Maharashtra: मुस्लिम वोट बैंक से दूरी बनाएंगें उद्धव! BMC चुनाव से पहले कैसे बदली शिवसेना (यूबीटी) की रणनीति?
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में सारी रणनीति फेल होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे सियासी तौर पर पूरी तरह से यू-टर्न लेते नजर आ रहे हैं। बीते पांच वर्षों में उन्होंने कांग्रेस और एनसीपी(एसपी) के साथ जिस 'सेक्युलर' राजनीति में खुद को खपाया था, उससे पीछे हटकर वह वापस से हिंदुत्व और मराठी वाली राजनीति की ओर लौटते दिखाई पड़ रहे हैं।
उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेताओं का मानना है कि भले ही लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों में कुछ सीटों पर पार्टी को मुस्लिम वोट बैंक का फायदा मिला हो, लेकिन हकीकत ये है कि इसकी वजह से इसका मूल वोट बैंक पार्टी से छिटकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ओर शिफ्ट हो गया है। दादर रेलवे स्टेशन परिसर में 'अतिक्रमण' कर बनाए गए कुछ मंदिरों को मिले नोटिस का विरोध करके शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी पुरानी राजनीति में लौटने का संकेत दे दिया है।

उद्धव ठाकरे ने लिया सियासी यू-टर्न!
बीएमसी पर करीब 27 वर्षों से उद्धव ठाकरे और उनकी परिवार की पार्टी का कब्जा है। इस दौरान कई ऐसे मौके आए हैं, जब मुंबई में कई गैर-कानूनी धार्मिक ढांचे हटाए गए हैं, जिनमें कई मंदिर भी शामिल हैं। लेकिन, अब जब रेलवे ने दादर रेलवे स्टेशन पर एक छोटे से मंदिर को 'अवैध' बताकर हटाने के लिए नोटिस जारी किया तो उद्धव ठाकरे खुद उसे बचाने के लिए बैटिंग करने उतर पड़े।
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कांग्रेस और और शरद पवार की पार्टी से हाथ मिलाने के बाद उद्धव का यह एक्शन उनका सियासी यू-टर्न माना जा रहा है। क्योंकि, बीते पांच वर्षों में उन्होंने मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने वाला ही पॉलिटिकल स्टैंड लेने की कोशिश की है। उद्धव की पार्टी के एक नेता ने माना भी है कि मुस्लिम वोट के लिए कांग्रेस, एनसीपी के साथ जाने से उन्हें बहुत फायदा नहीं मिल रहा है।
हिंदुत्व की ओर लौटना तय कर लिया-शिवसेना (यूबीटी) नेता
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक शिवसेना (यूबीटी) के एक नेता ने कहा,'हां, लोकसभा में मुंबई और अन्य जगहों पर हमें कुछ सीटों पर अल्पसंख्यक वोटों का फायदा मिला। यूबीटी का कदम स्पष्ट संकेत है कि इसने यह देखने के बाद कि इसके मूल वोटर (मराठी और हिंदुत्व) शिवसेना (एकनाथ शिंदे) की ओर चले गए हैं, इसने हिंदुत्व की ओर लौटना तय कर लिया है।' उनका कहना है कि कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) के साथ रहने की वजह से हिंदुत्व को ठंडे बस्ते में रखना पड़ा था।
बीजेपी के हिंदुत्व को चुनौती देने की कोशिश में उद्धव?
बहरहाल, शनिवार को सेंट्रल रेलवे ने दादर रेलवे स्टेशन के बाहर एक हनुमान मंदिर समेत पांच 'अनधिकृत' मंदिरों को हटाने का काम रोक दिया है। इस मुद्दे पर विरोध करने में शिवसेना (यूबीटी) और बीजेपी के बीच होड़ लगी हुई थी। इसी विवाद के दौरान पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि सरकार दादर रेलवे स्टेशन के बाहर ऐसे ढांचों को नियमित करने के लिए कदम उठाएगी।
उन्होंने कहा, 'अपने एक पुराने फैसले में अदालत ने कुछ श्रेणियां बनाई थीं और उसी के अनुसार पुराने मंदिरों को नियमित किया जा सकता है। हम इसके लिए रास्ता निकालने के लिए रेलवे के अधिकारियों से बातचीत करेंगे।....'
जबसे दादर स्टेशन के बाहर स्थित ढांचे को हटाए जाने के लिए रेलवे की ओर से नोटिस जारी किया गया था, उद्धव ठाकरे ने इसके लिए बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया था और आरोप लगाने लगे थे कि बीजेपी का 'हिंदुत्व चुनावी' है और यह मंदिरों की रक्षा में नाकाम रही है, जिसमें सेंट्रल रेलवे के परिसर में स्थित 80 साल पुराना हनुमान मंदिर भी शामिल है।
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बीएमसी चुवाव को देखते हुए उद्धव ने लिया यू-टर्न?
बाद में जब रेलवे ने अपने कदम रोक लिए तो बीजेपी की ओर से पार्टी विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा और किरीट सोमैया ने वहां लोगों के साथ प्रार्थना की और फिर शाम में शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे भी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ महाआरती में शामिल हुए। दोनों ही दलों की अगली चुनौती बीएमसी चुनाव है, जिसमें अब बीजेपी को शिवसेना (यूबीटी) की बदली हुई राजनीति का मुकाबला करना है।












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