महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को तगड़ा झटका, दिग्गज नेता ने छोड़ा साथ, शिंदे गुट में हो रहे शामिल
Maharashtra News: शिवसेना (यूबीटी) को बुधवार को एक और तगड़ा झटका लगा है। ठाकरे गुट के दिग्गज नेता राजन साल्वी ने पार्टी को अलविदा कर दिया है। उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी साल्वी के इस्तीफे से शिवसेना यूबीटी गुट को बड़ा झटका लगा है। कोंकण क्षेत्र के दिग्गज नेता साल्वी के इस्तीफे के बाद अब जल्द एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
बता दें बीते सप्ताह उद्धव गुट के कई पदाधिकारी एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे। जिसका खुलासा एकनाथ शिंदे ने मीडिया के सामने खुद किया था।

राजन साल्वी, लंबे समय से रत्नागिरी जिले में शिवसेना का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रमुख नेता हैं और उद्धव ठाकरे के वफादार रहे हैं, लेकिन उन्होंने आंतरिक विवाद के चलते ये इस्तीफा दिया है। उनके पार्टी छोड़ने का फैसला तब हुआ जब ठाकरे ने विनायक राउत का पक्ष लिया, जिससे साल्वी को लगा कि उन्हें दरकिनार कर दिया गया है।
क्यों हैं ठाकरे शिवसेना के लिए बड़ा झटका?
राजन साल्वी के ठाकरे की शिवसेना छोड़ने से विरोधी शिंदे शिवसेना को सीधा लाभ मिलता दिख रहा है। कोंकंड क्षेत्र के लांजा, राजापुर और सखारपा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण ताकत रहे साल्वी के जाने से कोंकण क्षेत्र पर उद्धव ठाकरे गुट की पकड़ काफी कमजोर हो सकती है। वहां उनका मजबूत समर्थन आधार निर्णायक रहा है और उनके जाने से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में गुट की भविष्य की संभावनाओं के लिए चुनौती खड़ी हो गई है।
शिंदे शिवसेना में साल्वी हो सकते हैं शामिल
साल्वी गुरुवार, 13 फरवरी को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल होने जा रहे हैं। जिससे शिंदे गुट और मजबूत हो जाएगा। ये इस्तीफा महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं के बीच हुआ है, जिससे राज्य में राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
साल्वी को इस शख्स ने हराया था चुनाव
2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में साल्वी को एकनाथ शिंदे गुट के नेता किरण सामंत से हार गए थ। मंत्री उदय सामंत के भाई किरण सामंत ने कथित तौर पर साल्वी को अपने गुट में शामिल किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया है।
इस इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक में हलचल बढ़ गई है। महाराष्ट्र में ये बड़े बदलाव का संकेत है। याद रहे शिवसेना के शिंदे गुट ने दावा किया है कि उसका उद्धव खेमे के कई सांसदों और विधायकों से संपर्क है। यह स्थिति उद्धव ठाकरे गुट की स्थिरता को संदेह के घेरे में ला रही है, क्योंकि और अधिक दलबदल की संभावना है।












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