'दलित हूं, इसलिए बाथरूम तक इस्तेमाल नहीं करने दिया', नवनीत राणा ने चिट्ठी लिख पुलिस पर लगाए आरोप
मुंबई, 25 अप्रैल: महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर विवाद के बीच हनुमान चालीसा पाठ को लेकर सियासी माहौल गर्माया हुआ है। निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके निर्दलीय विधायक पति रवि राणा ने सीएम उद्धव ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा करने का ऐलान किया था, जिसके बाद अचानक महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई हलचल पैदा हो गई। हालांकि पुलिस ने राणा दंपति को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं दोनों को बांद्रा की कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जमानत पर अब 29 अप्रैल को सुनवाई होगी। वहीं अब नवनीत राणा ने पुलिस पर बुरा बर्ताव करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है, जिसको लेकर अमरावती सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखा है।

नवनीत राणा का शिवसेना पर हमला
सांसद नवनीत राणा ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को एक चिट्ठी लिखी। अपने पत्र में नवनीत राणा ने शिवसेना पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि यह मेरा सच्चा विश्वास है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना अपने स्पष्ट हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह से भटक गई। उन्होंने आगे लिखा क्योंकि शिवसेना ने कांग्रेस-एनसीपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन किया है। और ऐसा करना उनकी मजबूरी है।

'धार्मिक तनाव को भड़काने के लिए नहीं था'
उन्होंने आगे लिखा,'मैंने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने की सच्ची आशा के साथ घोषणा की थी कि मैं मुख्यमंत्री के आवास पर जाऊंगी और उनके घर के बाहर "हनुमान चालीसा" का पाठ करूंगी। यह किसी धार्मिक तनाव को भड़काने के लिए नहीं था।'

'मेरी कार्रवाई मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं थी'
अमरावती सांसद नवनीत राणा ने ओम बिरला को बताया, 'वास्तव में, मैंने मुख्यमंत्री को "हनुमान चालीसा" के पाठ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। मैं दोहराती हूं कि मेरी कार्रवाई मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं थी। हालांकि, जब मैंने देखा कि मेरे यह ऐलान मुंबई में कानून और व्यवस्था की स्थिति के लिए गलत साबित हो सकता हैं, तो मैंने सार्वजनिक रूप से अपने कदम पीछे खींच लिए और फिर घोषणा की कि मैं सीएम आवास नहीं जाऊंगी। मैं अपने पति विधायक रवि राणा के साथ अपने घर में थी।'

'दलित हूं, इसलिए बाथरूम तक इस्तेमाल नहीं करने दिया'
सांसद ने आगे लिखा, "मुझे 23 अप्रैल को खार पुलिस स्टेशन ले जाया गया और मैंने पुलिस थाने में पूरी रात बिताई। मैंने रात भर कई बार और बार-बार पीने का पानी मांग की, लेकिन रात भर मुझे पीने का पानी नहीं दिया गया।" सांसद नवनीत राणा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखा, "मैं जोर देकर कहती हूं कि पीने के पानी जैसे बुनियादी मानवाधिकारों से मुझे इस आधार पर वंचित किया गया था कि मैं अनुसूचित जाति से संबंधित हूं। इसके अलावा, जब मैं रात में बाथरूम का इस्तेमाल करना चाहती थी, तो पुलिस कर्मियों ने ध्यान नहीं दिया। मुझे फिर से गंदी गाली दी गई...मुझे बताया गया कि हम नीची जात (अनुसूचित जाति) के लोगों को अपने बाथरूम को यूज नहीं करने देते।'












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