Maharashtra Politics: महायुति में विवाद कितना गंभीर है, CM फडणवीस को बगावती तेवर क्यों दिखा रहे एकनाथ शिंदे?

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में महायुति की सरकार बने करीब ढाई महीने ही हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के तेवर बार-बार बगावती हो रहे हैं। पिछले नवंबर में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन महायुति (NDA) की बड़ी जीत के बाद जिस तरह से शिंदे को देवेंद्र फडणवीस के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा, उसकी वजह से उनके हर ऐक्शन पर लोगों की नजर है।

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Maharashtra Politics: एकनाथ शिंदे को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद क्या है?

दरअसल, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने 'चीफ मिनिस्टर रिलीफ फंड'(CMRF) के बावजूद अपने मंत्रालय में एक'डिप्टी सीएम मेडिकल रिलीफ सेल' बनाई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने इसे संभवत: राज्य में इस तरह का पहला मामला बताते हुए कहा है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब महायुति गठबंधन (बीजेपी,शिवसेना,एनसीपी) के बीच जिले के प्रभारी मंत्रियों (Guardian ministers) की नियुक्तियों समेत कई मामलों को लेकर टकराव जारी है।

Maharashtra Politics: 'डिप्टी सीएम मेडिकल रिलीफ सेल' क्या करेगा?

शिंदे ने उसी मंगेश चिवेट को 'डिप्टी सीएम मेडिकल रिलीफ सेल' की जिम्मेदारी सौंपी है, जो उनके मुख्यमंत्री रहते सीएम रिलीफ फंड (CMRF)की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। चिवेट ने कथित तौर पर कहा है कि यह सेल फंड का आवंटन नहीं करेगा, बल्कि सिर्फ राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ तालमेल बिठाने का काम करेगा।

उनके मुताबिक, 'जब शिंदे मुख्यमंत्री थे, मैं सीएम रिलीफ फंड का इस्तेमाल इसी तरह के काम के लिए करता था और हमने कई लोगों की मदद की। अब, मैं वही कार्य करूंगा, सिर्फ फंड का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को सहायता दी जाएगी। '

चिवेट का कहना है, 'यह सेल लोगों को बताएगा कि सीएमआरफ के माध्यम से कैसे मदद ली जाए,साथ ही धर्मार्थ अस्पताल योजना,राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और केंद्र की आयुष्मान भारत योजना उसके बारे में गाइड करेगा।'दरअसल,महाराष्ट्र का स्वास्थ्य विभाग इस समय शिंदे की शिवसेना के पास है और प्रकाशराव आबिटकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हैं।

Maharashtra Politics: राजनीति खारिज करते हुए भी खुल्लम-खुल्ला राजनीति का संकेत दे रही है शिवसेना!

वैसे शिवसेना के नेता संजय शिरसाट का कहना है कि एकनाथ शिंदे ने लोगों को स्वास्थ्य सहायता पहुंचाने के लिए जो कल्याणकारी कदम उठाया है, उसपर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनका यहां तक कहना है कि मुख्यमंत्री के द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का नियंत्रण लेना, 'उचित नहीं है, क्योंकि वे सीएम रिलीफ फंड के माध्यम से इस अधिकार का उपयोग कर सकते हैं।'

पीटीआई ने उनके हवाले से बताया है, 'उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। मेरे विभाग के माध्यम से डिप्टी सीएम हेल्थ सेल को सपोर्ट करना मेरी ड्यूटी है और मैं यह करूंगा। ऐसे पहल को समर्थन देना सभी की ड्यूटी है। किसी को भी इसपर राजनीति नहीं करनी चाहिए।'

Maharashtra Politics: क्या शिंदे दे रहे हैं मुख्यमंत्री के अधिकारों को चुनौती?

भारतीय संविधान के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यपालिका का मुखिया होता है और सरकार उसी के माध्यम से और उसी के नाम से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। सरकार के हर फैसले के लिए जनता के प्रति भी वही जवाबदेह होता है। ऐसे में अगर हर मंत्री अपनी-अपनी इच्छा और पसंद के हिसाब काम करना शुरू कर देगा, तो सरकार के मुखिया के लिए उसपर नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता और सरकार की स्थिरता संकट में आ सकती है।

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