परिवार, संपत्ति और आंदोलन की कहानी उतनी ही रोमांचक है, जितनी उनकी लड़ाई। आइए, जानते हैं मनोज जरांगे पाटिल की पूरी दास्तान...

Who Is Manoj Jarange Patil: कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल?
1982 में बीड जिले के मटोरी गांव में जन्मे मनोज जरांगे पाटिल एक मराठा-कुणबी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता रावसाहेब और मां प्रभावती ने उन्हें सामुदायिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया। चार भाइयों में सबसे छोटे मनोज ने बारहवीं तक पढ़ाई की और फिर जालना के अंबाद में होटल में काम शुरू किया।
लेकिन उनकी जिंदगी का असली मकसद तब सामने आया, जब उन्होंने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की लड़ाई को अपना जीवन बना लिया। 2011 में उन्होंने 'शिवबा संगठन' बनाया, जो मराठा हितों की रक्षा के लिए समर्पित है। आज वो मराठा क्रांति मोर्चा और सकल मराठा समाज के अगुआ हैं, जिन्होंने 15 सालों में 35 से ज्यादा प्रदर्शन किए।
Manoj Jarange Patil Net Worth: कितने अमीर हैं जरांगे?
मनोज जरांगे पाटिल की जिंदगी सादगी की मिसाल है। उनकी कुल संपत्ति का अनुमान 10 लाख से 50 लाख रुपये के बीच है। उनकी आय का मुख्य स्रोत खेती और समुदाय से मिलने वाला सहयोग है। उनके पास कोई आलीशान गाड़ियां, महलनुमा घर या व्यावसायिक साम्राज्य नहीं है। उन्होंने अपनी 4 एकड़ जमीन में से 2.5 एकड़ बेच दी, ताकि आंदोलन को फंड कर सकें।
मनोज का घर जालना के अंकुशनगर में है, जिसमें सिर्फ जरूरी सामान-एक सोफा, दो कुर्सियां और छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्तियां और तस्वीरें हैं। उनकी सादगी इस बात से जाहिर होती है कि उनके पास न तो कार है और न ही बाइक। आंदोलन के लिए वो समर्थकों के साथ बसों और ट्रैक्टरों में सफर करते हैं।
Manoj Jarange Patil Wife, Children- पत्नी और बच्चे: परिवार की अनसुनी कहानी
मनोज जरांगे पाटिल की पत्नी का नाम सुमित्रा जरांगे (Sumitra Jarange) है, जो मराठा-कुणबी समुदाय से हैं। सुमित्रा अपने पति के मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। 2003 में शादी के बाद से वो मनोज के सामाजिक कार्यों की ताकत रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में सुमित्रा ने कहा, 'मनोज ने अपनी जिंदगी मराठा आरक्षण को समर्पित कर दी। हम भी उनके साथ उपवास पर हैं।'

मनोज और सुमित्रा के चार बच्चे हैं:-
- शिवराज जरांगे: बेटा, बी.टेक की पढ़ाई कर रहा है।
- पल्लवी जरांगे: बेटी, 8वीं कक्षा में पढ़ती है।
- दो अन्य बच्चे: एक बेटा और एक बेटी, जिनके नाम और उम्र सार्वजनिक नहीं हैं।
उनका परिवार जालना के अंकुशनगर में दो कमरों के साधारण घर में रहता है, जहां छत पर मैंगलोर टाइल्स और दीवारों पर चूना लगा है। हाल ही में बनी चारदीवारी और सीसीटीवी कैमरे ही उनके घर की आधुनिकता का प्रतीक हैं। उनके बच्चे और माता-पिता भी आंदोलन का हिस्सा हैं, और कई बार उपवास में शामिल हो चुके हैं।
Maratha Aarakshan Protest News- मराठा आरक्षण आंदोलन: एक जुझारू सफर
मनोज जरांगे पाटिल का नाम 2014 में उस वक्त सुर्खियों में आया, जब कोपर्डी में एक मराठा लड़की की हत्या ने पूरे महाराष्ट्र को हिला दिया। इस घटना ने उन्हें आरक्षण की लड़ाई में कूदने को प्रेरित किया। 2011 से शुरू हुई उनकी सक्रियता 2021 में सुप्रीम कोर्ट के मराठा आरक्षण रद्द करने के फैसले के बाद और तेज हुई।
- 2023: जालना के अंतरवाली-सारथी गांव में भूख हड़ताल, जहां पुलिस लाठीचार्ज ने आंदोलन को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया।
- 2024: जालना से मुंबई के आजाद मैदान तक विशाल मार्च, जिसमें लाखों मराठा शामिल हुए।
- 2025: 29 अगस्त से आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, जहां उन्होंने पानी तक छोड़ने की धमकी दी।
- 2 सितंबर 2025: महाराष्ट्र के मंत्री जरांगे से मिलने पहुंचे, इसपर आंदोलन में 'हम जीत गए' की गूंज छा गई। पाटिल ने कहा- यदि सरकार आरक्षण की मांगों पर जीआर (आदेश) जारी करेगी तो, आज रात 9 बजे तक मुंबई छोड़ देंगे।
क्या हैं जरांगे की मांगे?
जरांगे की मांग है कि मराठा समुदाय को कुणबी के तौर पर OBC कोटे में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें शिक्षा और नौकरियों में 10% आरक्षण मिले। उनकी जिद ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया, और 27 जनवरी 2024 को CM एकनाथ शिंदे ने उनकी मांगें मान लीं। लेकिन जरांगे का कहना है कि जब तक पूरा OBC कोटा लागू नहीं होता, वो पीछे नहीं हटेंगे।
क्या बनाता है जरांगे को खास?
मनोज जरांगे का जीवन सादगी और बलिदान की कहानी है। उन्होंने न सिर्फ अपनी जमीन बेची, बल्कि अपनी जिंदगी को मराठा समुदाय के लिए समर्पित कर दिया। 2004 में कांग्रेस के जालना युवा अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जेम्स लेन की किताब 'शिवाजी: हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया' के खिलाफ प्रदर्शन किया और पार्टी छोड़ दी। इसके बाद शिवबा संगठन बनाकर वो मराठा हितों के लिए लड़ते रहे। उनकी तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की जाती है, जिनके वो कट्टर प्रशंसक हैं और बचपन में उनके पोवाड़ा गाते थे।
मनोज जरांगे पाटिल एक साधारण किसान से मराठा आरक्षण का 'योद्धा' बन गए हैं। उनका सादा घर, छोटा-सा खेत, और परिवार का समर्थन उनकी ताकत है। लाखों मराठाओं की उम्मीदों का प्रतीक बने जरांगे की कहानी सिर्फ आरक्षण की नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स की है, जिसने अपने समुदाय के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया।
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