Maratha Reservation: मराठा आरक्षण के आंदोलनकारियों के आगे झुकी सरकार! जरांगे बोले- "हम जीत गए"
Manoj Jarange Patil Maratha Reservation: महाराष्ट्र सरकार ने मनोज जरांगे की कई मांगों को स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर जारी गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद है। 2 सितंबर, 2025 को राज्य मंत्री विखे पाटिल के नेतृत्व में एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे और उनके समर्थकों से मुलाकात की। इस बैठक के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने सहित कई अहम फैसले लिए गए।
बैठक के दौरान, सरकार ने जरांगे की हैदराबाद गजेटियर से संबंधित मांग को भी स्वीकार कर लिया। इसके अतिरिक्त, सितंबर के अंत तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने पर सहमति बनी। सरकार ने मराठा और कुनबी समुदायों को एक ही घोषित करने के लिए एक महीने का समय मांगा है।

मुंबई के आजाद मैदान में अपने समर्थकों के सामने जरांगे पाटिल ने मंगलवार को "हम जीत गए" की घोषणा की। यह घोषणा तब हुई जब महाराष्ट्र के मंत्री उनसे विरोध स्थल पर मिले और कथित तौर पर उनकी मुख्य मांगों पर सहमत हो गए।
रात 9 बजे तक शहर छोड़ देंगे
मुंबई में पांच दिनों के अनशन के बाद जरांगे ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि यदि महाराष्ट्र सरकार उनकी आरक्षण संबंधी मांगों को स्वीकार करते हुए औपचारिक रूप से सरकारी प्रस्ताव जारी करती है, तो वे आंदोलन समाप्त कर देंगे और रात 9 बजे तक शहर छोड़ देंगे।
महाराष्ट्र सरकार को जरांडे ने दिया अल्टीमेटम
बता दें मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम दिया है। उनकी मांग है कि सरकार एक जीआर (सरकारी प्रस्ताव) जारी कर मराठा और कुनबी समुदाय को एक समान घोषित करे। मंगलवार को, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जरांगे को 3 सितंबर तक मुंबई के आजाद मैदान में अपना आंदोलन जारी रखने की अनुमति दी। इसी के साथ उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को दो महीने का समय दिया है ताकि मराठा और कुनबी समुदाय को एक ही समुदाय के रूप में मान्यता देने वाला जीआर पारित किया जा सके।
जरांगे की क्या हैं मांगे?
सूत्रों के अनुसार, जरांगे ने सरकार से तीन सरकारी आदेश (GR) हटाने की मांग की है, जिसमें सतारा और हैदराबाद गजेटियर से संबंधित अलग-अलग GR शामिल हैं। जरांगे पाटिल की मुख्य मांग है कि महाराष्ट्र सरकार मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठा समुदाय को कुनबी के रूप में औपचारिक मान्यता दे, जिससे उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे के तहत लाभ मिल सकें। उनकी मांगों में हैदराबाद और सतारा गजट में सूचीबद्ध मराठों को भी कुनबी दर्जा देना शामिल है, जिसके बाद औंध और बॉम्बे गजट में भी यह मान्यता दी जाए।
GR लेकर आइए, उसी वक्त हम आंदोलन खत्म करेंगे
मनोज जरांगे ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त करने के लिए उन्हें सरकारी आदेश (GR) की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "GR लेकर आइए, उसी वक्त हम आंदोलन खत्म करेंगे और गुलाल उड़ाकर जश्न मनाएंगे। मंत्री जी को जगह दीजिए ताकि वे जाकर GR लेकर आ सकें।" उन्होंने मुंबई में सड़कों पर लगाए गए 5,000 रुपये के जुर्माने को तुरंत वापस लेने की मांग भी की, जिसे सरकार ने मान लिया।
90 फीसदी आंदोलनकारी छोड़ चुके हैं मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट में मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई हुई। मनोज जरांगे के वकील सतीश मानेशिंदे ने कोर्ट को बताया कि 90 प्रतिशत प्रदर्शनकारी मुंबई छोड़ चुके हैं और जरांगे ने सभी वाहनों को हटाने का आदेश दिया है। मानेशिंदे ने यह भी संकेत दिया था कि जल्द ही कैबिनेट सचिव और मनोज जरांगे के बीच मुलाकात हो सकती है, जो अब सफल रही है।
3 सितंबर को फिर सुनवाई करेगी कोर्ट
न्यायालय 3 सितंबर को सुनवाई फिर से शुरू करेगा, जिसमें निर्देश दिए गए हैं कि यदि इस बीच जरांगे का स्वास्थ्य बिगड़ता है तो सरकार को चिकित्सा सहायता प्रदान करनी होगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुष्टि की है कि उनका प्रशासन न्यायालय के निर्देशों का पालन करेगा, साथ ही आरक्षण की मांग को पूरा करने के लिए कानूनी उपायों की खोज भी करेगा।












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