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Maharashtra Politics: बीजेपी और शिवसेना फिर आएंगे एक साथ! एकनाथ शिंदे का क्या होगा राजनीतिक भविष्य?

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज है। उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणनवीस की मुलाकात के बाद बीजेपी और शिवसेना के साथ आने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच गुपचुप बैठकों और सॉफ्टनिंग बयानों की आज कल चर्चा में है। अगर वाकई बीजेपी और शिवसेना के रिश्तों में फिर से गर्मजोशी आती है तो सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का क्या होगा?

एकनाथ शिंदे और बीजेपी के बीच दूरियों की खबरें नई नहीं हैं। महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन के बाद से ही ऐसी चर्चा है कि शिंदे डिप्टी सीएम बनाए जाने और फिर मनचाहे मंत्रालय नहीं मिलने से नाराज हैं। इतना ही नहीं दावा यहां तक किया जा रहा है कि फडणवीस के साथ उनका तालमेल भी बेहतर नहीं बन पा रहा है। उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलों का दौर जारी है।

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Maharashtra Politics: एकनाथ शिंदे के लिए संकट?

विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने के बाद शिवसेना ने भाजपा से अलग होकर एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई थी। 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद सत्ता पलट गई। बीजेपी ने शिंदे को समर्थन देकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया। हालांकि, 2024 विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद शिंदे का कद घटाकर उन्हें डिप्टी सीएम बना दिया गया है। इसके बाद से लगातार ही उनके गठबंधन में असहज होने के दावे किए जा रहे हैं। इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि अगर फिर से उद्धव ठाकरे और बीजेपी साथ आ गए, तो एकनाथ शिंदे का राजनीतिक भविष्य क्या होगा? इतना तो तय है कि शिंदे के लिए आगे की लड़ाई बहुत मुश्किल हो सकती है।

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एकनाथ शिंदे की अब बीजेपी को जरूरत नहीं?

शिंदे की ताकत अब उतनी नहीं रही जितनी 2022 में दिखी थी। लोकसभा चुनाव 2024 में शिवसेना (शिंदे गुट) का प्रदर्शन कमजोर रहा था। हालांकि, विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन इसका ज्यादा श्रेय बीजेपी को दिया जा रहा है। बीजेपी को एहसास हो गया है कि शिंदे की लोकप्रियता सीमित है और अब गठबंधन में उन्हें अपनी शर्तों पर रखा जा सकता है। अजित पवार भी गठबंधन में हैं और उन्होंने न तो डिप्टी सीएम बने रहने पर ऐतराज जताया है और न ही कभी केंद्रीय मंत्रीमंडल में जगह या सीएम बनने जैसी महत्वाकांक्षा जाहिर की है।

बीजेपी और उद्धव ठाकरे का फिर साथ आना मुश्किल

बीजेपी और उद्धव ठाकरे का साथ आना इतना आसान नहीं है। हालांकि, राजनीति में असंभव लगने वाली चीजें भी संभव हो जाती हैं। अजित पवार के साथ बीजेपी का गठबंधन इसकी गवाही है। बीजेपी को महाराष्ट्र में फिर से मजबूत गठबंधन की जरूरत है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। उद्धव ठाकरे की सॉफ्ट इमेज, मराठी वोटबैंक और मुंबई पर पकड़ के साथ संघ को भी शायद उनकी वापसी पर ऐतराज न हो। शिवसेना और बीजेपी का लंबे समय तक साथ भी रहा है। हालांकि, उद्धव ठाकरे के लिए BJP के साथ जाना आसान नहीं होगा। वे बार-बार कह चुके हैं कि जिन्होंने पीठ में छुरा घोंपा, उनसे गठबंधन नहीं हो सकता।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे इंडिया अलायंस में अब सहज नहीं हैं। जिस तरीके से शरद पवार बीजेपी और संघ के लिए नरम रुख अपनाने लगे हैं, तो उद्धव और ज्यादा असहज हो गए हैं। उद्धव ठाकरे के सामने बेटे आदित्य का राजनीतिक भविष्य भी बड़ा सवाल है। ऐसे में हो सकता है कि वह इस संभावना से इनकार न करें।

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