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Manoj Jarange Patil Caste: मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल की जाति क्या है?

Manoj Jarange Patil Caste: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की हुंकार एक बार फिर गूंज रही है, और इसके केंद्र में हैं मनोज जरांगे पाटिल-वो शख्स, जिसने अपनी जिद और भूख हड़तालों से सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। 2 सितंबर 2025 को मुंबई के आजाद मैदान में जरांगे की अगुवाई में मराठा समुदाय की जीत हुई, जब सरकार ने 'हैदराबाद गजट' लागू करने का ऐलान किया।

इस फैसले से मराठवाड़ा के मराठाओं को कुणबी जाति का दर्जा मिलेगा, जो OBC श्रेणी में आता है। इससे मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और नौकरियों में 10% आरक्षण का रास्ता साफ हो गया। लेकिन सवाल उठता है-मनोज जरांगे पाटिल की अपनी जाति क्या है? क्या वो मराठा हैं या कुणबी? आइए, इस सवाल का जवाब ढूंढते हैं और जानते हैं जरांगे की जिंदगी, उनकी लड़ाई, और मराठा आरक्षण की पूरी कहानी...

Manoj Jarange Patil Caste

Manoj Jarange Patil Caste- मनोज जरांगे पाटिल की जाति: मराठा-कुणबी का सच

मनोज जरांगे पाटिल का जन्म 1 अगस्त 1982 को बीड जिले के मटोरी गांव में एक मराठा-कुणबी परिवार में हुआ। मराठा और कुणबी (Kunbi Caste) को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक रूप से एक ही समुदाय का हिस्सा माना जाता है, जहां कुणबी को किसान वर्ग (OBC) और मराठा को योद्धा वर्ग (क्षत्रिय) के तौर पर देखा जाता है। जरांगे का दावा है कि मराठा समुदाय मूल रूप से कुणबी है, और 'हैदराबाद गजट' जैसे दस्तावेज इसका सबूत हैं। इस गजट में मराठवाड़ा के मराठाओं को कुणबी के तौर पर दर्ज किया गया था, जो OBC श्रेणी में शामिल है।

जरांगे खुद को मराठा-कुणबी कहते हैं और उनका तर्क है कि मराठा समुदाय को कुणबी के तौर पर OBC कोटे में शामिल किया जाए। उनकी इस पहचान ने ही उन्हें मराठा आरक्षण आंदोलन का चेहरा बनाया। 15 साल पहले जब वो इस आंदोलन से जुड़े, तब उन्होंने अपनी 4 एकड़ जमीन में से 2.5 एकड़ बेच दी, ताकि इस लड़ाई को फंड कर सकें। उनकी सादगी और समर्पण ने उन्हें मराठा समुदाय का 'शिवाजी' बना दिया। उनकी सादगी और जुझारूपन इस बात का सबूत है कि वो अपने समुदाय के लिए कितने समर्पित हैं।

What Is Hyderabad Gazette- हैदराबाद गजट: मराठा आरक्षण का 'गेम-चेंजर'

'हैदराबाद गजट' मराठा आरक्षण आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार है। ये 1948 से पहले की हैदराबाद रियासत (मराठवाड़ा का हिस्सा) की एक सरकारी अधिसूचना है, जिसमें कुणबी जाति को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा माना गया था। मराठा आंदोलनकारी, खासकर जरांगे, दावा करते हैं कि मराठा और कुणबी एक ही हैं। उनका तर्क है कि अगर कुणबी को OBC में मान्यता मिली है, तो मराठाओं को भी ये दर्जा मिलना चाहिए। इस गजट के साथ-साथ सातारा और बंबई गजट भी मराठा समुदाय के लिए ऐतिहासिक सबूत हैं।

जरांगे ने इन मांगों को लेकर 2021 से 2025 तक नौ भूख हड़तालें कीं। 2023 में जालना के अंतरवाली-सारथी में पुलिस लाठीचार्ज ने उनके आंदोलन को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। 2024 में जालना से मुंबई तक का उनका मार्च और 2025 में आजाद मैदान में अनशन ने सरकार को मांगें मानने पर मजबूर किया। 2 सितंबर 2025 को महाराष्ट्र सरकार ने इस गजट को लागू करने का फैसला किया। इसके तहत मराठवाड़ा के मराठाओं को उनके पूर्वजों के रिकॉर्ड के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र जारी होंगे, जो उन्हें OBC कोटे में आरक्षण दिलाएंगे। जरांगे ने सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम दिया था कि मराठा समुदाय को कुणबी का हिस्सा बताने वाला सरकारी आदेश (GR) जारी हो, और सरकार ने उनकी मांग मान ली।

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Manoj Jarange Ki Mange- जरांगे की मांगें: पांच सूत्री फॉर्मूला

मनोज जरांगे ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी थीं, जिन्हें 2 सितंबर 2025 को स्वीकार कर लिया गया:-

  • OBC में मराठा आरक्षण: मराठा समुदाय को कुणबी के तौर पर OBC कोटे में शामिल करना।
  • सगेसोयरे नोटिफिकेशन: खून के रिश्तों और वैवाहिक संबंधों के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र देना।
  • प्रदर्शनकारियों पर केस वापसी: आंदोलन के दौरान दर्ज मामले हटाने की मांग।
  • शिंदे समिति का विस्तार: मराठा आरक्षण के लिए बनी समिति को पूरे महाराष्ट्र में रिकॉर्ड खोजने का जिम्मा।
  • हैदराबाद गजट लागू करना: मराठवाड़ा के मराठाओं को कुणबी प्रमाणपत्र जारी करना।

इसके अलावा, जरांगे ने मांग की थी कि आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई करने वालों पर कार्रवाई हो और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। सरकार ने इन मांगों पर भी सहमति जताई।

मनोज जरांगे पाटिल की जाति-मराठा-कुणबी-उनके आंदोलन की रीढ़ रही है। उनकी सादगी, जिद, और समर्पण ने मराठा समुदाय को एकजुट किया और सरकार को झुकने पर मजबूर किया। लेकिन ये जीत सिर्फ एक शुरुआत है। क्या ये सामाजिक न्याय का नया अध्याय लिखेगी, या सियासी जंग का नया मैदान बनेगी? इसका जवाब वक्त देगा। फिलहाल, जरांगे का नाम महाराष्ट्र के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है!

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