Maharashtra Politics: मराठा आरक्षण पर जंग! कैबिनेट बैठक से पहले छगन भुजबल आग बबूला हो निकले बाहर
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में इस वक्त मराठा आरक्षण को लेकर चल रहे प्रदर्शन की वजह से गर्मा-गर्मी का दौर है। इस बीच यह विवाद कैबिनेट बैठक तक पहुंच गया है। मनोज जरांगे का अनशन खत्म हो गया है, लेकिन यह मुद्दा अभी ठंडा नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि बुधवार को मंत्री छगन भुजबल इस मुद्दे पर काफी नाराज हो गए। कैबिनेट की बैठक से पहले ही कमरे से बाहर निकलते देखा गया। इस दौरान उनके चेहरे पर भी तनाव साफ नजर आ रहा था।
बता दें कि छगन भुजबल ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा था कि अगर मराठा आरक्षण को लागू करने के लिए ओबीसी आरक्षण के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ होगी, तो इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन होगा। बताया जा रहा है कि कैबिनेट बैठक से बाहर निकलकर वह सीधे MET शिक्षा संस्थान रवाना हो गए। वह इस संस्थान के ट्रस्टी भी हैं।

Maratha Reservation के विरोध में हैं छगन भुजबल
बता दें कि महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण बड़ा मुद्दा है। कोर्ट के फैसले की वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका, लेकिन शिवसेना, बीजेपी या एनसीपी कोई भी खुलकर इसके विरोध में नहीं है। दूसरी ओर छगन भुजबल खुले शब्दों में विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन ओबीसी हितों का मुद्दा उठा रहे हैं। भुजबल प्रदेश के बड़े ओबीसी नेता हैं और अपने वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए काफी तीखे तेवर में नजर आ रहे हैं। भुजबल ने इसी सप्ताह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक में आरक्षण सुरक्षित रखने के मुद्दे पर चर्चा की है।
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Chhagan Bhujbal ने जरांगे पर दागे सवाल
मराठा आरक्षण का प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे की आलोचना करते हुए छगन भुजबल ने कहा कि उनका आंदोलन अपनी दिशा खो चुका है। वरिष्ठ नेता और प्रदेश सरकार में मंत्री भुजबल ने मराठाओं को ओबीसी का दर्जा दिए जाने का विरोध करते हुए कहा, 'महाराष्ट्र में 374 समुदायों के लिए केवल 17 प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध है। ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे के लाभार्थियों में 8 प्रतिशत लोग मराठा समुदाय से आते हैं। मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में लाने का प्रत्यक्ष नुकसान ओबीसी वर्ग को ही होगा।'
Maharashtra Politics में रोज हो रही नई हलचल
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कई महीने से रोज ही नए कयासों का दौर चल रहा है। एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच मतभेदों की खबरों के बीच राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के एक साथ आने के दावे भी किए जा रहे हैं। इन सबके बीच अब छगन भुजबल के सख्त तेवर भी एनसीपी और अजित पवार की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
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